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एंटीलिया मामला : कौन हैं सचिन वाझे जिनकी गिरफ्तारी की उठी मांग, 2004 में विभाग से हुए थे निलंबित

Tue, 09 Mar 2021 03:51 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Tanuja Yadav Updated Tue, 09 Mar 2021 03:51 PM IST
सार

  • देवेंद्र फडणवीस ने सचिन वाझे की गिरफ्तारी की मांग की
  • सचिन वाझे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर जाने जाते हैं
  • 1990 के बैच के पुलिस अधिकारी हैं और पुणे से करियर की शुरुआत की

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who is sachin vaze investigating the suspected car case of mukesh ambani house antilia
सचिन वाजे - फोटो : Social media

विस्तार

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने मनसुख हिरेन मामले में मंगलवार को पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की गिरफ्तारी की मांग की है। विधानसभा में बहस के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आईपीसी की धारा 201 (सबूत मिटाने) के तहत सचिन वाझे की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही है।

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भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने पूछा कि आखिर सचिन वाझे को कौन बचा रहा है। बता दें कि सचिन वाझे मुकेश अंबानी के घर के बाहर मिली संदिग्ध कार मामले की जांच कर रहे थे। देवेंद्र फडणवीस ने उन पर सबूत मिटाने का आरोप लगाया है और उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। इससे पहले भी कई बार सचिन वाझे सुर्खियों में रहे हैं। यहां सचिन वाझे के बारे में विस्तार से जानिए...
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कौन हैं सचिन वाझे?
सचिन वाझे 1990 बैच के पुलिस अधिकारी हैं और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट हैं। सचिन वाझे 2004 में गिरफ्तार किया गया था और उनके खिलाफ तथ्य छुपाने के संबंध में मामला दर्ज था। 2002 के घाटकोपर बम विस्फोट मामले में ख्वाजा यूनुस को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। 
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पुलिस ने बताया था कि जब यूनुस को औरंगाबाद ले जाया जा रहा था, तब वह फरार हो गया था लेकिन सीआईडी ने जांच में कहा गया था कि पुलिस हिरासत में ही ख्वाजा की मौत हो गई थी। 2004 में यूनुस मामले में सचिन वाझे की कथित भूमिका की वजह से उन्हें निलंबित कर दिया गया था। 


शिवसेना में हुए थे शामिल
इसके बाद साल 2008 में सचिन वाझे शिवसेना में शामिल हो गए थे। सचिन वाझे की तकनीकी पर अच्छी पकड़ थी इसलिए साल 2010 में लाल बिहारी नाम की नेटवर्किंग साइट भी शुरू की। सचिन वाझे ने अपने करियर की शुरुआत पुणे से की थी। बता दें कि सचिन वाझे ने शीना बोरा हत्या मामले और डेविड हेडली पर किताब भी लिखी थी। 

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