निर्भया के दोषियों के पास अब क्या विकल्प
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दोषियों केपास सुधारात्मक(क्यूरेटिव) याचिका और राष्ट्रपति केपास दया याचिका दायर करने का विकल्प मौजूद हैं। हालांकि इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने तमाम रूल बुक और सुप्रीम कोर्ट केदिशानिर्देशों का पालन करते हुए चारों केखिलाफ डेथ वारंट जारी किया है। दोषियों की पुनर्विचार याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुकी है। इसकेबाद दोषियों को दो बार नोटिस जारी कर यह पूछा जा चुका है कि वह सात दिनों केभीतर मौजूदा कानूनी विकल्प का उपयोग कर सकते हैं। बावजूद इसकेचारों दोषियों ने न तो क्यूरेटिव याचिका दायर की और न ही दया याचिका।
सुप्रीम कोर्ट केवकील दुष्यंत पराशर का कहना है कि दोषी सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव या रिट याचिका दायर कर सकते है। साथ ही राष्ट्रपति केसमक्ष दया याचिका दायर कर सकते हैं। कानून के मुताबिक, दोषियों को इन विकल्पों का इस्तेमाल करने से महरूम नहीं किया जा सकता।
कानून जानकारों का मानना है कि निर्भटया मामले में दोषियों को पूर्व में दो बार क्यूरेटिव व दया याचिकाओं को दायर करने का विकल्प इस्तेमाल करने के लिए कहा गया था लेकिन वे चुपचाप बैठे रहे। और अब ट्रायल कोर्ट ने डेथ वारंट जारी कर दिया है। अगर राष्टैपति के समक्ष दया याचिका दायर की जाती है तो उसकेनिपटारे तक उनका डेथ वारंट रूक सकता है। वास्तव में दया याचिका दायर करने केलिए न तो कोई समय सीमा है और न ही राष्ट्रपति के लिए इसकेनिपटारे की कोई सीमा ही है। अगर दोषियों ने इन विकल्पों का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो 22 जनवरी को उन्हें फांसी दे दी जाएगी।