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कानों देखी: नए भाजपा अध्यक्ष का इंतजार; इस हफ्ते राहुल-सोनिया से लेकर रॉबर्ट वाड्रा और ममता खूब रहीं चर्चा में

Sat, 19 Apr 2025 04:20 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sat, 19 Apr 2025 04:20 PM IST
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Who will be the new president of BJP? ED tightens its grip on Rahul-Sonia Gandhi; Know all about politics this
सियासी मैदान की हलचल - फोटो : Amar Ujala

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खासियत है। वह जितने सख्त हैं, उतने मुलायम (फ्लेक्सिबिल)। नतीजतन जब तक मोदी हैं, सबकुछ मुमिकन हैं। खबर है कि जल्द दो बड़ी पहल होगी। भाजपा को राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलेगा, केंद्र में मंत्रिमंडल में फेरबदल भी होगा। मोदी ने किंचित संघ को मना लिया है। भाजपा को उनके मन माफिक अध्यक्ष मिलेगा। चर्चा तो तमाम नामों की है, लेकिन नागपुर की सफल यात्रा ने एक बार फिर आत्म विश्वास बढ़ा दिया है। बढ़ाए भी क्यों न? अयोध्या को राम मंदिर मिला, कश्मीर से धारा 370 हटी। संघ का लगभग एजेंडा परवान चढ़ रहा है। राजनीतिक रूप से विपक्षी तंग है और अधिकांश बड़े राज्यों में भाजपा की सरकार है। संघ को और क्या चाहिए।

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क्या एंग्री आयरन मैन राहुल गांधी डर जाएंगे?
उधर बहनोई राबर्ट वाड्रा से पूछताछ हो रही है, इधर कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट दायर हो चुकी है। सोनिया गांधी के दामाद तो 2013 से ही भाजपा के निशाने पर थे। आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया? खबर है कि जांच ऐजेंसी का रडार एक बार फिर बिहार की तरफ घूमने वाला है। दक्षिण भारत में भी टोह ले रहा है और जल्द ही कुछ सुनने को मिल सकता है। कांग्रेस के एक पुराने केन्द्रीय मंत्री कहते हैं कि केन्द्र सरकार का यह खेल तो 2014 से चल रहा है। भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा दो कदम आगे निकलकर राहुल और सोनिया को नए जमाने का डकैत बता दे रहे हैं। इस मामले में भाजपा का हल्ला बोल चल रहा है और कांग्रेस का देश भर में प्रदर्शन। मीडिया विभाग के प्रमुख जयराम रमेश इसे भाजपा का विशुद्ध राजनीतिक वेंडेटा बता देते हैं। वहीं राहुल के साथ लोकसभा में बैठने वाले उनके साथी ने कहा कि क्या इससे राहुल गांधी डर जाएंगे? आपको लग रहा है कि ऐसा होगा? सच बात तो यह है कि अब सरकार डरने लगी है।
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भतीजे के अंदर-बाहर से कितनी मजबूत हो जाएंगी मायावती?
मायावती के भतीजे आकाश आनंद फिर बसपा में आ गए हैं। दो बार मायावती के कोप का भाजन हो चुके हैं। लेकिन साइकिल से कांशीराम की चिट्ठी नेताओं तक पहुंचाने वाले सूत्र का कहना है कि इससे क्या होगा? क्या 90 के दशक वालीमायावती, उनका तेवर और बसपा कहीं आपको दिखाई दे रही है? सूत्र का कहना है कि उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक मतों में बसपा 30 प्रतिशत तक वोट पाती थी। दलित और अनुसूचित जाति, जनजाति एकमुश्त हमारे साथ होती थी। लेकिन अब हमारा कॉडर ही काम नहीं कर पा रहा है। उनकी बस एक चिंता है कि न विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा, राज्यसभा में पार्टी की नुमाइंदगी खत्म हो गई? सूत्र का कहना है कि आप सोचिए? 400-500 रुपये का दिहाड़ी वाला मजदूर 3 दिन काम छोड़कर दिल्ली एनसीआर से 500-700 किमी दूर 14 अप्रैल को केवल बाबा साहेब की जयंती मनाने गया। उसकी श्रद्धा तो है, लेकिन उसकी नुमाइंदगी गायब है? अब अकेले राजा राम को नेशनल कोआर्डिनेटर बना देने से ही क्या हो जाएगा? सतीश मिश्रा जी क्या कर रहे हैं?
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तेजस्वी यादव ही होंगे बिहार में महागठबंधन के मुख्यमंत्री का चेहरा
कांग्रेस के बिहार के नेता किसी मुगालते में नहीं है। राहुल गांधी के एक करीबी कहते हैं कि राजद के बिना बिहार में मजबूत विपक्ष की कोई तस्वीर नहीं है। बाकी सब राजनीतिक दलों के आपसी पंचायत की बातें हैं। खैर कन्हैया कुमार बिहार में पार्टी की जमीन तैयार कर रहे हैं। सुनील कानूगोलू का आरंभिक सर्वे कांग्रेस को 30 से अधिक सीटों पर मजबूत दिखा रहा है। बिहार के कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु बहुत ईमानदारी से काम कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम पहले से ही राजद के अच्छे रिश्ते के लिए जाने जाते हैं।  तेजस्वी यादव के करीबी चुनाव रणनीतिकार कहते हैं कि इस बार राजद ईमानदारी से 90 सीट के आंकड़े को पार कर सकती है। पटना में महागठबंधन की माथा पच्ची चल रही है। ईबीसी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, दलित की गोलबंदी के लिए महागठबंधन कसरत भी कर रहा है। अब बाबू जगदानंद सिंह भले बैठक में नहीं आए, लेकिन राजद खेमे का कहना है कि मुकेश सहनी, पशुपति कुमार पारस, कांग्रेस, वामदल मिलकर बिहार में इस बार बड़ा खेला कर देगी।  

