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कौन हैं रोहिंग्या और क्यों करना पड़ा था म्यांमार से पलायन

Thu, 04 Oct 2018 01:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 04 Oct 2018 01:01 PM IST
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Who are Rohingya and why did the migrants from Myanmar
Rohingya
म्यांमार में सैन्य अत्याचार के बाद रोहिंग्या मुसलमानों ने बहुत तेजी से पलायन किया था। हजारों की संख्या में रोहिंग्या बांग्लादेश और भारत पहुंचे। रोहिंग्या मुस्लिमों ने भारत में  शरण ली जिसका भारत सरकार ने विरोध किया और उन्हें भारत के लिए खतरा तक बताया। 
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गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय ने सात रोहिंग्याओं को म्यांमार वापस भेजने के आदेश पर किसी तरह की दखलअंदाजी करने से मना कर दिया, जिसके बाद आज सात लोगों को वापस भेजा जाएगा। ये रोहिंग्या अवैध रूप से असम में रह रहे थे। 
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भारत ने देश में बसे 40,000 रोहिंग्या शरणार्थियों की 'घर वापसी' के प्रयास शुरू कर दिए हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि 'म्यांमार के नागरिकों' को उनके देश भेजा जाएगा। म्यांमार में उनके खिलाफ हिंसा के चलते बड़े पैमाने पर रोहिंग्याओं को भारत और बांग्लादेश के लिए पलायन करना पड़ा था।  
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केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि म्यांमार ने रोहिंग्या को अपने नागरिक के तौर पर स्वीकार कर लिया है और वह उन्हें वापस लेने के लिए राजी हो गया है। रोहिंग्याओ के निर्वासन पर उच्चतम न्यायालय ने कहा, 'हम किए जा चुके फैसले में दखल देने के इच्छुक नहीं हैं।' केंद्र ने न्यायालय से कहा कि सात रोहिंग्याओं को विदेशी अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था।

केंद्र ने कहा कि म्यामांर ने सात रोहिंग्याओं के निर्वासन को सुगम बनाने के लिए एक महीने का वीजा और पहचान प्रमाण पत्र जारी किया गया है।

अर्जी पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने वकीलों को स्पष्ट कर दिया था कि इस तरह के मामलों पर मापदंड तैयार करने तक किसी तरह की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि आवेदन ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद इस मुद्दे पर पीठ तत्काल सुनवाई का निर्णय लेगा।

25 अगस्त, 2017 को म्यांमार के रखाइन प्रांत में हिंसा से रोहिंग्याओं के पलायन की शुरुआत हुई थी। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक तकरीबन 6.5 लाख रोहिंग्या म्यांमार से पलायन कर गए थे। 

Who are Rohingya and why did the migrants from Myanmar
रोहिंग्या मुसलमान
कौन हैं रोहिंग्या और क्यों किया था म्यांमार से पलायन 

म्यांमार की बहुसंख्यक आबादी बौद्ध है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की करीब 10 लाख की आबादी को जनगणना में शामिल नहीं किया गया था। रिपोर्ट में इस 10 लाख की आबादी को मूल रूप से इस्लाम धर्म को मानने वाला बताया गया है। जनगणना में शामिल नहीं की गई आबादी को रोहिंग्या मुसलमान माना जाता है। इनके बारे में कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं। सरकार ने उन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। हालांकि वे पीढ़ियों से म्यांमार में रह रहे हैं। 

रखाइन स्टेट में 2012 से सांप्रदायिक हिंसा जारी है। इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जानें गई हैं और एक लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान आज भी जर्जर कैंपो में रह रहे हैं। रोहिंग्या मुसलमानों को व्यापक पैमाने पर भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। लाखों की संख्या में बिना दस्तावेज वाले रोहिंग्या बांग्लादेश में रह रहे हैं। इन्होंने दशकों पहले म्यांमार छोड़ दिया था।

