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Mulayam Singh Yadav: जब मुलायम-पवार ने मिलकर तोड़ दी थीं सोनिया गांधी की PM बनने की उम्मीदें, ऐसे दिया था झटका

Mon, 10 Oct 2022 06:15 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 10 Oct 2022 06:15 PM IST
सार

मुलायम द्वारा सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदों को झटका देने के बमुश्किल एक महीने बाद 15 मई, 1999 को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस में विद्रोह हुआ था।

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When Mulayam and Pawar dashed Sonia Gandhi's prime ministerial hopes
मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने अप्रत्याशित जोड़ी का गठन किया था जिन्होंने 1999 में ऐसी राजनीतिक घटनाओं को अंजाम दिया जिसने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदों को धराशायी कर दिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 17 अप्रैल, 1999 को लोकसभा में विश्वास मत हारने के बाद सोनिया गांधी ने केंद्र में सरकार बनाने का दावा पेश किया था। गांधी ने तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायणन से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति भवन में संवाददाताओं से कहा था कि हमारे पास 272 सांसद हैं और हमें उम्मीद है कि कुछ और का हमें समर्थन मिलेगा।  

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शरद पवार ने गांधी के विदेशी मूल का मामला उठाया था
लगभग एक महीने बाद लोकसभा में कांग्रेस के तत्कालीन नेता शरद पवार ने गांधी के विदेशी मूल का मामला उठाया था और कहा था कि कांग्रेस भाजपा का मुकाबला करने में सक्षम नहीं है। मुलायम द्वारा सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदों को झटका देने के बमुश्किल एक महीने बाद 15 मई, 1999 को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस में विद्रोह हुआ था। हालांकि सोनिया गांधी ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया था कि वह प्रधानमंत्री पद के लिए दौड़ में हैं, कई कांग्रेस नेता उन्हें शीर्ष कार्यकारी पद पर देखना चाहते थे।
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1998 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 182 सीटें जीती थीं
1998 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 182 सीटें जीती थीं, जिनमें से 57 अकेले उत्तर प्रदेश में थीं, जबकि कांग्रेस 141 संसदीय क्षेत्रों में विजयी हुई थी, लेकिन देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में एक भी सीट नहीं मिली थी। 1999 में सोनिया गांधी का समर्थन करने से मुलायम का इनकार एक झटके के रूप में सामने आया क्योंकि एक संभावित केंद्र सरकार का देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता। दूसरा झटका पवार के विद्रोह के साथ आया, जिसने महाराष्ट्र में कांग्रेस की उम्मीदों को धराशायी कर दिया जो लोकसभा में भेजे गए प्रतिनिधियों (48) की संख्या के मामले में दूसरा सबसे बड़ा राज्य था। 1998 में कांग्रेस ने महाराष्ट्र में 33 सीटें जीती थीं।
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पवार ने सियासी चाल से हासिल की सत्ता 
पवार राजनीतिक गलियारे में दोस्ती करने में सफल रहे और महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए अपने विद्रोह के कुछ महीनों बाद कांग्रेस से हाथ मिला लिया। हालांकि मुलायम यादव इस मोर्चे पर उतने सफल नहीं रहे। पवार ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में कृषि मंत्री के रूप में भी सत्ता में हिस्सेदारी का आनंद लिया। हालांकि कांग्रेस ने बाद में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने में मुलायम का समर्थन किया, लेकिन सपा कभी भी 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का हिस्सा नहीं रही।

सोनिया गांधी ने सोमवार को कहा कि यादव के निधन से समाजवादी विचारों की आवाज खामोश हो गई है। सोनिया गांधी ने अपने संदेश में कहा कि देश के रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में यादव का योगदान अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि इससे भी बढ़कर दलितों और पिछड़ों के लिए उनके संघर्ष को हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब भी देश के संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की जरूरत पड़ी, कांग्रेस को हमेशा उनका समर्थन मिला है। पवार ने कहा कि मुलायम यादव ने समाजवादी पार्टी को सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ मजबूती से खड़े होने के लिए एक मजबूत विचारधारा दी।  

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