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चिंताजनक: बांझपन गंभीर वैश्विक समस्या, हर छह में से एक व्यक्ति प्रभावित; WHO ने जारी किए नए दिशानिर्देश
Sun, 30 Nov 2025 05:45 AM IST
शिवम गर्ग
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sun, 30 Nov 2025 05:45 AM IST
सार
डब्ल्यूएचओ के अनुसार बांझपन की चुनौती से दीर्घकालिक सफलता केवल उपचार से नहीं, बल्कि समय पर रोकथाम से हासिल होगी। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि युवाओं को शुरुआती उम्र से ही प्रजनन स्वास्थ्य की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि गलत धारणाओं और सामाजिक कलंक को कम किया जा सके।
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बांझपन गंभीर वैश्विक समस्या (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला / एएनआई
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विस्तार
वैश्विक स्तर पर बांझपन को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता का दर्जा देते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इतिहास में पहली बार बांझपन की रोकथाम, पहचान और उपचार के लिए व्यापक वैश्विक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर देश में प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं सुरक्षित, किफायती, न्यायसंगत और सभी के लिए सुलभ हों।
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संगठन के अनुसार बांझपन दुनिया की लगभग प्रजनन आयु के हर छठे व्यक्ति को प्रभावित करता है, फिर भी अधिकतर देशों में यह अभी भी व्यक्तिगत समस्या की तरह देखा जाता है व उपचार की लागत अत्यधिक महंगी है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने कहा कि इस गाइडलाइन में 40 सिफारिशें की गईं हैं।
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नए दिशा-निर्देश बांझपन की पहचान, रोकथाम व उपचार की तीन-स्तरीय प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर केंद्रित हैं। इसके मुख्य बिंदु हर चरण पर किफायती और प्रमाण-आधारित विकल्प, प्रजनन सेवाओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों और हेल्थ इंश्योरेंस ढांचे में शामिल करना, पुरुष और महिला दोनों की बराबर जांच, मरीज-केंद्रित चरणबद्ध निर्णय और साधारण परामर्श से लेकर आईयूआई आईवीएफ तक शामिल किए गए हैं।
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प्रजनन स्वास्थ्य की जानकारी पर जोर
डब्ल्यूएचओ के अनुसार बांझपन की चुनौती से दीर्घकालिक सफलता केवल उपचार से नहीं, बल्कि समय पर रोकथाम से हासिल होगी। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि युवाओं को शुरुआती उम्र से ही प्रजनन स्वास्थ्य की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि गलत धारणाओं और सामाजिक कलंक को कम किया जा सके। स्कूल स्तर पर प्रजनन और बांझपन से संबंधित शिक्षा शामिल करने, यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) का समय पर उपचार सुनिश्चित करने और धूम्रपान से दूरी, संतुलित भोजन तथा नियमित शारीरिक गतिविधि जैसी स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने को रोकथाम का मुख्य आधार बताया गया है। इन उपायों से भविष्य में कई दंपतियों को बांझपन के जोखिम से बचाया जा सकता है।
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गहरा भावनात्मक संघर्ष से उबारने की कवायद
डब्ल्यूएचओ ने यह भी स्पष्ट किया कि बांझपन से जूझ रहे लोगों में अवसाद, चिंता, आत्मग्लानि और सामाजिक अलगाव की संभावना अधिक होती है, इसलिए मानसिक स्वास्थ्य सहयोग को प्रजनन सेवाओं का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
भारत में उपचार की लागत अब भी ज्यादा
भारत दुनिया में आईवीएफ बाजार के सबसे तेजी से बढ़ते देशों में शामिल है, लेकिन उपचार की लागत अभी भी 80,000 से 3,00,000 रुपए प्रति चक्र और 70% खर्च जेब से करना पड़ता है। ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग के दंपतियों के लिए यह लगभग असंभव है। नई गाइडलाइन भारत के लिए तीन संभावित बदलावों का संकेत देती है। प्रजनन सेवाओं को आयुष्मान भारत और राज्य स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में शामिल किया जा सकता है। सार्वजनिक अस्पतालों में विशेष प्रजनन इकाइयां विकसित की जा सकती हैं। स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रजनन शिक्षा और जीवनशैली परामर्श जोड़ा जा सकता है।