Rahul Gandhi: राहुल गांधी संसद सदस्यता प्रकरण से BJP ने क्या खोया, क्या पाया; I.N.D.I.A. को मिली कितनी मजबूती?
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विस्तार
राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल कर दी गई है। संसद में एक बार फिर वे जोरदार ढंग से सरकार पर हमला बोलते हुए दिखाई पड़ेंगे। उनकी सदस्यता बहाली ऐसे समय में हुई है, जब केंद्र सरकार मणिपुर, नूंह हिंसा, दिल्ली सेवा विधेयक और अविश्वास प्रस्ताव के मामले में घिरी हुई है। इसके साथ ही राहुल गांधी की संसद सदस्यता जाने का मुद्दा भी विपक्ष को ज्यादा मजबूत कर सकता है। राहुल गांधी ने सदन में एक उद्योगपति के सरकार से गठजोड़ को लेकर जिस तरह केंद्र सरकार पर हमला बोला था, एक बार फिर वे मजबूती से सरकार को घेरते दिखाई पड़ेंगे। बड़ा प्रश्न है कि इस पूरे प्रकरण से भाजपा को क्या हासिल हुआ? इस पूरे प्रकरण से उसे लाभ होगा, या हानि?
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भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि यह पूरा प्रकरण कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा था। भाजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी बार-बार आदतन आपत्तिजनक टिप्पणियां करते रहे हैं। इस मामले में भी उन्होंने पिछड़े समुदाय के एक वर्ग पर टिप्पणी की, जिससे आहत होकर उस समाज के एक व्यक्ति ने उन पर मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया। एक न्यायालय ने निर्णय दिया और स्पीकर ने उस पर निर्णय लिया। उनके अनुसार इस पूरे प्रकरण में भाजपा कहीं नहीं है, लिहाजा इसका भाजपा से कोई सरोकार नहीं है।
इस सफाई के बाद भी लोग इस पूरे मामले को सरकार से जोड़कर देख रहे हैं। भाजपा के लोगों का भी मानना है कि इस पूरे प्रकरण में राहुल गांधी को विक्टिम कार्ड खेलने का अवसर दिया गया है। इससे उनकी छवि मजबूत हुई है। भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
भाजपा के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि 2014 से लेकर अब तक कांग्रेस बैकफुट पर है। लोकसभा में उसे नेता विपक्ष की कुर्सी हासिल करने लायक तक सीटें नहीं मिल रही हैं। एक दो राज्यों को छोड़ दें, तो उत्तर प्रदेश से लेकर गुजरात तक में कांग्रेस अपने एतिहासिक निम्न प्रदर्शन पर है। ऐसे में राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर आक्रामक हमला कर उन्हें विक्टिम कार्ड खेलने का अवसर दिया जा रहा है। इससे कांग्रेस को लाभ और भाजपा को नुकसान होगा।
'इंडिया' हुआ मजबूत
राजनीतिक विश्लेषक संजय तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि विपक्षी दलों ने सरकार को लोकसभा में जमकर घेर रखा है, लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस के पास प्रखर वक्ताओं की कमी साफ दिखाई पड़ रही है। अधीर रंजन चौधरी की हिंदी पर कमजोर पकड़ कांग्रेस के हमलों को कुंद कर रही है। ऐसे में राहुल गांधी की संसद में वापसी से कांग्रेस के साथ-साथ पूरे विपक्षी गठबंधन को लाभ मिलेगा।
राहुल गांधी ने जिस तरह पिछले दिनों सरकार को संसद में घेरा है, उससे उनके परिपक्व होने के प्रमाण मिले हैं। भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी एक नए अवतार में केंद्र पर हमला बोलते दिखाई पड़ेंगे और सरकार को इसका जवाब नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विपक्षी गठबंधन की एकता की धुरी है। इस धुरी के मजबूत होने से उसके सहयोगी अंगों को भी ताकत मिलेगी। अब जब 31 अगस्त-एक सितंबर को विपक्षी दलों की बैठक मुंबई में होगी, वह पटना-बेंगलुरु बैठक से कहीं ज्यादा असरदार होगी। इससे भी सरकार को परेशानी होनी तय है।
कांग्रेस ने दिया है परिपक्वता का परिचय
राजनीतिक विश्लेषक राकेश रंजन ने कहा कि कांग्रेस ने हाल के दिनों में कई बार अपनी समझबूझ और संगठन की चतुराई का परिचय दिया है। राहुल गांधी ने राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सुलह करा कर अपनी राजनीतिक मजबूती का परिचय दिया है, तो छत्तीसगढ़ में भी भूपेश बघेल और उनके विरोधियों के बीच एक सहमति बनाने में सफलता हासिल हुई है।
उनके अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और लोकसभा प्रकरण के बाद राहुल गांधी और कांग्रेस ज्यादा मजबूत हुए हैं। अब कांग्रेस गठबंधन के अंदर से लेकर बाहर तक ज्यादा मजबूती के साथ अपने पत्ते खेल सकेगी। उसके सहयोगियों को भी मोलभाव करते समय कांग्रेस की वर्तमान ताकत का मूल्यांकन करना होगा। जबकि भाजपा ने इस पूरे प्रकरण में गलत कोण पर दिखाई पड़ रही है। उसे इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।