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यूपी में चीनी उत्पादन करने वाले करीब 5 हजार कोल्हू पर प्रतिबंध की मांग

Wed, 07 Dec 2016 12:21 AM IST
विवेक मिश्रा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विवेक मिश्रा/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 07 Dec 2016 12:21 AM IST
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West UP sought to ban bull crusher crushing in UP

उत्तर प्रदेश में करीब 5000 कोल्हू के जरिए होने वाले चीनी व अन्य उत्पादन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से अंतरिम आदेश के तहत प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा याची ने एनजीटी से कोल्हू के जरिए होने वाले पर्यावरण प्रदूषण की जांच भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व उत्तर प्रदेश के संबंधित प्राधिकरण से कराने की मांग की है।

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वहीं एनजीटी ने इस मामले पर केंद्र व राज्य के संबंधित प्राधिकरणों से जवाब मांगा है। हालांकि याची की ओर से कोल्हू के जरिए होने वाले प्रदूषण पर किसी तरह का अध्ययन न पेश कर पाने पर पीठ ने कहा है कि वे कोल्हू से होने वाले प्रदूषण को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचेंगे। अगली सुनवाई में मामले पर और दलीलें सुनी जाएंगी। अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।
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जस्टिस यूडी साल्वी की अध्यक्षता वाली पीठ याची अनिल कुमार के मामले पर सुनवाई कर रही है। याची की ओर से पेश एडवोकेट निशांत गौतम ने अपनी दलीलें पेश कीं। एडवोकेट गौतम ने कहा कि समूचे उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन के लिए मिलों के संबंध में कड़े पर्यावरणीय कानून हैं जबकि कोल्हू के जरिए चीनी उत्पादन के लिए न तो किसी तरह की गाइडलाइन है और न ही कोई कानून।
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यदि चीनी उत्पादन का अनुपात देखा जाए तो 50 फीसदी चीनी यदि मिलों के जरिए होती है तो 50 फीसदी कोल्हू के जरिए उत्पादित होती है। कोल्हू के जरिए गन्ने की पेराई से चीनी व अन्य उत्पाद तैयार करने का काम प्रमुख तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य उत्तर प्रदेश में किया जा रहा है।

प्राधिकरणों ने जवाब देने के लिए पीठ से चार हफ्तों का वक्त मांगा

West UP sought to ban bull crusher crushing in UP

इस संबंध में केंद्र व राज्य दोनों प्राधिकरणों की ओर से कोल्हू के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी कोई अध्ययन नहीं किया गया है। इसलिए अंतरिम आदेश के तहत कोल्हू संचालन को बंद किया जाना चाहिए साथ ही इसका पर्यावरणीय अध्ययन भी होना चाहिए। 

वहीं सुनवाई के दौरान केंद्र व राज्य के संबंधित प्राधिकरणों ने जवाब देने के लिए पीठ से चार हफ्तों का वक्त मांगा था। हालांकि पीठ ने प्राधिकरणों को दो हफ्तों का वक्त जवाब दाखिल करने के लिए दिया है। 
वहीं याची का आरोप है कि गन्ना पेराई सीजन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश व मध्य उत्तर प्रदेश इलाके में करीब 180 दिन कोल्हू के जरिए चीनी व अन्य उत्पादों का उत्पादन किया जाता है।

​वहीं इस दौरान कोल्हू के जरिए कार्बन डाई ऑक्साइड और कॉर्बन मोनो ऑक्साइड जैसी कई खतरनाक गैसों का उत्सर्जन होता है। जबकि इसकी किसी तरह की जांच नहीं होती। ऐसे में जरूरी है कि कोल्हू के जरिए होने वाले पर्यावरण प्रभाव का समग्र अध्ययन किया जाए। इस बीच इनके संचालन पर भी रोक लगाई जाए।

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