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कोविड-19 बीमारी में 'शैतान' वाले दूध से बचकर रहें, इस गाय का दूध पीते हैं तो मिलेगा बहुत फायदा

Tue, 01 Dec 2020 07:10 PM IST
गौरव पाण्डेय जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 01 Dec 2020 07:10 PM IST
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what milk you are drinking in Covid19 pandemic is important, here is all you need to know
दूध - फोटो : पिक्साबे

कोविड-19 बीमारी में हर व्यक्ति खुद को स्वस्थ रखना चाहता है। इसके लिए वह अपने खान-पान पर बहुत ध्यान देता है। इसमें दूध भी एक अहम तत्व है। यह कई तरह का होता है। भैंस, गाय और बकरी का दूध तो आसानी से उपलब्ध हो जाता है। इनके विकल्प के तौर पर बादाम दूध, सोया दूध, चावल दूध और नारियल दूध रहता है। एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. संदीप मिश्रा बताते हैं कि ऐसी स्थिति में देशी गाय का दूध सबसे बेहतर होता है। अगर ये मिल जाता है तो वह बहुत फायदेमंद रहता है। 

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ए-2 मिल्क यानी देशी गाय के दूध में 'बीटा कैसिइन प्रोटीन' नहीं होता। अमेरिकन गाय, जिसके दूध को ए-1 की संज्ञा दी गई है, वह कोविड बीमारी में शैतान जैसा काम करता है। मतलब, ये दूध शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसमें वो पदार्थ मौजूद रहता है जो बीएसएम-7 को पैदा करता है। लिहाजा ये बहुत उच्चता वाला एक्टिव कंपाउंड होता है और इससे शरीर में एलर्जी हो जाती है। साथ ही ये पदार्थ रोग प्रतिरोधक शक्ति को अशांत यानी डिस्टर्ब कर देता है, जो कोविड जैसी बीमारी में खतरनाक साबित हो सकता है। 

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रोग प्रतिरोधक क्षमता का संतुलन में रहना बहुत जरूरी

डॉ. मिश्रा के अनुसार, कोविड-19 में रोग प्रतिरोधक क्षमता का संतुलन में रहना बहुत जरूरी है। अगर किसी मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है तो वह ज्यादा खतरनाक है। यही क्षमता अगर ज्यादा हो रही है तो वह भी मरीज के लिए ठीक नहीं है। इसका संतुलन में होना बहुत आवश्यक है। कोविड-19 में मौत की वजह इस क्षमता का बहुत अधिक बढ़ना भी रहा है। इससे साइटोकिन स्टार्म की स्थिति पैदा होती है जो मरीज को मौत की तरफ ले जाती है। 

ए-1 गाय, जिसे विदेशी या अमेरिकन का नाम दिया जाता है, उसके दूध में बीटा-कैसिइन प्रोटीन होता है। इसी से बीसीएम-7 उत्पन्न होता है। यह पदार्थ शरीर में सूजन, एलर्जी और पेट की पथरी जैसी बीमारियों को जन्म देता है। यही वजह है कि ए-1 दूध कोविड में नुकसानदायक हो सकता है। दूसरी तरफ देशी गाय का ए-2 दूध जो इन सब दिक्क्तों से परे होता है, वह कोविड के दौरान बेहतर रहता है। हालांकि अभी इन बातों को बड़े स्तर पर साबित करने की जरूरत है।

ए-1 दूध में शैतान मौजूद है, बच कर रहें

दूध में लगभग 87 फीसदी पानी और 13 फीसदी  वसा, लैक्टोज, खनिज व प्रोटीन होता है। गाय के दूध में प्रोटीन का 95 फीसदी से अधिक केसिन और मट्ठा, प्रोटीन द्वारा गठित किया जाता है। इसमें बीटा-कैसिइन 2 सबसे आम प्रोटीन (लगभग 30-35 फीसदी) है। बीटा-कैसिइन, 12 प्रकार के होते है, लेकिन ए-1 और ए-2 सबसे आम हैं। उत्तर अमेरिकी/यूरोपीय मूल के जानवरों (होलस्टीन, फ्रेजियन, आयरशायर, और ब्रिटिश शोरथॉर्न) में ए-1 और ओरिएंट (एशियाई, जर्सी, ग्वेर्नसे और अफ्रीकी गायों) के जानवरों में ए-2 होता है। भेड़, बकरी, याक, भैंस, ऊंट, गधे और एशियाई गायों में स्वाभाविक रूप से अधिक ए 2 (बीटा कैसिइन) प्रोटीन होता है। भारतीय देशी गाय और भैंस में केवल ए 2 प्रोटीन होता है। 

