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WHC: नेपाल-UK के इन ऐतिहासिक स्थलों की कराई जाएगी जांच; विश्व धरोहर समिति की बैठक में बोले यूनेस्को के अधिकारी
Tue, 23 Jul 2024 02:37 AM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा झा
Updated Tue, 23 Jul 2024 02:37 AM IST
सार
यूनेस्को द्वारा बताया गया कि नेपाल के लुम्बिनी और ब्रिटेन के प्राचीन स्टोनहेंज स्थल की विश्व धरोहर समिति द्वारा जांच की जाएगी। उनका मानना है कि इन प्रतिष्ठित स्थलों के मूल्यों को प्रभावित कर सकते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pti
विस्तार
भारत में पहली बार विश्व धरोहर समिति 46वें सत्र आयोजित हो रहा है। इस दौरान यूक्रेन के तीन स्थलों सहित खतरे में पड़ी विश्व धरोहरों की सूची में शामिल यूनेस्को विरासत संपत्तियों के संरक्षण की स्थिति पर भी चर्चा की जाएगी। भारत 21 जुलाई से 31 जुलाई तक भारत मंडपम में यूनेस्को के प्रमुख कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है।
सोमवार को विश्व धरोहर संपत्तियों के संरक्षण की स्थिति पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में यूनेस्को विश्व धरोहर के निदेशक लाज़ारे एलौंडौ असोमो ने कहा कि समिति दो विशेष स्थलों की जांच करने जा रही है, उनमें से एक लुम्बिनी है और दूसरा ब्रिटेन में स्टोनहेंज है। सुझाव दिया गया कि ये दोनों स्थल संभावित रूप से खतरे में विश्व धरोहर की सूची में शामिल हो सकते हैं, इसलिए इनकी जांच की जरूरी है। ये दोनों स्थल विश्व धरोहर सूची में हैं, लेकिन खतरे में विश्व धरोहर की सूची में नहीं हैं।
लुम्बिनी की जांच पर पर उन्होंने बताया कि "जब लुम्बिनी की बात आती है तो लुम्बिनी समिति के लिए और पूरी दुनिया के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थल है। यह एक बहुत ही पवित्र स्थल है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। कई मुद्दे हैं, कुछ विकास के दबाव से संबंधित हैं जो पिछले में देखे गए हैं।" उन्होंने कहा कि "एक साथ आना और नेपाल सरकार के साथ मिलकर काम करना और स्थिति को उलटना और संबोधित करना वास्तव में महत्वपूर्ण है, क्योंकि, नेपाल सरकार को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। इसके लिए एक साथ काम करने की आवश्यकता है। लुम्बिनी को 1997 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में अंकित किया गया था।
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असोमो ने बताया कि स्टोनहेंज में विकास की स्थिति लगातार बनी हुई है। अधिकारी एक ऐसी परियोजना को लागू करना चाहते हैं जो स्टोनहेंज के मूल्यों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए, विचार सबसे अच्छा समाधान खोजने का है, इन दो साइटों पर समिति के सदस्यों के बीच चर्चा करना है। वहीं स्टोनहेंज, एवेबरी और संबंधित स्थलों को 1986 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में अंकित किया गया था। विल्टशायर में स्टोनहेंज और एवेबरी दुनिया में मेगालिथ के सबसे प्रसिद्ध समूहों में से हैं।
हालांकि, यूनेस्को के अधिकारी ने उन सटीक मुद्दों पर विस्तार से नहीं बताया जिनके कारण विश्व धरोहर समिति द्वारा दो साइटों की जांच की आवश्यकता है। यूनेस्को की वेबसाइट के अनुसार, 56 संपत्तियाँ हैं जिन्हें विश्व धरोहर समिति ने विश्व धरोहर सम्मेलन के अनुच्छेद 11 (4) के अनुसार खतरे में विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने का निर्णय लिया है।
इन स्थलों में अफगानिस्तान में बामियान घाटी के सांस्कृतिक परिदृश्य और पुरातात्विक अवशेष, ऑस्ट्रिया में वियना का ऐतिहासिक केंद्र, लीबिया में साइरेन का पुरातात्विक स्थल और यूक्रेन में तीन स्थल शामिल हैं - सेंट-सोफिया कैथेड्रल और संबंधित मठवासी इमारतें, कीव में कीव-पेचेर्स्क लावरा; ल'विव में ऐतिहासिक केंद्र का समूह; और ओडेसा का ऐतिहासिक केंद्र। यूनेस्को के संस्कृति के सहायक महानिदेशक अर्नेस्टो ओटोन आर ने इस सवाल के जवाब में कि क्या यूक्रेन में खतरे में पड़े स्थलों पर डब्ल्यूएचसी बैठक के दौरान चर्चा की जाएगी, सकारात्मक जवाब दिया।
