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Interest Rate: ब्याज दर के मामले में विपरीत रास्तों पर क्यों चल रहे हैं अमेरिका और चीन? जानें पूरा मामला 

Fri, 17 Jun 2022 06:22 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, हांगकांग
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, हांगकांग Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 17 Jun 2022 06:22 PM IST
सार

अर्थशास्त्रियों ने इसे महत्त्वपूर्ण बताया है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस समय मौद्रिक नीति के मामले में एक दूसरे की विपरीत दिशा में चल रही हैं। फिलहाल चीन के सेंट्रल बैंक- पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीसी) ने एक वर्ष की अवधि के लिए लिए गए कर्ज पर ब्याज दर को 2.85 प्रतिशत पर स्थिर रखा है।

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Why are America and China following opposite paths in terms of interest rates Know the whole matter
जिनपिंग और बाइडन - फोटो : Amar ujala

विस्तार

एक तरफ अमेरिका में ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी हो रही है, उसी समय चीन आसान शर्तों पर मुद्रा उपलब्ध कराने की अपनी नीति पर आगे बढ़ रहा है। कुछ विश्लेषकों के मुताबिक बुधवार को अमेरिकी सेंट्रल बैंक- फेडरल रिजर्व के ब्याज दर 0.75 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी करने के बाद अब संभव है कि चीन ब्याज दर और घटाने में अभी थोड़ा और इंतजार करे, लेकिन इससे चीन की नीति बदलने की संभावना नहीं है।

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अर्थशास्त्रियों ने इसे महत्त्वपूर्ण बताया है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस समय मौद्रिक नीति के मामले में एक दूसरे की विपरीत दिशा में चल रही हैं। फिलहाल चीन के सेंट्रल बैंक- पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीसी) ने एक वर्ष की अवधि के लिए लिए गए कर्ज पर ब्याज दर को 2.85 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। पीबीसी बाजार में मुद्रा की उपलब्धता को बढ़ाने या घटाने के लिए मध्यावधि ऋण सुविधा (एक वर्ष की अवधि के लिए गए कर्ज पर ब्याज दर) को ही नियंत्रित करता है। 
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अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने के कारण दुनिया भर के निवेशक दूसरे बाजारों से पैसा निकाल कर अमेरिका में निवेश बढ़ा रहे हैं। इस वजह से डॉलर की कीमत विभिन्न मुद्राओं के मुकाबले बढ़ी है। इसका असर चीन के बाजार पर भी पड़ा है। इसके बावजूद चीन अपने रास्ते पर चलता दिख रहा है।
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निवेश कंपनी मैक्वायर कैपिटल के चीन संबंधी मुख्य अर्थशास्त्री लैरी हू ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि फेडरल रिजर्व के फैसले से निश्चित रूप से चीन पर दबाव बढ़ा है। इस वजह से पीबीसी ब्याज दर में और कटौती को लेकर अनिच्छुक हो गया है, लेकिन एक बड़ा देश होने के नाते चीन अपनी स्वतंत्र नीति को अपनाए रखेगा। चीनी अधिकारी आसान शर्तों पर कर्ज उपलब्ध करवा कर आर्थिक गतिविधियों को तेज करने की दिशा में आगे बढ़ते रह सकते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक चीन के लिए सबसे फायदे की बात यह है कि वहां मुद्रास्फीति दर बहुत कम है। मई में वहां महंगाई की दर 2.1 प्रतिशत ही रही। जबकि अमेरिका में ये दर 8.6 प्रतिशत रही। इसे देखते हुए चीन ने आर्थिक वृद्धि दर को ऊंचा बनाए रखने के लक्ष्य पर चलते रहने का फैसला किया है। चीन के प्रधानमंत्री ली किचियांग ने बुधवार को स्टेट काउंसिल (मंत्रिमंडल) की बैठक के बाद कहा कि हमें इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और ऐसे बड़े ऐडजस्टमेंट करने चाहिए, जिससे अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर एक तार्किक स्तर पर बनी रहे।

चीन के सेंट्रल बैंक के आंकड़ों के मुताबिक चीन में पूंजी का प्रवाह और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। स्टेट एडमिनिस्ट्रशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज के उप प्रमुख वांग चुनयिंग ने कहा है कि अस्थिर और अनिश्चित विदेशी पहलू अभी भी हमारे सामने हैं, लेकिन कोरोना महामारी पर नियंत्रण और बेहतर आर्थिक नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था में सुधार की गति तेज हो रही है। इससे हमें विदेशी मुद्रा बाजार और भुगतान संतुलन को स्थिर करने में मदद मिलेगी।


आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच जारी होड़ में महंगाई एक प्रमुख पहलू बन गई है। इसे काबू में ना रख पाने के कारण जहां अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका जताई जा रही है, वहीं चीन मुद्रास्फीति पर नियंत्रण की वजह से एक बार फिर अमेरिका से बेहतर आर्थिक स्थिति में नजर आ रहा है।

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