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लातूर में सूखे की मार: पशुओं के चारे का भी संकट, बच्चों ने गुल्लक फोड़कर दिए 2 लाख; कैसे जुटाई रकम?

Sun, 04 Oct 2026 06:43 AM IST
निर्मल कांत ब्यूरो, लातूर।
ब्यूरो, लातूर। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 04 Oct 2026 06:43 AM IST
सार

लातूर में सूखे ने किसानों के सामने फसल के साथ पशुओं के चारे का संकट भी खड़ा कर दिया है। ऐसे समय में अहमदपुर के स्कूली बच्चों ने अपनी गुल्लक फोड़कर 2 लाख रुपये जुटाए और मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिए। आखिर बच्चों ने अपनी बचत सूखा पीड़ितों के लिए क्यों दे दी? पढ़िए रिपोर्ट

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maharashtra Latur children break piggy banks donate two lakh for drought victims to cm fadnavis
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चेक सौंपते छात्र - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

सूखे ने लातूर में खेतों की हरियाली ही नहीं छीनी, लोगों के सामने अपने पशुओं को बचाए रखने का सवाल भी खड़ा कर दिया है। ऐसे वक्त में अहमदपुर के स्कूली बच्चों ने शायद इस संकट का दर्द अपनी उम्र से कहीं ज्यादा समझा। डॉ. हरिवंशराय बच्चन विद्यालय के प्राथमिक कक्षा के बच्चों ने गुल्लक फोड़ी, दो लाख रुपये जुटाए और मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिए।
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बच्चों की ओर से मुंबई में चेक के जरिये यह राशि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई। इन बच्चों की कोशिश उम्मीद जगाती है, जहां किसान अपनी ही  फसल को बचाने के बजाय उसे पशुओं के चारे के लिए काटने को मजबूर हैं। काव्हा गांव के किसान नारायण गुडे के पास सात भैंसें, दो गायें और बछड़े हैं। बारिश नहीं हुई तो हरा चारा खत्म हो गया। अब वे पशुओं का पेट भरने के लिए गन्ने की खड़ी फसल काट रहे हैं। 
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अहमदपुर प्राइमरी स्कूल के बच्चों ने सीएम को सौंपा चेक

लोअर तेरणा परियोजना में पानी घटकर सिर्फ 21 फीसदी बचा: लोअर तेरणा परियोजना में पानी घटकर क्षमता का सिर्फ 21 प्रतिशत रह गया है। प्रशासन ने इसे अब केवल पीने के लिए सुरक्षित रखा है और खेती के लिए अवैध पानी उठाने पर निगरानी बढ़ा दी है। ऐसे में प्रशासन ने जलाशय के पानी को अब पूरी तरह पेयजल के लिए सुरक्षित कर दिया है। लातूर के जिलाधिकारी ने स्थिति की समीक्षा की। 
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महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा: महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर के अंत में राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया, जो करीब 74 प्रतिशत है। ये तालुक 32 जिलों में फैले हैं। सरकारी कदम के बाद प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का आकलन और राहत उपाय शुरू किए गए हैं। इनमें फसल ऋण के पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली स्थगित करने, भूमि राजस्व में रियायत और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत जैसे उपाय शामिल हैं।
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