बता दें कि 168 राज्य पक्षों द्वारा 1,199 संपत्तियों को विश्व धरोहर सूची में अंकित किया गया है। विश्व धरोहर सम्मेलनों से संबंधित सभी मामलों पर विश्व धरोहर समिति के सत्र के दौरान विचार किया जाता है। वहीं विश्व धरोहर समिति में विश्व धरोहर सम्मेलन के 21 सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। जिन्हें यूनेस्को की महासभा द्वारा चुना जाता है। विश्व धरोहर समिति के वर्तमान सदस्यों में भारत, अर्जेंटीना, बेल्जियम, इटली, यूक्रेन और वियतनाम शामिल हैं।
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सोमवार को विश्व धरोहर संपत्तियों के संरक्षण की स्थिति पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में यूनेस्को विश्व धरोहर के निदेशक लाज़ारे एलौंडौ असोमो ने कहा कि समिति दो विशेष स्थलों की जांच करने जा रही है, उनमें से एक लुम्बिनी है और दूसरा ब्रिटेन में स्टोनहेंज है। सुझाव दिया गया कि ये दोनों स्थल संभावित रूप से खतरे में विश्व धरोहर की सूची में शामिल हो सकते हैं, इसलिए इनकी जांच की जरूरी है। ये दोनों स्थल विश्व धरोहर सूची में हैं, लेकिन खतरे में विश्व धरोहर की सूची में नहीं हैं।
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लुम्बिनी की जांच पर पर उन्होंने बताया कि "जब लुम्बिनी की बात आती है तो लुम्बिनी समिति के लिए और पूरी दुनिया के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थल है। यह एक बहुत ही पवित्र स्थल है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। कई मुद्दे हैं, कुछ विकास के दबाव से संबंधित हैं जो पिछले में देखे गए हैं।" उन्होंने कहा कि "एक साथ आना और नेपाल सरकार के साथ मिलकर काम करना और स्थिति को उलटना और संबोधित करना वास्तव में महत्वपूर्ण है, क्योंकि, नेपाल सरकार को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। इसके लिए एक साथ काम करने की आवश्यकता है। लुम्बिनी को 1997 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में अंकित किया गया था।
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असोमो ने बताया कि स्टोनहेंज में विकास की स्थिति लगातार बनी हुई है। अधिकारी एक ऐसी परियोजना को लागू करना चाहते हैं जो स्टोनहेंज के मूल्यों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए, विचार सबसे अच्छा समाधान खोजने का है, इन दो साइटों पर समिति के सदस्यों के बीच चर्चा करना है। वहीं स्टोनहेंज, एवेबरी और संबंधित स्थलों को 1986 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में अंकित किया गया था। विल्टशायर में स्टोनहेंज और एवेबरी दुनिया में मेगालिथ के सबसे प्रसिद्ध समूहों में से हैं।
हालांकि, यूनेस्को के अधिकारी ने उन सटीक मुद्दों पर विस्तार से नहीं बताया जिनके कारण विश्व धरोहर समिति द्वारा दो साइटों की जांच की आवश्यकता है। यूनेस्को की वेबसाइट के अनुसार, 56 संपत्तियाँ हैं जिन्हें विश्व धरोहर समिति ने विश्व धरोहर सम्मेलन के अनुच्छेद 11 (4) के अनुसार खतरे में विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने का निर्णय लिया है।
इन स्थलों में अफगानिस्तान में बामियान घाटी के सांस्कृतिक परिदृश्य और पुरातात्विक अवशेष, ऑस्ट्रिया में वियना का ऐतिहासिक केंद्र, लीबिया में साइरेन का पुरातात्विक स्थल और यूक्रेन में तीन स्थल शामिल हैं - सेंट-सोफिया कैथेड्रल और संबंधित मठवासी इमारतें, कीव में कीव-पेचेर्स्क लावरा; ल'विव में ऐतिहासिक केंद्र का समूह; और ओडेसा का ऐतिहासिक केंद्र। यूनेस्को के संस्कृति के सहायक महानिदेशक अर्नेस्टो ओटोन आर ने इस सवाल के जवाब में कि क्या यूक्रेन में खतरे में पड़े स्थलों पर डब्ल्यूएचसी बैठक के दौरान चर्चा की जाएगी, सकारात्मक जवाब दिया।
बता दें कि 168 राज्य पक्षों द्वारा 1,199 संपत्तियों को विश्व धरोहर सूची में अंकित किया गया है। विश्व धरोहर सम्मेलनों से संबंधित सभी मामलों पर विश्व धरोहर समिति के सत्र के दौरान विचार किया जाता है। वहीं विश्व धरोहर समिति में विश्व धरोहर सम्मेलन के 21 सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। जिन्हें यूनेस्को की महासभा द्वारा चुना जाता है। विश्व धरोहर समिति के वर्तमान सदस्यों में भारत, अर्जेंटीना, बेल्जियम, इटली, यूक्रेन और वियतनाम शामिल हैं।