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26/11 Attack: नाव से मुंबई आए आतंकी, शहर पहुंचते ही बिछाने लगे लाशें; पढ़ें मुंबई हमले की न भूलने वाली दास्तां

Sun, 26 Nov 2023 01:56 AM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sun, 26 Nov 2023 01:56 AM IST
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सार
26/11 Terror Attack: आतंकियों ने मुंबई पहुंचने के लिए नावों का भी इस्तेमाल किया था। आतंकियों ने मुंबई आने के लिए जिस नाव का इस्तेमाल किया था, उसे लश्कर के आतंकियों ने कराची की एक दुकान से खरीदा गया था।
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What happened on 26 11 mumbai terrorrist Attack and how many peeople died
26/11 आतंकी हमला - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

आज देश 26/11 आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों और मारे गए लोगों को याद कर रहा है। आज से ठीक 15 साल पहले हुआ मुंबई हमला भारतीय इतिहास का वो काला दिन है जिसे कोई चाह कर भी नहीं भुला सकता। आतंकियों के हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 300 ज्यादा घायल हुए थे।   

26/11 mumbai attack
26/11 mumbai attack - फोटो : PTI

आइये टाइमलाइन में जानते हैं की पूरी कहानी...

शर्द रात का सन्नाटा चीख पुकार में बदल गया
तारीख थी 26 नवंबर 2008 और वक्त था शाम का... मायानगरी मुंबई में हर दिन की तरह चहलकदमी थी। शहर के हालात पूरे तरह सामान्य थे। मुंबईकर बाजारों में खरीदारी कर रहे थे। वहीं, कुछ लोग मरीन ड्राइव पर रोज की तरह समुद्र से आ रही ठंडी हवा का लुत्फ ले रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे शहर रात के अंधेरे की तरफ बढ़ना शुरू हुआ, वैसे-वैसे इसकी सड़कों पर चीख-पुकार तेज होती चली गई। 

मुंबई हमला
मुंबई हमला - फोटो : pti

नाव से मुंबई आए थे आतंकी
इस हमले की शुरुआत कुछ इस तरह हुए हमले से तीन दिन पहले यानी 23 नवंबर को कराची से नाव के रास्ते ये आतंकी मुंबई में घुसे। ये भारतीय नाव से मुंबई पहुंचे थे। आतंकी जिस भारतीय नाव पर सवार थे, उस पर उन्होंने कब्जा किया था और उस पर सवार चार भारतीयों को मौत के घाट उतार दिया था। रात के तकरीबन आठ बजे ये हमलावर कोलाबा के पास कफ परेड के मछली बाजार पर उतरे। वहां से वे चार समूहों में बंट गए और टैक्सी लेकर अपनी मंजिलों का रुख किया।

मुंबई हमला
मुंबई हमला - फोटो : SOCIAL MEDIA

पहला निशान छत्रपति शिवाजी टर्मिनस बना
पुलिस को रात के साढ़े नौ बजे छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर गोलीबारी की खबर मिली। बताया गया कि यहां रेलवे स्टेशन के मुख्य हॉल में दो हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की है। इन हमलावरों में एक हमलावर अजमल कसाब था, जिसे अब फांसी दी जा चुकी है। दोनों हमलावरों ने एके 47 राइफलों से 15 मिनट तक गोलीबारी कर 52 लोगों को मौत के घाट उतार दिया और 100 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया था। 

mumbai-attack
mumbai-attack - फोटो : SOCIAL MEDIA

शहर की प्रमुख जगहों पर गोलीबारी 
आंतकियों की यह गोलीबारी सिर्फ शिवाजी टर्मिनल तक सीमित नहीं थी। दक्षिणी मुंबई का लियोपोल्ड कैफे भी उन चंद जगहों में से एक था जो इस आतंकी हमले का निशाना बना। यह मुंबई के नामचीन रेस्त्रांओं में से एक है। लियोपोल्ड कैफे में हुई गोलीबारी में 10 लोग मारे गए जिसमें कई विदेशी भी शामिल थे और बहुत से घायल भी हुए। 1871 से मेहमानों की खातिरदारी कर रहे लियोपोल्ड कैफे की दीवारों में धंसी गोलियां हमले के निशान छोड़ गईं।

रात साढे़ 10 बजे खबर आई कि विले पारले इलाके में एक टैक्सी को बम से उड़ा दिया गया है, जिसमें ड्राइवर और एक यात्री मारा गया है। इससे 15-20 मिनट पहले बोरीबंदर से भी इसी तरह के धमाके की खबर आई, जिसमें एक टैक्सी ड्राइवर और दो यात्रियों की जानें जा चुकी थीं। इन हमलों में तकरीबन 15 घायल भी हुए।

mumbai taj hotel
mumbai taj hotel

तीन बड़े होटलों में सैकड़ों लोगों को बना लिया बंधक 
आतंक की यह कहानी यहीं नहीं खत्म हुई। 26/11 के तीन बड़े मोर्चों में मुंबई का ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस शामिल था। जब हमला हुआ तो ताज में 450 और ओबेरॉय में 380 मेहमान मौजूद थे। खासतौर से ताज होटल की इमारत से निकलता धुंआ तो बाद में हमलों की पहचान बन गया।

हमले की अगली सुबह यानी 27 नवंबर को खबर मिली कि ताज होटल के सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया है, लेकिन बाद में खबर मिली कि हमलावरों ने अभी कुछ बंधकों को कब्जे में रखा हुआ हैं जिनमें कई विदेशी भी शामिल हैं। हमलों के दौरान दोनों ही होटल रैपिड एक्शन फोर्ड (आरपीएफ), मैरीन कमांडो और नेशनल सिक्युरिटी गार्ड (एनएसजी) कमांडो से घिरे रहे। दावा किया गया कि लाइव कवरेज से आतंकवादियों को खासी मदद मिली क्योंकि उन्हें सुरक्षा बलों की हर गतिविधि के बारे में टीवी पर जानकारी हो रही थी।

मुंबई हमले के 15 साल पूरे
मुंबई हमले के 15 साल पूरे - फोटो : ANI

तीन दिनों तक गूंजी गोलियों की आवाज 
सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच तीन दिनों तक मुठभेड़ चलती रही। इस दौरान, मुंबई में कई धमाके हुए, आग लगी, गोलियां चलीं और बंधकों को लेकर उम्मीद टूटती जुड़ती रहीं और न सिर्फ भारत से करोड़ों लोगों की बल्कि दुनिया भर की नजरें ताज, ओबेरॉय और नरीमन हाउस पर टिकी रहीं।

हमले में 160 से ज्यादा लोगों की जानें गईं
29 नवंबर की सुबह तक नौ हमलावरों का सफाया हो चुका था और अजमल कसाब के तौर पर एक हमलावर पुलिस की गिरफ्त में था। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ चुकी थी लेकिन लगभग 160 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी थी।

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