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BJP: शिवराज-नरोत्तम से लेकर वसुंधरा तक, भाजपा के दिग्गजों के भविष्य का क्या, अब ये नेता किस पद के दावेदार?

Thu, 14 Dec 2023 08:02 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 14 Dec 2023 08:02 PM IST
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सार
BJP: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मुख्यमंत्री के चेहरों ने सभी को चौंकाया। मध्य प्रदेश में भाजपा ने चार बार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को हटाकर मोहन यादव को कमान दी है। वहीं, राजस्थान में दो बार की सीएम वसुंधरा राजे की बजाय भजन लाल शर्मा को जिम्मेदारी दी गई। 
 
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What next for BJP stalwarts like Shivraj singh chouhan Vasundhara raje
BJP - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हाल ही में संपन्न पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में जीत मिली। जहां मध्य प्रदेश में भाजपा ने सत्ता को बरकरार रखते हुए अपनी स्थिति को और मजबूत किया तो राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस से सरकारें छीन ली। 3 दिसंबर को नतीजे सामने आने के बाद हफ्तेभर से ज्यादा समय तक भाजपा ने मुख्यमंत्रियों ने नाम पर सस्पेंस बनाए रखा। हालांकि, 12 दिसंबर आते-आते भाजपा ने तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के चेहरे घोषित किए जिसने सभी को चौंकाया।



मध्य प्रदेश में भाजपा ने चार बार के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान को हटाकर उनके ही कैबिनेट में शिक्षा मंत्री रहे डॉ. मोहन यादव को कमान दे दी। दूसरी ओर राजस्थान में तीन बार के प्रदेश महामंत्री रहे भजन लाल शर्मा के सिर ताज सजा दिया। इस बीच सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं की होने लगी है जिन्हें भाजपा ने इस बार मौका नहीं दिया। इसके साथ ही चर्चा उन दिग्गज चेहरों की भी है जो अपना चुनाव हार गए हैं। 


आइए जानते हैं कि ये दस बड़े चेहरे कौन हैं? शिवराज सिंह, वसुंधरा, समेत भाजपा के तमाम बड़े चेहरों का भविष्य क्या है? 

शिवराज सिंह चौहान
शिवराज सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला

शिवराज सिंह
बतौर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चार बार यह बड़ी जिम्मेदारी संभाली। 29 नवंबर 2005 से शुरू हुआ सफर 12 दिसंबर 2018 तक अनवरत जारी रहा। 2018 के विधानसभा में कम अंतर वाली हार ने उन्हें 15 महीने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बना दिया। हालांकि, सिंधिया गुट की बगावत के कारण 23 मार्च 2020 को शिवराज को एक बार फिर प्रदेश की कमान मिली, जो 11 दिसंबर 2023 तक जारी रही। इस बार राज्य में भाजपा को प्रचंड बहुमत दिलाने में अहम भूमिका दिलाने वाले शिवराज मुख्यमंत्री नहीं बनाए गए।

इसके बाद सियासी गलियारों में 64 वर्षीय शिवराज के भविष्य को लेकर कई तरह के सवाल चलने लगे हैं। इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक निजी चैनल के कार्यक्रम में कहा, 'उन्हें (शिवराज सिंह चौहान समेत पार्टी नेताओं को नई जिम्मेदारी दी जाएगी। वे हमारे बड़े नेता हैं। उन्हें उनके कद के मुताबिक जिम्मेदारी दी जाएगी।'

सियासी विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा अब उन्हें केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। या तो केंद्रीय मंत्रीमंडल में उन्हें जगह मिल सकती है या फिर संगठन में कोई बड़ा पद दिया जा सकता है। इससे पहले 2018 में विधानसभा चुनाव की हार के बाद उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद मिला था।

भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा
भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा - फोटो : अमर उजाला

नरोत्तम मिश्रा
मध्य प्रदेश के चुनावी समर में जहां कइयों ने जीत का स्वाद चखा तो कई ऐसे भी रहे जिन्हें प्रचंड लहर में भी हार का कड़वा घूंट पीना पड़ा। शिवराज सरकार में गृह मंत्री की जिम्मेदारी निभाने वाले नरोत्तम मिश्रा अपनी परंपरागत सीट दतिया से चुनाव हार गए। 

