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Bengal: शिल्पकारों पर दिखेगा आरजी कर घटना का असर, बांग्लादेश हिंसा का प्रभाव कुम्हार टुली के बाजार में दिखा
Thu, 12 Sep 2024 02:22 PM IST
श्वेता महतो
एन. अर्जुन, कोलकाता
एन. अर्जुन, कोलकाता
Published by: श्वेता महतो
Updated Thu, 12 Sep 2024 02:22 PM IST
सार
कहीं-कहीं 20 से 30 प्रतिशत दिख रहा है असर बाजारों से रौनक गायब, दुर्गापूजा रहेगा इस बार थोड़ा फीका नौ अगस्त के बाद ऑर्डर हुए कम, मूर्तियों का साइज भी छोटा रहेगा, विदेशी ऑर्डर जुलाई में ही भेजे जा चुके हैं।
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शिल्पकारों पर पड़ा आरजी कर घटना और बांग्लादेश हिंसा का असर
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
देखिए, यह कहना कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना का असर शिल्पकारों पर नहीं पड़ा गलत होगा। खास कर बड़ी मूर्तियों पर इसका असर पड़ा है। कहीं-कहीं 20 से 30 प्रतिशत तक इसका असर देखने को मिल रहा है। भले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोगों से उत्सव में लौटने का आह्वान किया लेकिन ने जो घटना घटी है, उससे बंगाल में के लोगों का मन में वह उत्साह नहीं है, जिनता कि पिछले वर्षों में इस समय देखने को मिलता था। यह बात अमर उजाला से खास बातचीत में कुमार टुली मृतशिल्प संस्कृति समिति के कोषाध्यक्ष सुजीत कुमार पॉल ने कही। हालांकि उन्होंने कहा, विदेश में जो मूर्तियां जाती थीं, वह जुलाई तक सारी जा चुकी हैं। मां के गहनों और सजावट सामान के विक्रेता संजय पाल कहते हैं, बांग्लादेश में जो उथल-पुथल हुआ का असर सजावटी सामान के बाजार में दिखने को मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि पूरी दुनिया में कोलकाता का दुर्गापूजा प्रसिद्ध है। यहां पर करीब 200 साल पुरानी एक एक बस्ती है कुमार टुली , जहां से देश और दुनिया की करीब 80 प्रतिशत से अधिक मां दुर्गा प्रतिमाओं की आपूर्ति होती है।
बड़े पडालों में दिख रहा है ज्यादा असर, मूर्तियां हुईं छोटी सुजीत ने कहा, काफी बुकिंग तो जुलाई में ही हो जाती हैं। नौ अगस्त के बाद बड़ी मूर्तियों की बुकिंग कम हुई हैं। क्योंकि लोगों के मन में एक तरह का गुस्सा है। वे मन से खुश नहीं है। इसका असर जो बड़े-बड़े पंडाला लगते थे उन पर पड़ेगा। प्रायोजकों ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। इसलिए जो पंडाल पिछले वर्षों में 40 लाख तक के बनते थे, इस बर वह 15 से 20 लाख तक में सिमट रहे हैं। साथ ही इस बार बड़ी मूर्तियां कम हो देखने को मिलेंगी, क्योंकि बुकिंग में मूर्तियों की साइज छोटी करके बनाने को कहा जा रहा है। इस कारण शिल्पकारों पर इसका असर सीधे तौर पर देखने को मिल रहा है। हालांकि, हम खुद भी चाहते हैं कि पीड़िता को न्याय मिले। इसलिए कुम्हार टुली के शिल्पकारों ने पीड़िता के न्याय के लिए रैली भी निकाली। लेकिन विदेशों से जो ऑर्डर मिले थे, वह जुलाई तक भेजे जा चुके हैं।
बांग्लादेशः 30 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत रह गया
