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घुसपैठ रोकने के लिए बॉर्डर पर फेंसिंग: बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के खिलाफ दीदी, विधानसभा में लाएंगी प्रस्ताव

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 13 Nov 2021 06:38 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल के साथ लगती बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा की लंबाई 2216.70 किलोमीटर है। इसमें से लगभग 1638 किलोमीटर हिस्से को बाड़ के द्वारा कवर किया गया है। हालांकि इसमें भी कई हिस्सों पर लगाई गई बाड़ अब क्षतिग्रस्त हो गई है। यह कहा जा सकता है कि लगभग छह सौ किलोमीटर का क्षेत्र ऐसा है, जहां पर कंटीली तार नहीं लगी है। इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। उनमें मुख्य तौर पर भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याओं का होना है...

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west bengal: Fencing on the border to prevent infiltration, Mamata Banerjee will bring resolution in the assembly against BSF power extended
बीएसएफ - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हो रही आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय सख्त कदम उठाने जा रहा है। बॉर्डर के भीतर पचास किलोमीटर तक के क्षेत्र में बीएसएफ को गिरफ्तारी, तलाशी व जब्ती की शक्ति प्रदान करने के फैसले का मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विरोध कर रही हैं। विधानसभा में 17 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस फैसले के खिलाफ प्रस्ताव लाया जाएगा। दूसरी तरफ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बार घुसपैठियों और तस्करों का इलाज करने का मन बना लिया है। शुक्रवार को केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कोलकाता पहुंचकर राज्य के मुख्य सचिव एवं दूसरे अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर बैठक की है। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में बीएसएफ के नए कार्यक्षेत्र को लेकर विचार किया गया है। राज्य का वह क्षेत्र जो बॉर्डर को छूता है, लेकिन वहां फेंसिंग नहीं है, ऐसी जगहों पर कंटीली तारें लगाई जाएंगी। बॉर्डर का कुछ इलाका ऐसा भी है, जहां पर जमीन कम है या भू-अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण 'फेंसिंग' का काम अधूरा पड़ा है।

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17 नवंबर को विधानसभा में लाया जाएगा प्रस्ताव...

बता दें कि पिछले दिनों जारी नई अधिसूचना में बीएसएफ को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), पासपोर्ट अधिनियम (भारत में प्रवेश) के तहत यह कार्रवाई करने का अधिकार मिला है। अब सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ' के जवान पंजाब, असम व पश्चिम बंगाल में 50 किलोमीटर क्षेत्र तक तलाशी, छापेमारी और गिरफ्तारी कर सकते हैं। गुजरात में बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 80 किमी से घटाकर 50 किमी किया गया है। विपक्षी दलों के अलावा पंजाब सरकार ने केंद्र के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। पंजाब विधानसभा में इसके खिलाफ प्रस्ताव लाया गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में ममता बनर्जी सरकार द्वारा 17 नवंबर को इस फैसले के खिलाफ प्रस्ताव लाया जाएगा। भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा, प्रस्ताव लाने का मतलब क्या है। पश्चिम बंगाल, आतंकियों का 'हब' बन गया है। राज्य सरकार 631 किलोमीटर लंबे सीमा क्षेत्र में बाड़ लगाने के लिए जमीन तक नहीं दे रही है। सभी भाजपा विधायक, विधानसभा में इस प्रस्ताव का विरोध करेंगे।

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बांग्लादेश से लगती सीमा के इतने क्षेत्र में नहीं लगी है बाड़

पश्चिम बंगाल के साथ लगती बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा की लंबाई 2216.70 किलोमीटर है। इसमें से लगभग 1638 किलोमीटर हिस्से को बाड़ के द्वारा कवर किया गया है। हालांकि इसमें भी कई हिस्सों पर लगाई गई बाड़ अब क्षतिग्रस्त हो गई है। यह कहा जा सकता है कि लगभग छह सौ किलोमीटर का क्षेत्र ऐसा है, जहां पर कंटीली तार नहीं लगी है। इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। उनमें मुख्य तौर पर भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याओं का होना है। बीएसएफ को कंटीली तार लगाने के दौरान स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता है। भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 4096 किलोमीटर है। पश्चिम बंगाल के अलावा असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा से भी बांग्लादेश की सीमा लगती है।

