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Chenab Bridge: कौन हैं माधवी लता? जिन्होंने 17 साल की मेहनत के बाद सच किया चिनाब पुल का सपना
Sun, 08 Jun 2025 10:01 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 08 Jun 2025 10:01 AM IST
सार
भू-तकनीक के क्षेत्र में माधवी लता देश की शीर्ष वैज्ञानिक हैं और साल 2021 में उन्हें इंडियन जियोटेक्निकल सोसाइटी द्वारा बेस्ट जियोटेक्निकल रिसर्चर का अवार्ड भी दिया गया था।
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माधवी लता
- फोटो : एक्स/आईआईएससी बंगलूरू
विस्तार
बीते शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर में चिनाब पुल का उद्घाटन किया। यह पुल इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना है। साथ ही यह पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज (पुल) भी है। यह पुल 272 किलोमीटर लंबे उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक का हिस्सा है और साल 2003 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी। अब 2025 में जाकर ये प्रोजेक्ट आम जनता के लिए शुरू हुआ है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में जिन लोगों ने अहम भूमिका निभाई है, उनमें भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरू की प्रोफेसर माधवी लता का नाम प्रमुख है। माधवी लता ही चिनाब पुल प्रोजेक्ट की भू-तकनीकी सलाहकार थीं और उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर 17 साल काम किया।
कौन हैं माधवी लता
माधवी लता फिलहाल भारत के शीर्ष संस्थान भारतीय विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर हैं। डॉ. लता ने साल 1992 में नई दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की थी। माधवी लता ने बीटेक प्रथम श्रेणी से पास की थी। इसके बाद माधवी लता ने गोल्ड मेडल के साथ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, वारंगल से एमटेक की डिग्री हासिल की, जिसमें उन्होंने भू-तकनीक इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता हासिल की। डॉ.माधवी लता ने आईआईटी-मद्रास से साल 2000 में भू-तकनीक इंजीनियरिंग में डॉक्ट्रेट की पढ़ाई पूरी की। भू-तकनीक के क्षेत्र में माधवी लता देश की शीर्ष वैज्ञानिक हैं और साल 2021 में उन्हें इंडियन जियोटेक्निकल सोसाइटी द्वारा बेस्ट जियोटेक्निकल रिसर्चर का अवार्ड भी दिया गया था।
ये भी पढ़ें- Chenab Rail Bridge: दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल पर लगा है 'भिलाई का स्टील', 12000 टन से ज्यादा स्टील दिया
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चिनाब ब्रिज प्रोजेक्ट में रही अहम भूमिका
चिनाब पुल को बनाने में जम्मू कश्मीर की भौगोलिक स्थितियों ने खासी चुनौतियां पेश कीं। पहाड़ी इलाके में निर्माण कार्य बेहद मुश्किल और तकनीकी काम था। डॉ. लता की टीम ने चिनाब पुल के निर्माण में डिजाइन एज यू गो के दृष्टिकोण को अपनाया और हर चुनौती से पार पा लिया। डिजाइन एज यू गो दृष्टिकोण का मतलब है कि हर चुनौती से रियल टाइम के आधार पर निपटा गया जैसे टूटी हुई चट्टानों, छिपी हुई गुहाओं और अलग-अलग चट्टान गुणों को देखते हुए डिजाइन में रियल टाइम में बदलाव किए गए और नवाचार करते हुए इनसे निपटा गया। ये टूटी हुई चट्टानें आदि पूर्व में हुए सर्वे में स्पष्ट नहीं थे।