रोहिंग्या एक मुस्लिम समुदाय है जो सुन्नी इस्लाम को मानता है और रखाइन राज्य में कई वर्षों से रहता आ रहा है। रखाइन म्यांमार के सबसे गरीब राज्यों में से एक है। पिछले साल म्यांमार सैन्य कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में रोहिंग्याओं ने वहां से पलायन किया था। रोहिंग्या पर काम कर रहे कुछ लोगों का मानना है कि  रोहिंग्या की उत्पत्ति 15वीं सदी में हुई थी।  

म्यांमार में भेदभाव वाले कानून 
रोहिंग्या म्यांमार में सदियों से रहते आ रहे हैं। लेकिन सन् 1962 में म्यांमार में हुए तख्तापलट के बाद से इनपर जैसे आफत ही टूट गई। 1962 के बाद आई सरकारों ने रोहिंग्याओं के अधिकारों को राज्य में सीमित करना शुरू कर दिया। वहीं साल 1982 में रोहिंग्याओं को देश का नागरिक न मानने वाला एक कानून पास किया गया।

इस कानून की वजह से रोहिंग्याओं को स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ देश में कहीं भी आने-जाने के अधिकार पर भी रोक लगा दी गई। एक समय पर रखाइन में सरकार ने सिर्फ दो बच्चे पैदा करने वाली नीति तक लागू कर दी और अंतरजातीय विवाह पर रोक लगा दी थी। 
 

Who are Rohingya and why did the migrants from Myanmar
रोहिंग्या - फोटो : SELF

रखाइन प्रांत से क्यों भागे रोहिंग्या

म्यांमार में मौंगडोव सीमा पर 25 अगस्त 2017 को रोहिंग्या चरमपंथियों ने उत्तरी रखाइन में पुलिस नाके पर हमला कर 12 सुरक्षाकर्मियों को मार दिया था। इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने मौंगडोव जिला की सीमा को पूरी तरह से बंद कर दिया और बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया और तब से म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमानों का पलायन जारी है।

आरोप था कि सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों को वहां से खदेड़ने के मकसद से उनके गांव जला दिए और नागरिकों पर हमले किए। हिंसा के बाद से करीब चार लाख रोहिंग्या शरणार्थी सीमा पार करके बांग्लादेश में शरण लिया। म्यामांर के सैनिकों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के संगीन आरोप भी लगे। सैनिकों पर प्रताड़ना, बलात्कार और हत्या जैसे आरोप लगते रहे। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। 

वर्षों से जारी है रोहिंग्या के खिलाफ हिंसा 

वैसे तो रखाइन प्रदेश में सालों से रोहिंग्याओं को हासिए पर रखा गया। उनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई तक की गई। तनाव और हिंसा इतनी बढ़ी कि सैकड़ों- हजारों रोहिंग्याओं को म्यांमार छोड़ कर बांग्लादेश और पाकिस्तान में शरण लेनी पड़ी। साल 2012 में एक बौद्ध के साथ हुए बलात्कार और हत्या के बाद से मुस्लिमों के खिलाफ लगातार हमले हुए।

हिंसा इतनी बढ़ गई कि सेना ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की, रोहिंग्या महिलाओं के साथ अत्याचार हुए, लोगों को घर से निकालकर मारा गया नतीजतन सैकड़ों लोग पलायन को मजबूर हुए। 

भारत में कोई शरणार्थी कानून नहीं 
भारत ने अभी तक संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी संधी 1951 पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके अलावा 1967 में लाए गए इसके प्रोटोकॉल का भी हिस्सा नहीं है। भारत अनौपचारिक और अलग-अलग मामलों के हिसाब से शरणार्थियों के आवेदन पर फैसला लेता रहा है।

भारत की तरफ से शरण की अनुमति मिलने के बाद शरणार्थियों को लांग टर्म वीजा दिया जाता है। इसे हर साल रीन्यू किया जाता है। इसकी मदद से शरणार्थी रोजगार, बैंकिंग और शिक्षा जैसी सुविधाएं हासिल करते हैं। 

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