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Nabanna Abhijan: 'अगर शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाता है तो पुलिस बाधा नहीं डाल सकती', छात्रों के प्रदर्शन पर घोष
Tue, 27 Aug 2024 09:09 AM IST
अभिषेक दीक्षित
एजेंसी, कोलकाता
एजेंसी, कोलकाता
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Tue, 27 Aug 2024 09:09 AM IST
सार
तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल पुलिस ने रैली में हिंसा की आशंका जताई है। राज्य पुलिस ने निर्धारित रैलियों को अवैध और अनधिकृत बताया है। पुलिस का कहना है कि उसने मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने से संबंधित आशंकाओं को दूर करने के लिए आवश्यक सावधानी बरती है।
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West Bengal
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
पश्चिम बंगाल में छात्रों के संगठन ‘छात्र समाज’ ने कहा है कि आज यानी 27 अगस्त को होने वाली नबन्ना अभियान रैली शांतिपूर्ण रहेगी। उसका जोर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे तथा आरजी कर अस्पताल में चिकित्सक से कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषियों की गिरफ्तारी की मांग पर रहेगा। इस बीच तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल पुलिस ने रैली में हिंसा की आशंका जताई है। राज्य पुलिस ने निर्धारित रैलियों को अवैध और अनधिकृत बताया है। पुलिस का कहना है कि उसने मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने से संबंधित आशंकाओं को दूर करने के लिए आवश्यक सावधानी बरती है।
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इस बीच भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा कि पुलिस को इसे वैध या अवैध कहने का क्या अधिकार है? लोकतांत्रिक देश में कोई भी विरोध कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि अगर कोई शांतिपूर्ण विरोध या मार्च निकाला जाता है तो पुलिस उसमें बाधा नहीं डाल सकती। टीएमसी नेता कुणाल घोष के बयान पर उन्होंने कहा कि इससे क्या फर्क पड़ता है कि कुणाल घोष क्या कहते हैं? जो घटना हुई, उसके खिलाफ उनकी सरकार ने क्या किया?
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दरअसल, मामले में टीएमसी नेता कुनाल घोष ने कहा कि भाजपा, सीपीएम और कांग्रेस सभी एक हैं। भाजपा नबन्ना अभियान कर रही है और कांग्रेस उसका समर्थन कर रही है और सीपीएम जो भी कहे, लेकिन वे सभी प्रदर्शन के बारे में बात कर रहे हैं। राम-वाम और सभी पश्चिम बंगाल में टीएमसी के खिलाफ अराजकता पैदा करने के लिए साथ आ रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
सर्वोच्च न्यायालय ने 22 अगस्त को कहा था कि पश्चिम बंगाल सरकार इस घटना को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में बाधा या व्यवधान उत्पन्न न करे। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि उसने राज्य सरकार को वैध शक्तियों का इस्तेमाल करने से नहीं रोका है।
पुलिस का तर्क, सरकार ने निषेधाज्ञा लागू की
इससे पहले एडीजी (कानून- व्यवस्था) मनोज वर्मा ने कहा कि पुलिस को विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली है कि उपद्रवी रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों के बीच घुसने और बड़े पैमाने पर हिंसा व अराजकता फैलाने का प्रयास करेंगे। सरकार ने पहले ही बीएनएसएस की धारा 163 के तहत नबन्ना के निकट निषेधाज्ञा लागू कर दी है, जिसके तहत पांच या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर रोक लग गई है।
छात्रों को रैली पर बल प्रयोग न करें: राज्यपाल
इस बीच सोमवार देर शाम राजभवन की ओर से जारी एक वीडियो संदेश में राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह छात्रों को रैली रोकने के लिए बल प्रयोग न करे। बोस ने कहा कि पश्चिम बंगाल के छात्र समुदाय द्वारा घोषित शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और सरकार के कई निर्देशों के जरिए प्रदर्शन के दमन की खबरों के संदर्भ में मैं सरकार से भारत के सर्वोच्च न्यायालय के कड़े निर्णय को याद रखने का आग्रह करूंगा। पश्चिम बंगाल सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग न करे।
पूर्व प्राचार्य संदीप घोष का का पॉलीग्राफ टेस्ट
इस बीच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला चिकित्सक से दुष्कर्म-हत्या के मामले की जांच के तहत कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष और पांच अन्य का दूसरे दौर का पॉलीग्राफ टेस्ट किया। एक अधिकारी के अनुसार, पिछले 10 दिन में घोष ने पूछताछ के दौरान असंगत जवाब दिए, जिससे अधिकारियों को पॉलीग्राफ परीक्षण का एक और दौर पूरा किया। सीबीआई ने शनिवार को घोष और अन्य पर झूठ पकड़ने वाले परीक्षण (लाई-डिटेक्शन टेस्ट) किए थे, उसके बाद रविवार को आरोपी संजय रॉय का प्रेसीडेंसी सुधार गृह में टेस्ट किया गया।