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Bengal Governor Resignation: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने इस्तीफा दिया, विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
Thu, 05 Mar 2026 07:33 PM IST
Himanshu Singh Chandel
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Thu, 05 Mar 2026 07:33 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका यह कदम विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। उन्होंने 17 नवंबर 2022 को राज्यपाल का पद संभाला था। फिलहाल उनके इस्तीफे की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है।
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बंगाल में राज्यपाल का इस्तीफा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने राज्य की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। चुनाव से पहले राज्यपाल का पद छोड़ना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। सीवी आनंद बोस ने 17 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। फिलहाल वह दिल्ली में मौजूद हैं और उनके इस्तीफे की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है।
इस इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे समय में राज्यपाल का पद छोड़ना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। हालांकि अब तक न तो राजभवन की ओर से और न ही केंद्र सरकार की ओर से इस फैसले को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है।
ये भी पढ़ें- चुनाव से पहले असम में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सरकार ने 15 वरिष्ठ अफसरों के किए तबादले
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ममता बनर्जी के साथ क्यों रहा टकराव?
राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उनका राज्य सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ कई मुद्दों को लेकर टकराव भी चर्चा में रहा। विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति, विभिन्न विधेयकों पर हस्ताक्षर तथा प्रशासनिक मामलों को लेकर राजभवन और राज्य सरकार के बीच कई बार मतभेद सामने आए थे। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन की ओर से इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक जानकारी जारी की जा सकती है। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल का इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा जाता है। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति या किसी अन्य राज्यपाल को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की संभावना रहती है।
कौन हैं सीवी आनंद बोस?
सीवी आनंद बोस भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी रहे हैं। वह लंबे समय तक प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर काम किया है। वह मेघालय सरकार के सलाहकार भी रह चुके हैं। इसके अलावा वह एक लेखक, वक्ता और आवास नीति के विशेषज्ञ के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति से लेकर भारत सरकार में सचिव और मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या रही भूमिका?
सीवी आनंद बोस ने अपने प्रशासनिक करियर में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह जिला कलेक्टर, प्रधान सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने शिक्षा, वन एवं पर्यावरण, श्रम और सामान्य प्रशासन जैसे कई मंत्रालयों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी किया है। जिनेवा स्थित यूरोपीय परमाणु अनुसंधान परिषद और फ्रांस की अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन ऊर्जा संस्था में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
ये भी पढ़ें- LG Kavinder Gupta Resign: लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने दिया इस्तीफा, सियासी हलचल तेज
उन्हें कौन-कौन से सम्मान मिले?
सीवी आनंद बोस को उनके काम के लिए कई महत्वपूर्ण सम्मान भी मिले हैं। भारत सरकार ने उन्हें नेशनल हाउसिंग अवॉर्ड से सम्मानित किया था। उनके कई विकास संबंधी प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र ने चार बार ‘ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में चुना था। इसके अलावा उन्होंने सबरीमाला मंदिर से जुड़े पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की समिति का भी नेतृत्व किया था।
लेखक और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय
सीवी आनंद बोस प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ-साथ एक लेखक भी हैं। उन्होंने अंग्रेजी, हिंदी और मलयालम भाषाओं में करीब 32 किताबें लिखी हैं। इन किताबों में प्रशासन, समाज और विकास से जुड़े विषय शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने सस्ती आवास योजना, सुशासन, विज्ञान और तकनीक, कृषि, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में कई संस्थानों की स्थापना में भी भूमिका निभाई है।
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इस इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे समय में राज्यपाल का पद छोड़ना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। हालांकि अब तक न तो राजभवन की ओर से और न ही केंद्र सरकार की ओर से इस फैसले को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है।
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ममता बनर्जी के साथ क्यों रहा टकराव?
राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उनका राज्य सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ कई मुद्दों को लेकर टकराव भी चर्चा में रहा। विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति, विभिन्न विधेयकों पर हस्ताक्षर तथा प्रशासनिक मामलों को लेकर राजभवन और राज्य सरकार के बीच कई बार मतभेद सामने आए थे। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन की ओर से इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक जानकारी जारी की जा सकती है। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल का इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा जाता है। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति या किसी अन्य राज्यपाल को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की संभावना रहती है।
कौन हैं सीवी आनंद बोस?
सीवी आनंद बोस भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी रहे हैं। वह लंबे समय तक प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर काम किया है। वह मेघालय सरकार के सलाहकार भी रह चुके हैं। इसके अलावा वह एक लेखक, वक्ता और आवास नीति के विशेषज्ञ के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति से लेकर भारत सरकार में सचिव और मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या रही भूमिका?
सीवी आनंद बोस ने अपने प्रशासनिक करियर में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह जिला कलेक्टर, प्रधान सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने शिक्षा, वन एवं पर्यावरण, श्रम और सामान्य प्रशासन जैसे कई मंत्रालयों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी किया है। जिनेवा स्थित यूरोपीय परमाणु अनुसंधान परिषद और फ्रांस की अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन ऊर्जा संस्था में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
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उन्हें कौन-कौन से सम्मान मिले?
सीवी आनंद बोस को उनके काम के लिए कई महत्वपूर्ण सम्मान भी मिले हैं। भारत सरकार ने उन्हें नेशनल हाउसिंग अवॉर्ड से सम्मानित किया था। उनके कई विकास संबंधी प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र ने चार बार ‘ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में चुना था। इसके अलावा उन्होंने सबरीमाला मंदिर से जुड़े पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की समिति का भी नेतृत्व किया था।
लेखक और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय
सीवी आनंद बोस प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ-साथ एक लेखक भी हैं। उन्होंने अंग्रेजी, हिंदी और मलयालम भाषाओं में करीब 32 किताबें लिखी हैं। इन किताबों में प्रशासन, समाज और विकास से जुड़े विषय शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने सस्ती आवास योजना, सुशासन, विज्ञान और तकनीक, कृषि, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में कई संस्थानों की स्थापना में भी भूमिका निभाई है।
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