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सीआरपीएफ: ‘स्पंदन’ के जरिए करीब आ रहे कुकी-नगा युवा, कांगपोकपी में कबड्डी और मैराथन; एक मंच पर आए दोनों समुदाय
Wed, 16 Sep 2026 08:15 AM IST
एन अर्जुन
अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल।
अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल।
Published by: एन अर्जुन
Updated Wed, 16 Sep 2026 08:15 AM IST
सार
सीआरपीएफ के ‘स्पंदन’ कार्यक्रम की मदद से पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में कुकी-नगा युवाओं के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं। खेल के जरिए भरोसा बहाल करने की पहल की गई है। हिंसा से प्रभावित कांगपोकपी में कबड्डी, साइकिलिंग और मैराथन के बहाने दोनों समुदाय एक मंच पर आए।युवाओं के साथ ग्रामीणों को भी जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
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मणिपुर में सीआरपीएफ को स्पंदन कार्यक्रम से मिली सफलता
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा ने लोगों के बीच सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि सामाजिक दूरियां भी बढ़ाई हैं। ऐसे माहौल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने इन दूरियों को कम करने के लिए खेल को माध्यम बनाया है। कांगपोकपी जिले में ‘स्पंदन’ पहल के तहत आयोजित कार्यक्रमों में कुकी और नगा समुदायों के युवा एक साथ जुटे। कबड्डी के मैदान से लेकर साइकिलिंग और मैराथन के रास्ते तक युवाओं ने साथ हिस्सा लिया। इस दौरान ग्रामीणों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भागीदारी ने माहौल को और जीवंत बनाया।
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खेल के बहाने संवाद की शुरुआत
सीआरपीएफ की ‘स्पंदन’ पहल का उद्देश्य खेल के जरिए शांति, विकास और सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा देना है। मणिपुर एवं नगालैंड सेक्टर के आईजीपी के मार्गदर्शन में सीआरपीएफ की विभिन्न बटालियनों ने भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के सहयोग से याइकांगपाओ, मोटबुंग और मकुई में खेल आयोजन किए। संघर्ष से प्रभावित इलाके में इन आयोजनों का महत्व केवल प्रतियोगिता तक
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सीमित नहीं रहा। अलग-अलग समुदायों के युवाओं को एक साझा गतिविधि में शामिल होने का अवसर मिला। मैदान के किनारे खड़े ग्रामीण खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते नजर आए।
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कबड्डी में आठ टीमों ने लिया हिस्सा
याइकांगपाओ में 112वीं बटालियन ने पुरुष कबड्डी प्रतियोगिता कराई। इसमें आठ टीमों ने हिस्सा लिया। फाइनल में लोअर थांगाम्बा ने याइकांगपाओ को हराकर खिताब जीता, जबकि महिका की टीम तीसरे स्थान पर रही। विजेता टीम को 10 हजार, उपविजेता को सात हजार और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को चार हजार रुपये का नकद पुरस्कार मिला। तीनों टीमों को पदक और प्रमाणपत्र भी दिए गए। मोटबुंग में सी/112 बटालियन ने 10 किलोमीटर साइकिलिंग प्रतियोगिता आयोजित की। लम्तिनलाल सिंगसिट ने 28 मिनट 10 सेकंड में पहला स्थान हासिल किया। थांगगौमांग हाओकिप दूसरे और लैमगिनलेन वैफेई तीसरे स्थान पर रहे। खास बात
यह रही कि 45 वर्ष से अधिक उम्र के दो पूर्व सैनिकों—सातंगम किपगेन और कृष्ण बहादुर कार्की—ने भी हिस्सा लिया।
मैराथन में भी युवाओं का उत्साह
मकुई गांव में ए/67 बटालियन ने 10 किलोमीटर मैराथन कराई। आसपास के गांवों के युवाओं और ग्रामीणों ने इसमें उत्साह से भाग लिया। गॉस्पेल चावांगतिंगदुइमै ने 36 मिनट 12 सेकंड में दौड़ पूरी कर पहला स्थान हासिल किया। चूंचंबौ विजुनामाई और रॉबर्ट निखानामाई क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए गए।
मैदान में पहचान बनी खिलाड़ी की
सीआरपीएफ अधिकारियों के मुताबिक, ‘स्पंदन’ के जरिए युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के साथ समुदायों के बीच संपर्क बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। ए/67 बटालियन के प्रभारी सहायक कमांडेंट विक्रम ने भी खेल को युवाओं के व्यक्तित्व और सकारात्मक सोच के विकास का माध्यम बताया। कांगपोकपी जैसे संघर्ष प्रभावित जिले में इस पहल की तस्वीर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां सामान्य जिंदगी अब भी कई चुनौतियों से गुजर रही है। खेल किसी पुराने जख्म को एक दिन में नहीं भर सकता, लेकिन एक-दूसरे से मिलने और साथ खड़े होने का अवसर जरूर दे सकता है।