जानें, आखिर सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्र गान बजाने का फैसला क्यों किया
बुधवार को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश भर के सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राषट्रगान (जन, गण, मन) बजाना अनिवार्य हो गया है। इसको लेकर सोशल मीडिया में बहुत से लोग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। सर्वोच्च अदालत के फैसले को कुछ लोग अच्छा बता रहे हैं तो कुछ इसकी आलोचना भी कर रहे हैं। कुछ लोगों को लग रहा है कि कोर्ट ने जबरदस्ती देश भर के लोगों पर यह फैसला थोप दिया है। आखिर कोर्ट ने ऐसा फैसला क्यों दिया, इसके भी पीछे भी एक बड़ी वजह है, जिसे जानकर शायद ही कोई कोर्ट के फैसले की आलोचना करे।
दरअसल, सिनेमाघरों में राष्ट्र गान बजाने की मुहिम करीब 13 वर्ष पहले शुरू हुई थी। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक मध्यप्रदेश के श्याम नारायण चौकसे सिनेमा हॉल में उस वक्त आई फिल्म 'कभी खुशी कभी गम' देख रहे थे।
निर्माता करण जौहर की इस फिल्म के एक दृश्य में राष्ट्र गान फिल्माया गया था। राष्ट्र गान आते ही फिल्म देख रहे चौकसे खड़े हो गए। इस पर सिनेमा हॉल में बैठे बाकी दर्शक बैठे रहे और उन्होंने चौकसे का मजाक बनाया। तभी चौकसे ने प्रण कर लिया कि वे राष्ट्र गान को हर सिनेमा हॉल में सम्मान दिलाकर रहेंगे और उन्होंने मुहिम शुरू कर दी।
...13 साल बाद उसी जज ने सुनाया फैसला
चौकसे ने सबसे पहले मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित हाईकोर्ट में करण जौहर की फिल्म से राष्ट्र गान हटाने की जनहित याचिका डाली। काबिल-ए-गौर बात यह है कि उस वक्त चौकसे की याचिका पर सुनवाई करने वाले जज ने ही 13 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से ऐतिहासिक फैसला सुनाया। 2003 में याचिका की सुनवाई जस्टिस दीपक मिश्रा ने की थी।
जस्टिस मिश्रा ने उस वक्त आदेश दिया था कि करण जौहर को अपनी फिल्म 'कभी खुशी कभी गम' से राष्ट्र गान वाला हिस्सा हटाना होगा। कोर्ट ने आदेश दिया था कि जब तक राष्ट्र गान का वह हिस्सा हटा न लिया जाए तब तक फिल्म को सिनेमाघरों से हटा दिया जाए। लेकिन निर्माता-निर्देशक करण जौहर हाईतकोर्ट के फैसले पर स्टे लेने में सफल हो गए और फिल्म वैसी ही चलती रही।
राष्ट्र गान के सम्मान की मुहिम
लेकिन चौकसे ने धैर्य बनाए रखा और मुहिम भी जारी रखी। वह राष्ट्र गान से संबंधित तमाम जानकारियां जुटाते रहे। चौकसे ने 2014 में तमिलनाडु की सीएम जे जयललिता के शपथग्रहण समारोह में महज 20 सेकेंड बजाए गए राष्ट्र गान पर भोपाल में जनहित याचिका दायर की। इसके बाद इसी साल यानी सितंबर 2016 में चौकसे ने जनहित याचिका दायर की जिसमें कहा गया कि राष्ट्र गान का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधि के लिए नहीं होना चाहिए। याचिका में कहा गया कि राष्ट्र गान तो आधा-अधूरा नहीं, बल्कि एकबार शुरू होने पर इसे पूरा बजाया जाना चाहिए।
आखिरकार चौकसे की 13 वर्षों की मुहिम रंह लाई और सर्वोच्च न्यायालय ने सिनेमाघरों में फिल्मों के शुरू होने से पहले राष्ट्र गान को बजाना अनिवार्य कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राष्ट्र गान राष्ट्रीय पहचान, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक देशभक्ति का प्रतीक है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक राष्ट्र गान को वैरायटी सॉन्ग के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा न ही किसी तरह का ड्रामा करने के लिए और न ही किसी तरह के व्यावसायिक हित तो साधने के लिए इसका इस्तेमाल होना चाहिए। उम्मीद है चौकसे की मुहिम और उस पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में जानकर लोग राष्ट्र गान का सम्मान जरूर करेंगे।