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बंगाल: सीएम शुभेंदु का एलान- मतुआ शरणार्थियों को जमीन और मकान देगी सरकार, जेल में बंद लोग रिहा किए जाएंगे
Sun, 01 Nov 2026 11:59 PM IST
अमन तिवारी
आईएएनएस, कोलकाता
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 01 Nov 2026 11:59 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मतुआ शरणार्थियों को नागरिकता देने और उनके पुनर्वास का वादा किया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से आए मतुआ समुदाय के लोगों को सीएए के तहत नागरिकता प्रमाणपत्र, जमीन और मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। बिना मुकदमे जेल में बंद शरणार्थियों को रिहा किया जाएगा।
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शुभेंदु अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को घोषणा की कि पड़ोसी देश बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल आ रहे मतुआ शरणार्थियों को आने वाले दिनों में रिहा किया जाएगा। साथ ही, उन्हें राज्य में जमीन और आवास भी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार के दौरान मतुआ शरणार्थियों को जेलों में बंद किया गया था।
सीएए के तहत नागरिकता और वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने का वादा
मुख्यमंत्री ने यह भी वादा किया कि मतुआ समुदाय के शरणार्थियों को पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता दी जाएगी और उसके बाद उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज किए जाएंगे। यह घोषणा उन्होंने उत्तरी 24 परगना जिले के बांगांव स्थित ठाकुरनगर में मतुआ नेतृत्व के पैतृक घर 'ठाकुरबाड़ी' में दूसरे अंतर्राष्ट्रीय मतुआ गोसाई सम्मेलन को संबोधित करते हुए की। बता दें कि मतुआ एक पिछड़ा वर्ग का हिंदू समुदाय है जो पूर्व पूर्वी पाकिस्तान या वर्तमान बांग्लादेश से आया है और स्वतंत्रता के बाद से समय-समय पर पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में बस गया है।
सीएम ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद, वहां बसे हिंदू भाइयों में से कई मतुआ समुदाय के लोगों को भारी अत्याचारों का सामना करना पड़ा। फिर, पश्चिम बंगाल में, तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार ने मतुआ समुदाय सहित कई हिंदू शरणार्थियों को चुनिंदा रूप से गिरफ्तार किया। 1 सितंबर, 2025 को हमारे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया था कि 31 दिसंबर, 2024 तक बांग्लादेश छोड़कर भारत में प्रवेश करने वालों को पुलिस द्वारा छुआ तक नहीं जाएगा।
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इसके बाद, मुख्यमंत्री अधिकारी ने घोषणा की कि यदि कोई मतुआ शरणार्थी अभी भी उत्तर 24 परगना के सीमावर्ती बांगांव और बारासात तथा नादिया जिले के राणाघाट में स्थित किसी सुधारगृह में बिना मुकदमे के जेल में बंद हैं, तो उन्हें सम्मानपूर्वक रिहा किया जाएगा और उन्हें जमीन और मकान दिए जाएंगे।
सीएए प्रमाणपत्र देने का किया वादा
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में इस वर्ष 31 दिसंबर तक मतुआ समुदाय के लोगों को सीएए प्रमाणपत्र देने का भी वादा किया। इस अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने विपक्षी दलों और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के दोहरे मुद्दों पर सीजेपी के आंदोलन पर तीखा हमला किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और राज्य को अस्थिर करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हम उनके खिलाफ लड़ेंगे। हिंदू अपनी ही धरती पर दोबारा शरणार्थी नहीं बनेंगे।
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सीएए के तहत नागरिकता और वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने का वादा
मुख्यमंत्री ने यह भी वादा किया कि मतुआ समुदाय के शरणार्थियों को पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता दी जाएगी और उसके बाद उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज किए जाएंगे। यह घोषणा उन्होंने उत्तरी 24 परगना जिले के बांगांव स्थित ठाकुरनगर में मतुआ नेतृत्व के पैतृक घर 'ठाकुरबाड़ी' में दूसरे अंतर्राष्ट्रीय मतुआ गोसाई सम्मेलन को संबोधित करते हुए की। बता दें कि मतुआ एक पिछड़ा वर्ग का हिंदू समुदाय है जो पूर्व पूर्वी पाकिस्तान या वर्तमान बांग्लादेश से आया है और स्वतंत्रता के बाद से समय-समय पर पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में बस गया है।
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सीएम ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद, वहां बसे हिंदू भाइयों में से कई मतुआ समुदाय के लोगों को भारी अत्याचारों का सामना करना पड़ा। फिर, पश्चिम बंगाल में, तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार ने मतुआ समुदाय सहित कई हिंदू शरणार्थियों को चुनिंदा रूप से गिरफ्तार किया। 1 सितंबर, 2025 को हमारे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया था कि 31 दिसंबर, 2024 तक बांग्लादेश छोड़कर भारत में प्रवेश करने वालों को पुलिस द्वारा छुआ तक नहीं जाएगा।
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इसके बाद, मुख्यमंत्री अधिकारी ने घोषणा की कि यदि कोई मतुआ शरणार्थी अभी भी उत्तर 24 परगना के सीमावर्ती बांगांव और बारासात तथा नादिया जिले के राणाघाट में स्थित किसी सुधारगृह में बिना मुकदमे के जेल में बंद हैं, तो उन्हें सम्मानपूर्वक रिहा किया जाएगा और उन्हें जमीन और मकान दिए जाएंगे।
सीएए प्रमाणपत्र देने का किया वादा
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में इस वर्ष 31 दिसंबर तक मतुआ समुदाय के लोगों को सीएए प्रमाणपत्र देने का भी वादा किया। इस अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने विपक्षी दलों और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के दोहरे मुद्दों पर सीजेपी के आंदोलन पर तीखा हमला किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और राज्य को अस्थिर करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हम उनके खिलाफ लड़ेंगे। हिंदू अपनी ही धरती पर दोबारा शरणार्थी नहीं बनेंगे।