ममता को झटका: माकपा नेता की हत्या में दीदी के करीबी छत्रधर महतो गिरफ्तार, दो दिन एनआईए हिरासत में
- टीएमसी नेता छत्रधर महतो को एनआईए ने किया गिरफ्तार
- पिछले साल माओवादी पार्टी छोड़कर टीएमसी में हुए थे शामिल
- देर रात तीन बजे लालगढ़ स्थित घर से महतो को किया गिरफ्तार
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पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है। एनआईए ने उनके करीबी माने जाने वाले छत्रधर महतो को गिरफ्तार कर लिया। 2009 में माकपा नेता प्रबीर महतो की हत्या के मामले में यह कार्रवाई की गई है। महतो को कोर्ट ने दो दिन के लिए एनआईए की हिरासत में सौंपा है। उन पर भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस को हाईजैक करने का भी आरोप है।
आरोप है कि छत्रधर महतो ने अपने साथियों के साथ गोलीबारी करके इस ट्रेन को कब्जाने की कोशिश की थी। बता दें कि शनिवार देर रात तीन बजे छत्रधर महतो को उनके लालगढ़ स्थित घर से गिरफ्तार किया गया है। महतो को ममता बनर्जी का दूत भी कहा जाता है। इस विधानसभा चुनाव में महतो टीएमसी के लिए लगातार चुनाव प्रचार कर रहे थे।
#UPDATE | A court in Kolkata sends TMC leader Chhatradhar Mahato to two-day NIA custody in connection with the 2009 murder case of CPI (M) leader Prabir Mahato. https://t.co/tuyWnFcckL
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) March 28, 2021
आदिवासी इलाकों में महतो की अच्छी पकड़
बंगाल के आदिवासी इलाकों में महतो की इतनी अच्छी पकड़ है कि 2016 विधानसभा चुनाव में जेल में रहते हुए महतो ने टीएमसी को यहां से जीत दिला दी थी। बता दें कि महतो ममता बनर्जी के कोर समिति के सदस्य भी हैं। महतो को पहले भी गिरफ्तार किया गया था लेकिन जेल से छूटने के बाद उन्हें टीएमसी ने अपनी पार्टी में शामिल कर लिया।
पिछले साल छत्रधर महतो ने माओवादी पार्टी का दामन छो़ड़कर तृणमूल कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया था। बता दें कि लालगढ़ आंदोलन के दौरान ममता बनर्जी ने नेता छत्रधर महतो के साथ मंच साझा किया था, उस वक्त ममता बनर्जी पर आरोप लगाया गया था कि वो माओवादियों का समर्थन ले रही हैं।
10 साल बाद पिछले साल जेल से छूटे थे महतो
छत्रधर महतो पिछले साल फरवरी में ही जेल से छूटे थे। 10 साल तक वो जेल में रहे। जेल से छूटने के बाद टीएमसी ने महतो को जिला समिति में शामिल कर लिया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एनआईए को भुवनेश्वर-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस अपहरण मामले की जांच करने का आदेश दिया था। 2009 में इस ट्रेन का अपहरण हुआ था और इसका आरोप पीसीएपीए पर लगाया गया था। जो माओवादी इस घटना में शामिल थे, वो महतो की रिहाई की मांग करते रहे।