राजीव धवन: मुस्लिम पक्ष की तरफ से लड़ा अयोध्या केस, 2017 में हुई थी सीजेआई से बहस
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सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले को लेकर बुधवार को आखिरी सुनवाई हुई। इस सुनवाई में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने एक नक्शा फाड़ दिया। कहा जा रहा है कि इस नक्शे में भगवान राम के जन्म स्थान की पूरी जानकारी है।
नक्शे को वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने पेश किया था और राजीव धवन ने उस नक्शे को पेश किए जाने का विरोध किया था। राजीव धवन सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों में से एक हैं, वरिष्ठ वकीलों की सूची में राजीव धवन का 130वां स्थान है और वह मई 1994 से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं।
राजीव धवन का अयोध्या मामले से संबंध
राजीव धवन सुप्रीम कोर्ट में चल रहे बाबरी मस्जिद के मामले में अगली पंक्ति में बैठने वाले वकीलों में से एक हैं। वह सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से केस लड़ रहे हैं। राजीव बाबरी मस्जिद, उसके इतिहास के साथ खड़े हैं और दूसरे पक्ष के राम मंदिर के दावों को खारिज कर रहे हैं।
अयोध्या मामले में राजीव धवन धमकियों का भी सामना कर रहे हैं। एक पूर्व सरकारी अधिकारी ने राजीव धवन को ये केस लड़ने को लेकर धमकी दी थी। लेकिन राजीव धवन ने अधिकारी के ही खिलाफ कोर्ट में केस दायर कर दिया। राजीव ने ये साबित करने की कोशिश की कि वह किसी से नहीं डरते।
अनुच्छेद 370 पर दी थी सुप्रीम कोर्ट को सलाह
अनुच्छेद 370 पर सवाल पूछे जाने पर राजीव धवन ने कहा था कि अगर ये मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट को ये नहीं कहना चाहिए कि कोर्ट इस मसले का हल नहीं निकाल सकता है। क्योंकि मैं यहां ये बात साफ करना चाहता हूं कि कोर्ट जरूर इस मसले का हल निकाल सकता है।
उन्होंने कहा था, मामले को समझने के लिए कोर्ट को असल आर्टिकल 370 की तह तक जाना होगा, और कोर्ट को इससे जुड़े राष्ट्रपति के आदेश को भी सही तरीके से समझना होगा।
2017 में सीजेआई से हो गई थी बहस
सुप्रीम कोर्ट में कई मौकों पर जज और वरिष्ठ वकीलों के बीच बहस होती है। लेकिन राजीव धवन के साथ तो ऐसा कई बार हो चुका है। वो भी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिसों के साथ। साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अदालत में एक केस की सुनवाई के दौरान राजीव धवन ने मुख्य न्यायाधीश के सामने ऊंची आवाज में बात करनी शुरू कर दी थी।
इससे चीफ जस्टिस खफा हो गए थे। मुख्य न्यायाधीश ने तब कहा था कि वकीलों को अपना बर्ताव देखना चाहिए, तथ्यों पर बात करनी चाहिए। लेकिन राजीव धवन को लगता था कि वो सही हैं। विरोध में राजीव ने इस्तीफा दे दिया था।