कुमार टुली में ही मां के हार, श्रृंगार और सजावटी सामान के विक्रेता संजय पाल कहते हैं, इस बार मार दो तरफ से पड़ रही है। आरजी कर के कारण लोगों में गुस्सा है, लोगों में इस बार मायुसी है। बाजार में इतनी रौनक नहीं है। इसके साथ ही बांग्लादेश में पिछले दिनों जो सत्ता परिवर्तन हुई, उसका असर भी कुम्हार टुली के सजावटी बाजार में देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, अगर पिछले वर्षों में बांग्लादेश के साथ 30 प्रतिशत का विजनेस होता था तो इस बार वह घटकर 5 प्रतिशत से भी कम रह गया। क्योंकि बांग्लादेश में मां दुर्गा और अन्य भगवानों के लिए सजावटी सामान यहीं से जाता था। लेकिन इस बार न के बराबर है।
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असर है लेकिन छोटी मूर्तियों पर उतना नहीं
कुमार टुली में ही छोटी मूर्ति बनाने वाले शिल्पकार पार्थो पाल ने कहा, इस बार आरजी कर का असर मार्केट में पड़ा है। लेकिन छोटी मूर्तियों पर इसका खासा असर नहीं पड़ा है। पाल कहते हैं, पूरे बंगाल में लोगों में इस बार उत्साह नहीं है। मन में कहीं गुस्सा है, पीड़ा है। दुर्गापूजा इसलिए मनाएंगे क्योंकि यह परंपरा है और उसका निर्वहन भी करना है। अगर ऐसा नहीं होता तो मुझे लगता है कोई भी इस बार दुर्गापूजा नहीं मनाता।
शिल्पकार भी समाज के साथ खड़े दिखना चाहते हैं
क्या कुमार टुली के शिल्पकारों को इस बार उतना ही नुकसान हुआ है, जितना कि बताया जा रहा है, इस पर एक शिल्पकार ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, जितना बताया जा रहा है, कुमार टुली के शिल्पकारों पर असर उससे ज्यादा हुआ है। यह बात कोई भी खुलकर नहीं बोल रहा, क्योंकि शिल्पकार भी समाज के साथ खड़े दिखाई देना चाहते हैं। यहां के शिल्पकारों ने भी न्याय के लिए रैली निकाली। शिल्पकारों को लगता है कि कहीं यहां यह मैसेज नहीं जाए कि शिल्पकार पीड़िता के साथ नहीं है। इसलिए वे नुकसान को छिपा रहे हैं। आप खुद मार्किट में हैं, पिछले वर्ष की तुलना में मार्किट की रौनक देखिए और असर का अंदाजा खुद लग जाएगा।
बाजार से रौनक गायब, खरीदारी को लेकर उत्साह नहीं
दुर्गापूजा के लिए अब एक महीने का समय रह गया है। लेकिन कोलकाता के बाजारों में वह उत्साह और उमंग दिखाई नहीं दे रहा है। बाजारों में रौनक गायब है। नहीं तो बड़ा बाजार हो या फिर गरियाहाट मार्किट में इस समय पैर रखने की जगह नहीं होती थी। बड़ा बाजार के सुनील कहते हैं, इस बार बाजार से रौनक गायब है। माल नहीं उठ रहा है। दुकानदार अभी भी थोड़ा वक्त चाहते हैं। लेकिन समय बहुत कम रहा गया है। इसी तरह से गरियाहाट के फैंसी और सजावटी सामान के विक्रेता तापस कहते हैं, अभी तो इक्का-दुक्का लोग आ रहे हैं। आरजी कर की घटना ने लोगों को अंदर तक हिला दिया है। देखते हैं, रौनक लौटेगी या फिर इस बार दुर्गापूजा फीका ही जाएगा।
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बड़े पडालों में दिख रहा है ज्यादा असर, मूर्तियां हुईं छोटी सुजीत ने कहा, काफी बुकिंग तो जुलाई में ही हो जाती हैं। नौ अगस्त के बाद बड़ी मूर्तियों की बुकिंग कम हुई हैं। क्योंकि लोगों के मन में एक तरह का गुस्सा है। वे मन से खुश नहीं है। इसका असर जो बड़े-बड़े पंडाला लगते थे उन पर पड़ेगा। प्रायोजकों ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। इसलिए जो पंडाल पिछले वर्षों में 40 लाख तक के बनते थे, इस बर वह 15 से 20 लाख तक में सिमट रहे हैं। साथ ही इस बार बड़ी मूर्तियां कम हो देखने को मिलेंगी, क्योंकि बुकिंग में मूर्तियों की साइज छोटी करके बनाने को कहा जा रहा है। इस कारण शिल्पकारों पर इसका असर सीधे तौर पर देखने को मिल रहा है। हालांकि, हम खुद भी चाहते हैं कि पीड़िता को न्याय मिले। इसलिए कुम्हार टुली के शिल्पकारों ने पीड़िता के न्याय के लिए रैली भी निकाली। लेकिन विदेशों से जो ऑर्डर मिले थे, वह जुलाई तक भेजे जा चुके हैं।