डॉ. माधवी लता की टीम ने निर्माण के दौरान जटिल गणना और डिजाइन संशोधन किए। पहाड़ों पर पुल की मजबूती और स्थिरता के संबंध में भी डॉ. लता ने अहम सुझाव दिए। उन्होंने हाल ही में इंडियन जियोटेक्निकल जर्नल के महिलाओं के विशेष अंक में 'डिजाइन एज़ यू गो: द केस स्टडी ऑफ़ चिनाब रेलवे ब्रिज' शीर्षक से एक पेपर प्रकाशित किया। पेपर में बताया गया है कि कैसे पुल का डिज़ाइन लगातार विकसित हुआ है। चिनाब रेलवे ब्रिज के निर्माण में 1,486 करोड़ रुपये की लागत आई है। चिनाब पुल को हाल के इतिहास में सबसे चुनौतीपूर्ण सिविल इंजीनयरिंग प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। 359 मीटर लंबा यह पुल एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा है। इस परियोजना से कश्मीर घाटी में कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
ये भी पढ़ें- पीएम मोदी ने चिनाब रेल पुल पर लहराया तिरंगा, भूकंप और धमाके का भी नहीं होगा असर
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कौन हैं माधवी लता
माधवी लता फिलहाल भारत के शीर्ष संस्थान भारतीय विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर हैं। डॉ. लता ने साल 1992 में नई दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की थी। माधवी लता ने बीटेक प्रथम श्रेणी से पास की थी। इसके बाद माधवी लता ने गोल्ड मेडल के साथ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, वारंगल से एमटेक की डिग्री हासिल की, जिसमें उन्होंने भू-तकनीक इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता हासिल की। डॉ.माधवी लता ने आईआईटी-मद्रास से साल 2000 में भू-तकनीक इंजीनियरिंग में डॉक्ट्रेट की पढ़ाई पूरी की। भू-तकनीक के क्षेत्र में माधवी लता देश की शीर्ष वैज्ञानिक हैं और साल 2021 में उन्हें इंडियन जियोटेक्निकल सोसाइटी द्वारा बेस्ट जियोटेक्निकल रिसर्चर का अवार्ड भी दिया गया था।
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चिनाब ब्रिज प्रोजेक्ट में रही अहम भूमिका
चिनाब पुल को बनाने में जम्मू कश्मीर की भौगोलिक स्थितियों ने खासी चुनौतियां पेश कीं। पहाड़ी इलाके में निर्माण कार्य बेहद मुश्किल और तकनीकी काम था। डॉ. लता की टीम ने चिनाब पुल के निर्माण में डिजाइन एज यू गो के दृष्टिकोण को अपनाया और हर चुनौती से पार पा लिया। डिजाइन एज यू गो दृष्टिकोण का मतलब है कि हर चुनौती से रियल टाइम के आधार पर निपटा गया जैसे टूटी हुई चट्टानों, छिपी हुई गुहाओं और अलग-अलग चट्टान गुणों को देखते हुए डिजाइन में रियल टाइम में बदलाव किए गए और नवाचार करते हुए इनसे निपटा गया। ये टूटी हुई चट्टानें आदि पूर्व में हुए सर्वे में स्पष्ट नहीं थे।
डॉ. माधवी लता की टीम ने निर्माण के दौरान जटिल गणना और डिजाइन संशोधन किए। पहाड़ों पर पुल की मजबूती और स्थिरता के संबंध में भी डॉ. लता ने अहम सुझाव दिए। उन्होंने हाल ही में इंडियन जियोटेक्निकल जर्नल के महिलाओं के विशेष अंक में 'डिजाइन एज़ यू गो: द केस स्टडी ऑफ़ चिनाब रेलवे ब्रिज' शीर्षक से एक पेपर प्रकाशित किया। पेपर में बताया गया है कि कैसे पुल का डिज़ाइन लगातार विकसित हुआ है। चिनाब रेलवे ब्रिज के निर्माण में 1,486 करोड़ रुपये की लागत आई है। चिनाब पुल को हाल के इतिहास में सबसे चुनौतीपूर्ण सिविल इंजीनयरिंग प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। 359 मीटर लंबा यह पुल एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा है। इस परियोजना से कश्मीर घाटी में कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
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