सीमा की रक्षा फिर प्रकृति के प्रहरी: रमेश खरमाले के हौसले ने बदल दी पहाड़ी की तकदीर, अब PM मोदी ने भी की तारीफ
हम यूहीं नहीं कहते हैं कि भारतीय सेना के जवान हमेशा देश सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। इसी बात का उदाहरण है कि पुणे के रहने वाले रमेश खारमाले। कभी भारतीय सेना में सेवा दे चुके खरमाले अब वन विभाग में वनरक्षक के रूप में अपना अतुल्य योगदान दे रहे हैं। पर्यावरण के लिए उनके योगदान को देखते हुए आज मन की बात कार्यक्रम के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने भी खारमाले की तारीफ की। आईए जानते है कि कैसे सेना के बाद उन्होंने वन को उपहार देने का प्रण लिया और आज वो लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
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भारतीय सेना के जवान हमेशा से ही देश की सेवा के लिए अपने अतुल्य योगदान के लिए जाने जाते हैं। अब वो चाहे सीमा पर जान की परवाह किए बिना देश की रक्षा करना हो या फिर पर्यावरण की। इसी क्रम में भारतीय सेना के इस जवान ने प्रमाणित किया है कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए उनका संकल्प अतुल्य है। जी हां हम बात कर रहे हैं पुणे जिले के जुन्नर तालुका के खोडद गांव में रहने वाले रमेश खारमाले की। खारमाले एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने अपने जीवन का हर पड़ाव समाज और देश सेवा को समर्पित किया है। एक समय वे भारतीय सेना में देश की रक्षा कर रहे थे और आज वे पर्यावरण की रक्षा के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह दिखाती है कि यदि संकल्प सच्चा हो, तो कोई भी बदलाव लाया जा सकता है।
कैसा रहा सेना से लेकर वनरक्षक तक का सफर
बता दें कि रमेश खारमाले ने भारतीय सेना में करीब 17 वर्षों तक सेवा की और 2012 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने बैंक में नौकरी की, लेकिन उन्हें वहां मन नहीं लगा। फिर उन्होंने युवाओं के लिए एक अकादमी शुरू की, जहां से कई युवक सेना में भर्ती हुए। लेकिन उनका मन समाज और प्रकृति की सेवा में अधिक रमता था। इसी सोच के साथ उन्होंने वन विभाग की परीक्षा दी और वनरक्षक के रूप में कार्य करना शुरू किया। देखते ही देखते उनके परिश्रम और लगन के चलते आज रमेश खारमाले को महाराष्ट्र सरकार, वन विभाग और कई सामाजिक संस्थाओं से पुरस्कार मिल चुके हैं। इतना ही नहीं आज मन की बात कार्यक्रम के प्रसारण के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने भी उनके योगदान की तारफी की और पर्यावरण के लिए उनके काम को सराहा। हालांकि खारमाले की माने तो वे इन सब चिजों को अपनी सफलता नहीं मानते। उनका कहना है कि प्रकृति हमें बहुत कुछ देती है, अब हमारी बारी है उसे लौटाने की।
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प्रकृति को उपहार देने का अनोखा संकल्प
इसके बाद 2021 में अपने जन्मदिन पर रमेश ने एक अलग ही संकल्प लिया। उन्होंने तय किया कि इस बार वे खुद के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति के लिए कुछ खास करेंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने जुन्नर के पास स्थित धामणखेल पहाड़ी पर जलसंवर्धन का कार्य शुरू किया। केवल दो महीनों में, रमेश और उनकी पत्नी स्वाती ने मिलकर 300 घंटे की मेहनत से 70 जलशोषक चर खोदे, जिनकी कुल लंबाई 412 मीटर थी। इन जलशोषक चरों की बदौलत एक ही मानसून में 8 लाख लीटर से ज्यादा पानी जमीन में समा गया, जिससे आसपास के जलस्तर को बढ़ाने में मदद मिली।
ऑक्सिजन पार्क से लेकर जंगलों को बचाने के लिए विशेष इंतजाम भी
जलसंवर्धन के साथ रमेश ने उसी पहाड़ी पर करीब 450 पेड़ भी लगाए। उनका उद्देश्य सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं था, बल्कि उन्होंने इसके जरिए एक स्थायी जैवविविधता प्रणाली विकसित करने का सपना देखा। इसके लिए उन्होंने ‘ऑक्सिजन पार्क’ का निर्माण भी किया, जिसमें उन्होंने विभिन्न किस्मों के पेड़ लगाए हैं। रमेश ने जंगलों को आग से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए, गर्मियों में पहाड़ी पर जाकर पेड़ों को पानी दिया और घायल पक्षियों व जानवरों का इलाज भी किया। वे वन्यजीवों की सेवा को भी अपने कर्तव्यों का हिस्सा मानते हैं।
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परिवार बना सबसे बड़ा सहारा
रमेश के इस सफर में उनके परिवार का पूरा साथ है। उनकी पत्नी स्वाती और स्कूल जाने वाले दोनों बच्चे भी सप्ताहांत में उनके साथ जलसंवर्धन और वृक्षारोपण में हाथ बंटाते हैं। रमेश बताते हैं कि बच्चों को मोबाइल से दूर रखने और प्रकृति से जोड़ने का यह सबसे अच्छा तरीका है। साथ ही रमेश ने सोशल मीडिया पर लोगों से पौधों की मदद मांगी और लोगों ने उन्हें 100 से ज्यादा पौधे दान में दिए। बच्चों और स्थानीय नागरिकों ने भी गर्मियों में पेड़ों को पानी देने में सहयोग किया।
पर्यावरण के लिए जरूरी हैं और रमेश, समझिए क्यों?
ध्यान देने वाली बात ये है कि आज जब जल संकट और वनों की कटाई जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, तब रमेश खारमाले जैसे निस्वार्थ लोग समाज के लिए एक मिसाल बनते हैं। उन्होंने दिखा दिया कि सिर्फ सरकार ही नहीं, आम लोग भी पर्यावरण की रक्षा में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। रमेश खारमाले की यह कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है, जो कुछ अलग करना चाहता है लेकिन शुरुआत करने से डरता है।