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जानकारी और जागरूकता: किसी बीमारी के महामारी घोषित होने का क्या मतलब होता है? इलाज में क्या आता है बदलाव?

Fri, 28 May 2021 06:16 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 28 May 2021 06:16 PM IST
सार

दिल्ली सरकार ने 27 मई 2021 को एक आदेश के जरिये म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) या ब्लैक फंगस (Black Fungus) को महामारी घोषित कर दिया। इसके पहले कोरोना को भी केंद्र सरकार द्वारा महामारी घोषित किया जा चुका है। पूर्व में चेचक, प्लेग जैसी बीमारियों को महामारी घोषित किया जा चुका है...

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What does it mean for a disease to be declared a pandemic, does it change the pattern of treatment, know about the epidemic diseases act 1897
ब्लैक फंगस की एक्सरे जांच करते डॉक्टर - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली सहित देश के 11 राज्यों ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। सामान्य सवाल है कि किसी बीमारी को कब महामारी घोषित किया जाता है, इसे महामारी कौन घोषित कर सकता है, किसी बीमारी को महामारी घोषित होने के बाद इसके इलाज को लेकर क्या बदलाव आते हैं और सामान्य लोगों पर इसका क्या असर पड़ता है। तो जानते हैं इन अहम सवालों के जवाब।

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जब कोई बीमारी बहुत तेजी से संक्रामक तौर पर बढ़ने लगती है, और इसके कारण भारी संख्या में लोगों के चपेट में आने और लोगों की जान जाने की घटनाएं बढ़ने लगती हैं तब केंद्र सरकार या राज्य सरकार महामारी कानून, 1897 (The Epidemic Diseases Act, 1897) के अंतर्गत इसे ‘महामारी’ घोषित कर देती है। ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे इस बीमारी के इलाज में एकरूपता लाई जा सके, उसके बारे में सभी सूचनाएं एक जगह जमा कर उसका सही विश्लेषण कर उससे निबटने के लिए उचित रणनीति अपनाई जा सके, और इस बीमारी के इलाज के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का उचित उपयोग कर ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचायी जा सके।

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क्या है पैंडेमिक यानी वैश्विक महामारी

  • वैश्विक स्तर पर किसी क्षेत्र विशेष में फैली महामारी को एपिडेमिक (Epidemic) और विश्व के कई हिस्सों में फैली किसी बीमारी को पैन्डेमिक (Pandemic) घोषत कर दिया जाता है। वैश्विक स्तर पर यह काम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) करता है।
  • महामारी घोषित होने के बाद सभी सरकारी प्राइवेट अस्पतालों को केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग, ICMR और राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग या इसके द्वारा गठित किसी विशेष अधिकार प्राप्त कमेटी के सभी निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है।
  • किसी बीमारी के महामारी घोषित होने के बाद सभी जिलों में चीफ डिस्ट्रिक्ट मेडिकल ऑफिसर (CDMO) के अंदर एक कमेटी का गठन किया जाता है। इस कमेटी में जिले के शीर्ष अधिकारियों के साथ बीमारी की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों को शामिल किया जाता है। इस कमेटी पर जिले में महामारी कानून को लागू कराने की जिम्मेदारी जिले के जिलाधिकारी और एसपी के माध्यम से होती है।
  • यह कमेटी प्रतिदिन एक या दो बार बैठक कर जिले में संक्रमण की स्थिति का जायजा लेती है। जिले के सभी प्राइवेट/सरकारी अस्पतालों को अपने शीर्ष अधिकारियों के माध्यम से उस बीमारी की चपेट में आये सभी बीमार या मरे लोगों की संख्या, और अगर कोई अन्य विशेष जानकारी हो तो उसे, कमेटी को साझा करनी होती है। यह रिपोर्ट प्रतिदिन राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय, और उसके माध्यम से केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जाती है।

क्या हो सकता है कानून का उल्लंघन करने पर

किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा महामारी कानून का उल्लंघन किये जाने पर जिलाधिकारी लिखित नोटिस जारी कर उस व्यक्ति या संस्था से सवाल कर सकता है। निश्चित समय सीमा में जवाब न मिलने पर, या संस्था के जवाब से कमेटी के संतुष्ट न होने पर ऐसे व्यक्तियों/संस्थाओं को भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के सेक्शन 188 के अंतर्गत दंडित भी किया जा सकता है।

दिल्ली सरकार ने 27 मई 2021 को एक आदेश के जरिये म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) या ब्लैक फंगस (Black Fungus) को महामारी घोषित कर दिया। इसके पहले कोरोना को भी केंद्र सरकार द्वारा महामारी घोषित किया जा चुका है। पूर्व में चेचक, प्लेग जैसी बीमारियों को महामारी घोषित किया जा चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर किसी बीमारी के महामारी घोषित होने के बाद केंद्र सरकार को विशेष अधिकार प्राप्त हो जाते हैं। वह इन बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए अपने विवेक से कुछ कुछ ऐसे विशेष कदम भी उठा सकती है जिसे सामान्य स्थिति में वह नहीं उठा सकती है। आवागमन पर प्रतिबंध लगाना, किसी बाज़ार, फैक्ट्री के खोलने पर प्रतिबंध लगाना ऐसे ही कदम हैं। वह किसी क्षेत्र में कुछ समय के लिए चुनाव रद्द कराने संबंधी निर्णय भी ले सकती है। प्राइवेट सेवाओं में भी आवश्यक वस्तुओं, दवाइयों का अधिकतम मूल्य निर्धारित किया जा सकता है।

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क्या कहते हैं स्वास्थ्य अधिकारी

दिल्ली स्वास्थ्य निदेशालय के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार सामान्य तौर पर किसी भी व्यक्ति का इलाज करते समय डॉक्टर अपने स्तर पर निर्णय करता है। लेकिन किसी बीमारी के महामारी घोषित होने के बाद उस बीमारी के इलाज में वह केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी दवाइयों, तरीकों का ही इस्तेमाल करता है। किसी बीमारी के महामारी घोषित होने के बाद ज्यादातर मामलों में राज्य सरकारें इलाज मुफ्त कर देती हैं। इससे जनता पर इलाज का खर्च नहीं आता। सरकार इसे रोकने के लिए विशेष अभियान चलाती है जिससे अन्य लोगों को इस संक्रामक बीमारी की चपेट में आने से बचाया जा सके। सरकारें जनता के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी करती हैं।

ब्लैक फंगस महामारी के लिए बनी कमेटी

दिल्ली सरकार ने लोकनायक अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर पीके राठौर के नेतृत्व में नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जो राजधानी में ब्लैक फंगस के मामलों पर सभी विशेष निर्णय ले रही है। इसके आलावा जीटीबी और राजीव गांधी अस्पताल में ब्लैक फंगस के रोगियों का इलाज हो रहा है। प्राइवेट अस्पतालों में भी ब्लैक फंगस के मामले देखे जा रहे हैं।   

एम्फोटेरिसिन-बी के सही उपयोग और उचित वितरण के लिए सरकार ने डॉक्टर एमके डागा ने नेतृत्व में एक कमेटी बना रखी है। यह कमेटी एम्फोटेरीसिन-बी की मांग पर यह इंजेक्शन अस्पतालों को पहुंचाने के लिए निर्देश देती है। यह इंजेक्शन इस समय खुले बाज़ार में उपलब्ध नहीं है।

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