हार के बाद पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का शायराना अंदाज में पहला बयान सामने आया। उन्होंने कवि शिवमंगल सिंह 'सुमन' की रचना की पंक्तियों को याद किया। मिश्रा ने कहा, 'क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं। कर्म पथ पर जो भी मिला, यह भी सही वह भी सही।' इसके बाद पढ़ा, समुद्र का पानी उतरता देखकर किनारे पर घर मत बना लेना। मैं लौटकर आऊंगा ये वादा है। मैं ज्यादा देर तक शांत रहने वाला जीव नहीं हूं। लेकिन उनको अवसर जरूर देना चाहिए। मैं लौटकर आऊंगा ये वादा है।'

ऐसे में कयास लगा जा रहे हैं कि नरोत्तम मिश्रा पांच साल अपनी सीट पर फोकस करेंगे और अगले चुनाव में वापसी की कोशिश करेंगे। पार्टी 63 वर्षीय नेता को संगठन में भी जिम्मेदारी दे सकती है। मिश्रा मध्य प्रदेश की अलग-लग सरकारों में चार बार अलग-अलग अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 

कैलाश विजयवर्गीय
कैलाश विजयवर्गीय - फोटो : अमर उजाला, इंदौर

कैलाश विजयवर्गीय
संगठन में लंबे समय से काम कर रहे कैलाश विजयवर्गीय को भाजपा ने इस बार विधानसभा चुनाव लड़ाया। कैलाश ने इंदौर-1 सीट से चुनाव लड़ा और बड़ी जीत हासिल की। कुछ वक्त तक वह भी मुख्यमंत्री पद की रेस में गिने गए। अब जब कैलाश मुख्यमंत्री तो नहीं बन पाए, तो वे प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण पद के लिए भी प्रयास कर सकते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा 67 वर्षीय नेता को प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी दे सकती है।

2015 से कैलाश विजयवर्गीय भारतीय जनता पार्टी के महासचिव के पद पर हैं। इसके पहले उन्हें पश्चिम बंगाल के राज्य प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया था, जिनके कार्यकाल में भाजपा ने तुलनात्मक रूप से 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था।

प्रहलाद पटेल
प्रहलाद पटेल - फोटो : अमर उजाला

प्रहलाद पटेल
शिवराज सिंह के मुख्यमंत्री न बनने की स्थिति में 63 साल के प्रहलाद पटेल को भी एक बड़ा दावेदार माना जा रहा था। इन अटकलों को तब और हवा मिली जब उन्हें लोकसभा सांसदी को छोड़कर विधानसभा चुनाव लड़ाया गया और जीतने के बाद सांसदी से इस्तीफा ले लिया गया। पहले अटल सरकार और बाद में मोदी सरकार में कुल तीन बार केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी निभाने वाले पटेल अब विधायक हैं। इस वक्त पर प्रहलाद के सियासी भविष्य की ओर देखें तो, उन्हें पार्टी नई जिम्मेदारी दे सकती है। जानकारों की मानें तो उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में महत्वपूर्ण पद मिल सकता है।

वसुंधरा राजे
वसुंधरा राजे - फोटो : साेशल मीडिया

वसुंधरा राजे
राजस्थान में मुख्यमंत्री पद की दौड़ के लिए नौ दिन तक सियासी अटकलों का दौर रहा। नतीजों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या वसुंधरा राजे तीसरी बार राजस्थान की मुख्यमंत्री बनेगीं या नहीं? हालांकि, 12 दिसंबर को मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और दो उपमुख्यमंत्रियों दिया कुमारी और प्रेम चंद बैरवा के नामों की घोषणा के साथ ही सारे कयास खत्म हो गए। इसके बाद सवाल उठने लगे कि अब वसुंधरा के भविष्य का क्या होगा?

सियासी गलियारों में यह भी चर्चा रही कि विधायकों के साथ बाड़ेबंदी कहीं उनके अच्छे भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव न डाल दे। इस बीच, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि उन्हें (वसुंधरा) उनके कद के मुताबिक जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसमें कयास लगा जा रहे हैं कि केंद्र में मंत्री या संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इससे पहले भी 2018 में विधानसभा चुनाव की हार के बाद शिवराज सिंह और रमन सिंह के साथ पार्टी के राष्टीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी।

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