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जब मुगल बादशाह औरंगजेब बन गए थे शाकाहारी

Wed, 10 Aug 2016 06:20 PM IST
सलमा हुसैन, बीबीसी
सलमा हुसैन, बीबीसी Updated Wed, 10 Aug 2016 06:20 PM IST
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when Mughal emperor Aurangzeb become a vegetarian
मुगल बादशाह औरंगजेब - फोटो : बीबीसी
यह आम धारणा है कि मुगल बादशाह गोश्त के बड़े शौकीन हुआ करते थे। जब भी मुगल काल के भोजन की बात होती है गोश्त, चिकन और मछली से बने खानों का जिक्र होता है। इतिहास के पन्नों पर नजर डाली जाए तो यह तथ्य उजागर होता है कि मुगल बादशाह अकबर, जहांगीर और औरंगजेब सब्जियों और साग-पात के शौकीन थे।
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अकबर अच्छे शिकारी थे लेकिन उन्हें गोश्त खाने से कोई विशेष लगाव नहीं था। हां लेकिन एक विशाल साम्राज्य की बागडोर संभालने और अपनी शारीरिक शक्ति बनाए रखने के लिए वो समय-समय पर गोश्त खाया करते थे। अपनी हुकूमत के शुरुआती दौर में वो हर शुक्रवार को मांस से परहेज किया करता थे। धीरे-धीरे रविवार का दिन भी इसमें शामिल हो गया।
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फिर हर महीने की पहली तारीख, मार्च का पूरा महीना और फिर अक्टूबर का महीना जो कि उनके पैदाइश का महीना था, उनमें भी वे मांस खाने से परहेज करने लगे थे। उनके खाने की शुरुआत दही और चावल से होती थी।
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अबुल फजल जिनकी गिनती अकबर के नव रत्नों में होती है, अपनी किताब आईन-ए-अकबरी में लिखते हैं कि अकबर की रसोई का खाना तीन श्रेणियों में बंटा हुआ था। अव्वल तो वो खाने जिनमें मांस शामिल नहीं थे। ये खाने सुफियाना खाने कहलाते थे। दूसरा वे खाने थे जिनमें मांस और अनाज एक साथ पकाया जाता था। तीसरा वे खाने थे जिनमें मांस, घी और मसाला के साथ पकाया जाता था।

अकबर की तरह जहांगीर का भी गोश्त से कुछ खास लगाव नहीं था

when Mughal emperor Aurangzeb become a vegetarian
इस वर्णन से इस बात का पता चलता है कि राजा की पहली पसंद वो खाने थे जिनमें दाल, मौसमी सब्जियां और पुलाव होते थे। अकबर की तरह जहांगीर का भी गोश्त से कुछ खास लगाव नहीं था। वो हर रविवार और गुरुवार को मांस से परहेज किया करते थे। वो न केवल मांस खाने से परहेज करते थे बल्कि इन दिनों में उन्होंने जानवरों को मारने पर भी पाबंदी लगा रखी थी।

यह एक ऐसी बात है जो मुगल बादशाहों की धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाता है। रसोइए राजा के स्वभाव को देखते हुए सब्जियों के बढ़िया पकवान तैयार करते थे और कई प्रकार के पुलाऊ पकाते थे जिनमें मांस शामिल नहीं होते थे। फलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों पर लगाए जाने वाले राजस्व कर भी माफ थे। यह बात दिलचस्प है कि अपने पूर्वजों के नक्शेकदम पर चलते हुए औरंगजेब तो कुछ और ही आगे निकल गए।

उम्र के शुरुआती दौर में वो मुर्ग-मसलम और स्वादिष्ट खानों के शौकीन थे। लेकिन उनसे जुडे दस्तावेज के मुताबिक औरंगजेब को खाने का खूब शौक था। एक बार अपने बेटे को लिखे खत में उन्होंने लिखा कि तुम्हारे यहाँ की खिचडी और बिरयानी का मजा अब भी मुझे याद है। मैंने तुम्हें लिखा था कि सुलैमान रसोइया जिसने बिरयानी तैयार की थी उसे मेरे पास भेज दो लेकिन उसे शाही रसोई में आकर पकाने की अनुमति नहीं मिली अगर कोई शागिर्द हो जो ऐसा ही खाना पकाता हो और तुम्हारे पास मौजूद हो तो उसे भेज दो। अभी भी अच्छे खाने का शौक मेरे स्वभाव में है।

पनीर से बने कोफ्ते और फलों के इस्तेमाल से बने खाने औरंगजेब की देन

when Mughal emperor Aurangzeb become a vegetarian
food - फोटो : bbc
लेकिन बादशाह ने ताज क्या पहना और जंग में ऐसे उलझे कि अच्छे खाने की बात पुराने जमाने की बात बनकर रह गई। और औरंगजेब का मांस से परहेज उनकी आदत बन गई। उनकी मेज सादे खानों से भरी रहती थी और शाही रसोइए सब्जियों के उम्दा दर्जे के पकवान बनाने की हर संभव कोशिश करते थे। ताजा फल औरंगजेब की कमजोरी थे और वो आम के बड़े शौकीन थे।

औरंगजेब भारत के एक ताकतवर शासक थे। उनका साम्राज्य उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में आखिरी छोड़ तक और पश्चिम में काबुल से लेकर पूर्व में चटगांव तक फैला हुआ था। उन्होंने वे सब कुछ हासिल किया जिसके लिए उन्होंने लड़ाइयां लड़ीं। मुगलों का साहस और बहादुरी उनमें मौजूद थी। उन्हें जवानी में शिकार का शौक था लेकिन बुढ़ापे में उन्होंने शिकार को 'बेकार लोगों का मनोरंजन' बताया।

एक बादशाह का गोश्त खाने से परहेज रखना वाकई में अचरज वाली बात है। गेहूं से बने कबाब और चने की दाल से बने पुलाव औरंगजेब का पसंदीदा खाना था। पनीर से बने कोफ्ते और फलों के इस्तेमाल से बने खाने औरंगजेब की देन हैं।

(सलमा हुसैन भोजन विशेषज्ञ और इतिहासकार हैं। उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं और बड़े होटलों के में खाद्य सलाहकार के रूप में भी काम करती हैं।)
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