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बांग्लादेशः 30 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत रह गया
कुमार टुली में ही मां के हार, श्रृंगार और सजावटी सामान के विक्रेता संजय पाल कहते हैं, इस बार मार दो तरफ से पड़ रही है। आरजी कर के कारण लोगों में गुस्सा है, लोगों में इस बार मायुसी है। बाजार में इतनी रौनक नहीं है। इसके साथ ही बांग्लादेश में पिछले दिनों जो सत्ता परिवर्तन हुई, उसका असर भी कुम्हार टुली के सजावटी बाजार में देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, अगर पिछले वर्षों में बांग्लादेश के साथ 30 प्रतिशत का विजनेस होता था तो इस बार वह घटकर 5 प्रतिशत से भी कम रह गया। क्योंकि बांग्लादेश में मां दुर्गा और अन्य भगवानों के लिए सजावटी सामान यहीं से जाता था। लेकिन इस बार न के बराबर है।
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असर है लेकिन छोटी मूर्तियों पर उतना नहीं
कुमार टुली में ही छोटी मूर्ति बनाने वाले शिल्पकार पार्थो पाल ने कहा, इस बार आरजी कर का असर मार्केट में पड़ा है। लेकिन छोटी मूर्तियों पर इसका खासा असर नहीं पड़ा है। पाल कहते हैं, पूरे बंगाल में लोगों में इस बार उत्साह नहीं है। मन में कहीं गुस्सा है, पीड़ा है। दुर्गापूजा इसलिए मनाएंगे क्योंकि यह परंपरा है और उसका निर्वहन भी करना है। अगर ऐसा नहीं होता तो मुझे लगता है कोई भी इस बार दुर्गापूजा नहीं मनाता।
शिल्पकार भी समाज के साथ खड़े दिखना चाहते हैं
क्या कुमार टुली के शिल्पकारों को इस बार उतना ही नुकसान हुआ है, जितना कि बताया जा रहा है, इस पर एक शिल्पकार ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, जितना बताया जा रहा है, कुमार टुली के शिल्पकारों पर असर उससे ज्यादा हुआ है। यह बात कोई भी खुलकर नहीं बोल रहा, क्योंकि शिल्पकार भी समाज के साथ खड़े दिखाई देना चाहते हैं। यहां के शिल्पकारों ने भी न्याय के लिए रैली निकाली। शिल्पकारों को लगता है कि कहीं यहां यह मैसेज नहीं जाए कि शिल्पकार पीड़िता के साथ नहीं है। इसलिए वे नुकसान को छिपा रहे हैं। आप खुद मार्किट में हैं, पिछले वर्ष की तुलना में मार्किट की रौनक देखिए और असर का अंदाजा खुद लग जाएगा।
बाजार से रौनक गायब, खरीदारी को लेकर उत्साह नहीं
दुर्गापूजा के लिए अब एक महीने का समय रह गया है। लेकिन कोलकाता के बाजारों में वह उत्साह और उमंग दिखाई नहीं दे रहा है। बाजारों में रौनक गायब है। नहीं तो बड़ा बाजार हो या फिर गरियाहाट मार्किट में इस समय पैर रखने की जगह नहीं होती थी। बड़ा बाजार के सुनील कहते हैं, इस बार बाजार से रौनक गायब है। माल नहीं उठ रहा है। दुकानदार अभी भी थोड़ा वक्त चाहते हैं। लेकिन समय बहुत कम रहा गया है। इसी तरह से गरियाहाट के फैंसी और सजावटी सामान के विक्रेता तापस कहते हैं, अभी तो इक्का-दुक्का लोग आ रहे हैं। आरजी कर की घटना ने लोगों को अंदर तक हिला दिया है। देखते हैं, रौनक लौटेगी या फिर इस बार दुर्गापूजा फीका ही जाएगा।