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Hindi News ›   India News ›   Jhiram Ghati Naxal Attack: NIA Court Convicts 10 Accused, to pronounce sentence on Sep 16

2013 झीरम घाटी नक्सली हमला: एनआईए कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया; 16 सितंबर को होगा सजा पर फैसला

Sat, 05 Sep 2026 02:55 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 05 Sep 2026 02:55 PM IST
सार

Jhiram Ghati Naxal Attack 2013: करीब 13 साल पुराने झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बचे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। 2013 के इस हमले में 32 लोगों की मौत हुई थी। अब दोषियों की सजा पर फैसला 16 सितंबर को होगा।

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Jhiram Ghati Naxal Attack: NIA Court Convicts 10 Accused, to pronounce sentence on Sep 16
एनआईए कोर्ट का फैसला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में हुए बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में करीब 13 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने शनिवार को मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। अब अदालत 16 सितंबर को दोषियों को दी जाने वाली सजा की अवधि पर फैसला सुनाएगी। इससे पहले 12 अगस्त को मामले में दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी हो गई थीं। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसला 31 अगस्त को सुनाया जाना प्रस्तावित था, लेकिन इसे शनिवार को जारी किया गया।

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इस मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों के खिलाफ लंबे समय तक सुनवाई चली। इनमें से एक आरोपी की मुकदमे के दौरान मौत हो गई। एनआईए की चार्जशीट में 33 अन्य लोगों के नाम भी हैं, जिन्हें फरार बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कुछ नक्सली बाद में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।

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क्या दोषी फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत जाएंगे?

बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने कहा कि फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी तक उन्हें फैसले की प्रति नहीं मिली है। प्रति मिलने के बाद अपील के आधार और कानूनी दलीलों को तय किया जाएगा।

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25 मई 2013 को झीरम घाटी में क्या हुआ था?

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की दरभा घाटी स्थित झीरम घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस की ‘परिवर्तन रैली’ पर घात लगाकर हमला किया था। यह हमला एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर किया गया था। इसमें कांग्रेस नेताओं, आम लोगों और 10 सुरक्षाकर्मियों समेत कम से कम 32 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस हमले ने राज्य में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा झटका दिया था।


मारे गए लोगों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल, विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे। महेंद्र कर्मा ने नक्सलवाद के खिलाफ ‘सलवा जुडूम’ आंदोलन शुरू किया था। यह रैली उसी साल होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले निकाली गई थी।

हमले के बाद पहले राज्य पुलिस ने केस दर्ज किया। तत्कालीन रमन सिंह सरकार ने दो दिन के भीतर जांच एनआईए को सौंप दी। इसके अलावा मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग भी बनाया गया था।




जांच के दौरान एनआईए ने 40 मुख्य आरोपियों समेत 150 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इनमें से 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जबकि बाकी 10 आरोपी हिरासत में रहे। इस पूरे मामले की सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अब अदालत ने बचे हुए सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है।

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