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Rahul Gandhi: भारत जोड़ो यात्रा ने कितना छोड़ा असर? भाजपा ने राहुल गांधी को बताया 'भ्रमित'

Tue, 31 Jan 2023 05:29 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 31 Jan 2023 05:29 PM IST
सार

Rahul Gandhi: भारत जोड़ो यात्रा के लिए मीडिया मैनेजमेंट का काम संभाल रही ऋतु चौधरी ने आरोप लगाया कि देश के मीडिया संस्थानों पर दबाव डालकर उन्हें कांग्रेस के मुद्दों को उठाने नहीं दिया जा रहा है। इसके कारण वे मुद्दे भी नहीं उठाए जा रहे हैं, जिनसे जनता परेशान है और जिन्हें उठाया जाना देश और इस देश की जनता के लिए जरूरी हैं...

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what is the impact of Bharat Jodo Yatra? BJP told Rahul Gandhi confused
Rahul Gandhi: भारत जोड़ो यात्रा समापन समारोह - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) समाप्त हो चुकी है। कांग्रेस का दावा है कि सात सितंबर से 30 जनवरी के बीच 135 दिनों में राहुल ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक प्यार का संदेश दिया। वे एक बड़े, लोकप्रिय और विश्वसनीय नेता बनकर उभरे हैं। इस यात्रा ने उन सभी मुद्दों पर देश का ध्यान खींचा, जो जनता के हितों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी हैं। इसमें महंगाई-बेरोजगारी जैसे मुद्दे शामिल थे तो देश की संवैधानिक संस्थाओं को बचाने का मुद्दा भी शामिल था।

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कांग्रेस नेता ऋतु चौधरी राहुल गांधी की इस यात्रा में शुरू से उनके साथ रहीं। उन्होंने अमर उजाला से कहा कि यह यात्रा राजनीतिक उद्देश्यों को लेकर नहीं थी। इसके जरिए राहुल गांधी उन मुद्दों को उठाना चाहते थे, जिनके कारण आज देश के एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की साजिश रची जा रही है। यही कारण है कि उन्होंने अपनी यात्रा में समाज के हर वर्गों-समुदायों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस देश की बहुलतावादी पहचान को नष्ट कर केवल हिंदुत्ववादी सोच को बढ़ावा देना चाहता है। यही कारण है कि राहुल गांधी ने बार-बार आरएसएस के इस 'खेल' को 'उजागर' करने की कोशिश की।

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'राहुल को दिखाने पर मजबूर हुआ मीडिया'

भारत जोड़ो यात्रा के लिए मीडिया मैनेजमेंट का काम संभाल रही ऋतु चौधरी ने आरोप लगाया कि देश के मीडिया संस्थानों पर दबाव डालकर उन्हें कांग्रेस के मुद्दों को उठाने नहीं दिया जा रहा है। इसके कारण वे मुद्दे भी नहीं उठाए जा रहे हैं, जिनसे जनता परेशान है और जिन्हें उठाया जाना देश और इस देश की जनता के लिए जरूरी हैं। इसमें महंगाई-बेरोजगारी के साथ-साथ वे सामाजिक मुद्दे भी शामिल हैं, जिनके कारण आज देश उद्वेलित हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस यात्रा का ही परिणाम रहा कि मीडिया कांग्रेस और राहुल गांधी को दिखाने पर मजबूर हुआ और जनता के विषय चर्चा के केंद्र में आ सके।   

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बड़े नेता बनकर उभरे राहुल गांधी

कांग्रेस नेता ने कहा कि राहुल गांधी ने जब से राजनीति शुरू की है, वे देश की जनता को समझने की कोशिश करते रहे हैं। वे भट्टा पारसौल पहुंचकर किसानों की बात समझने की कोशिश करते हैं, तो मंदिर-मस्जिद-चर्च पहुंचकर धार्मिक विषयों को भी जानने की कोशिश करते हैं। यात्रा में दिखाई पड़ा कि उनके साथ बच्चे-महिलाएं साथ आकर अपनी बात साझा कर रहे हैं। यह बताता है कि राहुल गांधी लोगों के बीच स्वीकार्य हो रहे हैं।


भ्रमित रहे राहुल और कांग्रेस

हालांकि, भाजपा ने राहुल गांधी की इस यात्रा को भ्रमित उद्देश्यों के साथ की गई 'राजनीतिक उद्देश्यों वाली यात्रा' करार दिया है। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी अपने उद्देश्यों को लेकर भ्रमित रहे। वे शुरू से यह कहते रहे कि वे नफरत के खिलाफ यात्रा निकाल रहे हैं, लेकिन अपनी इसी यात्रा में वे बार-बार कहते रहे कि अपनी इस लंबी यात्रा में उन्होंने देश में कहीं नफरत नहीं देखी। भाजपा नेता ने प्रश्न किया कि यदि राहुल गांधी को देश में कहीं नफरत नहीं दिखाई पड़ी, तो आखिर वे किसके विरूद्ध यह यात्रा निकाल रहे थे।

विपक्ष को साथ लाने में असफल

भाजपा सांसद ने कहा कि यह राजनीतिक उद्देश्यों को लेकर की गई यात्रा थी। इसका उद्देश्य 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी को विपक्ष के एक बड़े नेता के तौर पर उभारना था। कांग्रेस इस यात्रा के जरिए विपक्षी एकता की तस्वीर खींचना चाहती थी। इसके लिए यात्रा के समापन समारोह में 23 पार्टियों को निमंत्रण भी दिया गया। लेकिन पीडीपी-नेशनल कांफ्रेंस और कुछ वामदलों को छोड़कर ज्यादातर दलों ने इससे दूरी बनाए रखी। इसमें तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राजद भी शामिल थीं, जिनके बाहर रहते विपक्षी एकता की तस्वीर नहीं खींची जा सकती। भाजपा ने दावा किया कि कांग्रेस विपक्ष को साथ लाने में असफल रही है।

मोदी के कारण कर सके कश्मीर की यात्रा

भाजपा ने कहा कि राहुल गांधी आज कश्मीर में अपनी यात्रा सफलतापूर्वक निकाल पाए तो यह केवल उनके नेताओं के बलिदान के कारण संभव हुआ है। भाजपा के संस्थापक अध्यक्ष श्यामाप्रसाद मुखर्जी कश्मीर की यात्रा करने के प्रयास में ही अपनी जान गंवाई थी। 1992 में उनके नेता मुरली मनोहर जोशी को कश्मीर के लाल चौक तक आने की अनुमति नहीं मिली। लेकिन आज राहुल गांधी ने बेहद आसानी और सुरक्षा के साथ अपनी यात्रा पूरी की। भाजपा का दावा है कि यह इसलिए हो पाया क्योंकि नरेंद्र मोदी सरकार ने कश्मीर का माहौल बेहतर कर दिया है।

अपने नेताओं को भी जोड़ने में नाकाम रहे राहुल

भाजपा का दावा है कि राहुल गांधी अपनी यात्रा के दौरान देश को जोड़ने की बात करते रहे, लेकिन वे अपनी ही पार्टी के नेताओं को साथ लाने में नाकाम रहे। इस यात्रा की शुरुआत से लेकर अंत तक अनेक नेताओं ने पार्टी छोड़ दिया।

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