पाचन एंजाइमों द्वारा ए-1 बीटा-कैसिइन प्रोटीन का पाचन पेप्टाइड बीटा-केसोमोर्फिन-7 (BCM-7) का उत्पादन कर सकता है, जो पेट खराब कर सकता है। इसके अलावा, यह अन्य मानव प्रणालियों के साथ हस्तक्षेप करता है। इससे तंत्रिका, अंतःस्रावी और प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचता है। बीसीएम-7 एक ऑक्सीडेंट है जो धमनी पट्टिका के निर्माण में अहम योगदान देता है। ये एक ओपिओइड भी है और यह निद्रा को प्रेरित कर सकता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार बीसीएम-7 टाइप-1 मधुमेह, शिशु मृत्यु, आत्मकेंद्रित और गैस्ट्रो-आंत्र सूजन से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, सबसे अधिक चिंता एथेरोस्क्लेरोसिस और बाद में कोरोनरी धमनी रोग को लेकर भी होती है। यह एक त्वरित जोखिम हो सकता है। 

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भारत में पाए जाने वाले ए-2 दूध की खासियत

डॉ. मिश्रा के अनुसार, भारतीय मवेशी और भैंस की नस्ल में ए-2 सबसे अधिक है। इसकी मात्रा (99-100 फीसदी) रहती है। ए-1 में ये फायदे लगभग अनुपस्थित रहते हैं। इसी वजह से भारत में, अधिकांश देशी गायों में ए-2 दूध का ही उत्पादन होता है। 15 जेबू मवेशी की नस्लें (कांगयम, निमारी, लाल कंधारी, मलनाड गिद्दा, खेरीगढ़, मालवी, अमृत महल, कंकरेज, गिर, साहीवाल, हरियाण, थारपारकर, राठी, मेवाती और लाल सिंधी) और आठ भैंस नस्लें (मुर्राह, मेहसाणा, मराठाना, मराठ, दक्षिण कनारा, मणिपुर, असमिया दलदल, निली रवि और पंढरपुरी) इस तरह का दूध उत्पादित करती हैं। भारतीय बाजार में उपलब्ध ब्रांडेड दूध का कितना हिस्सा विदेशी गायों से है, यह पता नहीं है। हालांकि, भैंस का दूध या बकरी का दूध अभी भी पूर्ण ए-2 है। ए-1 दूध के नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों को दर्शाने वाली कई रिपोर्ट हैं। हमें देसी गायों और भैंसों के दूध का अधिक उपयोग करना चाहिए।

पेड़ों से निकलने वाला दूध

  • बादाम का दूध: बादाम के दूध में कैसिइन और लैक्टोज दोनों की कमी होती है और इसलिए उन लोगों के लिए आदर्श है जिन्हें गाय के दूध से एलर्जी है। दुर्भाग्य से बादाम के दूध में चीनी की मात्रा अधिक होती है और इसमें उच्च (अच्छी एमिनो एसिड प्रोफाइल वाला) प्रोटीन कम होता है। 
  • सोया दूध: सोया दूध में एक पूर्ण अमीनो एसिड प्रोफाइल है, लेकिन यह पूरी तरह से गैर-एलर्जिक नहीं है। लगभग 1/4 एलर्जी इसमें भी पाई जाती है। इसके अलावा, इसमें फाइटो-एस्ट्रोजेन भी शामिल हैं, जो प्राकृतिक एस्ट्रोजन के प्रभाव की नकल करते हैं। ये हार्मोनल व्यवधान पैदा कर सकते हैं।  
  • नारियल का दूध: दूध के विकल्प के रूप में नारियल के दूध का सेवन बहुत कम किया जाता है। नारियल एलर्जी दुर्लभ हैं। हालांकि, इस दूध में प्रोटीन कम है लेकिन वसा बहुत अधिक है। इसके अलावा, प्रोटीन सामग्री निम्न कोटि की है। 
  • चावल का दूध: एलर्जी के मामले में चावल का दूध एक और विकल्प है, लेकिन इसका एक प्रतिकूल पोषण प्रोफाइल है। यदि विशेष रूप से (एकमात्र) इसका उपयोग किया जाता है तो दूध पीने वाले को कुपोषण हो सकता है। 
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