उत्तर प्रदेश में शुरू हो चुकी है 2027 की राजनीतिक लड़ाई
उत्तर प्रदेश में अभी चुनाव 22 महीने बाद प्रस्तावित है, लेकिन राजनीतिक लड़ाई अभी से शुरू हो गई है। कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय का भी कहना है कि पहले से सोचना पड़ेगा। समाजवादी पार्टी के नेता संजय लाठर को भरोसा है कि इस बार उनकी पार्टी बाबा को पटखनी दे देगी। सपा को उम्मीद है कि उसे बसपा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद के जयंत चैधरी की धार कुंद होने का फायदा मिलेगा। वक्फ संशोधन अधिनियम ने भी काफी राह आसान कर दी है। यह पूछे जाने पर कि क्या 2027 सपा अकेले लड़ेगी तो सपा नेता ने कहा कि बसपा के सिवा कोई बड़ा दल अकेले चुनाव लड़ रहा है। ऐसे में सपा-कांग्रेस का पीडीए वाला एजेंडा क्लियर है। उन्हें उम्मीद है कि अगड़ी जातियों में ब्राह्मण इस बार निर्णायक हो जाएगा। आइए भाजपा की तरफ चलते हैं। लखनऊ के ओबीसी के एक बड़े मंत्री का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहुत बड़ा चेहरा हैं, लेकिन थंपिंग मेजारिटी से चुनाव जीतने के लिए इस बार ओबीसी, दलित और अन्य का साथ रहना जरूरी है। इसकी कोशिशें चल रही हैं।


बंगाल में खेला होबै
भाजपा और टीएमसी दोनों को लग रहा है कि बंगाल में खेला होबै। ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी थोड़ा सा बदलाव चाहते हैं। पार्टी के भीतर खबर है कि वह कुछ युवा नेतृत्व को आगे रखना चाह रहे हैं, लेकिन ममता बनर्जी अपने टेस्टेड फार्मूले पर लौट गई हैं। ममता बनर्जी प्रतिकूल परिस्थिति में भी घबराती नहीं। उनके एक मंत्री का कहना है कि भाजपा के नेता सुवेंदु अधिकारी उसी फार्मूले को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं, जिस फार्मूले पर दिलीप घोष भाजपा को राज्य में मजबूत कर रहे थे। इसलिए सुवेन्दु को खास फायदा नहीं होने वाला है। भाजपा की आईटी सेल मुशिर्दाबाद की घटना से लेकर पिछले तमाम घटनाक्रमों में सब दांव अजमा चुकी है। भाजपा के एक पूर्व उपाध्यक्ष ने भी इससे सहमति जताई। उनका कहना है कि भाजपा ने सकारात्मक राजनीतिक पहल छोड़ दी है। केवल आरोप लगाने से क्या होगा? टीएमसी के तरीके से भगवा झंडा लेकर बंगाल में भाजपा राज थोड़ा मुश्किल सा है। अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि 2026 में तो भगवा सरकार ही बननी है। बंगाल तो आंदोलन को पसंद करता है।

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