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बीएसएफ के लिए बड़ी चुनौती बने घुसपैठिये

पश्चिम बंगाल में रोजाना बीएसएफ को घुसपैठियों और तस्करों से जूझना पड़ता है। नशे की याबा टेबलेट, फेंसिडिल सिरप और गांजा, इन सब की तस्करी आम बात हो गई है। मानव तस्करी को लेकर भी पश्चिम बंगाल पुलिस गंभीर नहीं है। बीएसएफ और स्थानीय पुलिस के बीच ठीक समन्वय रहा हो, ऐसा कम ही देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में कहा था कि बीएसएफ को स्थानीय पुलिस का सहयोग नहीं मिलता। बॉर्डर पर गायों की तस्करी भी एक बड़ी समस्या है। चूंकि सीमा पार इस तस्करी के धंधे को मान्यता प्रदान की गई है, इसलिए तस्कर गायों को सीमा पार कराने के लिए किसी भी सीमा तक चले जाते हैं। वे बीएसएफ के जवानों पर हमला तक कर देते हैं। बीएसएफ भी उन्हें कठोर लहजे में जवाब देती है।


बीएसएफ के एक अधिकारी बताते हैं, हमारे जवान तो अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर तैनात हैं। वहां तक तस्करी का सामान कौन और कैसे लाता है, ये देखना पुलिस की जिम्मेदारी है। बिहार, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों से गोवंश को ट्रक में भरकर बिहार के रास्ते पश्चिम बंगाल तक पहुंचा दिया जाता है। उसके बाद उन्हें बॉर्डर पार कराने का प्रयास किया जाता है। इतने लंबे सफर में किसी भी राज्य की पुलिस का ध्यान इस तरफ नहीं जाता। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश, के साथ जब बैठक होती हैं तो बीएसएफ को बंगाल के सीमावर्ती जिलों में चल रही नशे की फैक्ट्रियों के फोटो दिखाए जाते हैं। वे हमारे देश पर आरोप लगाते हैं कि हम जानबूझकर नशा और पशु, सीमा पार भेजते हैं।

बीएसएफ को अब मिलेगी जमीन, तालमेल भी रहेगा...

केंद्रीय गृह सचिव और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव के बीच जिन मुद्दों पर बैठक हुई, उनमें कई बातों पर चर्चा की गई है। फेंसिंग के लिए जमीन की अधिग्रहण प्रक्रिया बिना किसी देरी के पूरी होगी। राज्य सरकार द्वारा बीएसएफ को इंटीग्रेटिड चेक पोस्ट बनाने या किसी अन्य कार्य के लिए जमीन देने के मामले में टालमटोल नहीं की जाएगी। ऐसी कितनी चेक पोस्ट या फेंसिंग का इलाका बचा है, जिसके लिए बांग्लादेश के साथ बातचीत करनी जरूरी है। अदालतों में जमीन अधिग्रहण के कितने मामले लंबित हैं। 50 किलोमीटर के अधिकार क्षेत्र की नई व्यवस्था में स्थानीय पुलिस और बीएसएफ के बीच 'इंटेलिजेंस इनपुट' को लेकर एक पुख्ता सिस्टम तैयार किया जाएगा। इस पर नजर रखने के लिए बंगाल पुलिस और बीएसएफ के अफसर बतौर नोडल अधिकारी नियुक्त होंगे।


 

घुसपैठियों और तस्करों को लेकर जिला पुलिस को विशेष हिदायतें जारी की गई हैं। ऐसा संभावित है कि बीएसएफ के साथ तालमेल के लिए जिला स्तर पर लोकल पुलिस की टॉस्क फोर्स गठित की जाएगी। गाय, नशा और तस्करी का दूसरा सामान, जहां से बॉर्डर के लिए चलता है, वहीं पर छापेमारी की जाए। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह सचिव को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक द्वारा भी कई तरह के सुझाव दिए गए हैं। इनमें सूचनाओं का आदान प्रदान और कार्रवाई, ये दोनों बातें शामिल हैं। इस पर बात ध्यान दिया गया है कि किसी भी बल द्वारा जुटाई गई सूचना लीक न होने पाए। बीएसएफ को नए वाहन और संचार उपकरण, भी जल्द मुहैया कराए जाएंगे।

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