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पश्चिम बंगाल चुनाव: भाजपा नेताओं का दावा- नंदीग्राम में उसके जाल में फंस गई हैं ममता!

Tue, 30 Mar 2021 07:08 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 30 Mar 2021 07:08 PM IST
सार

  • ममता बनर्जी के लगातार पांच दिन नंदीग्राम में रुकने को चुनावी दृष्टि से सही रणनीति नहीं मान रहे विशेषज्ञ,
  • दूसरे इलाकों में पार्टी को हो सकता है नुकसान      
  • चुनाव प्रचार के अंतिम दिन गृहमंत्री अमित शाह, ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी ने झोंकी ताकत

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west Bengal election 2021: Is TMC leader Mamata Banerjee has been trapped in BJP strategy in Nandigram, staying here past 4 days
चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी - फोटो : PTI

विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सबसे 'हॉट' सीट नंदीग्राम में मंगलवार को प्रचार का अंतिम दिन है। इसे देखते हुए तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी, गृहमंत्री अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी ने पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव प्रचार के  अंतिम दिन ममता बनर्जी और शुवेंदु अधिकारी दोनों ने ही अपनी-अपनी जीत के दावे किये, लेकिन जिस तरह से चुनाव के बेहद महत्वपूर्ण अंतिम पांच दिनों में ममता बनर्जी नंदीग्राम में आकर टिक गई हैं, इसे लेकर तरह-तरह के दावे किये जा रहे हैं।

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भाजपा ने अभी से यह दावा करना शुरू कर दिया है कि ममता बनर्जी को अपनी ही सीट जीतने का भरोसा नहीं है और यही कारण है कि वे इस सीट को छोड़कर कहीं और जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही हैं। तो क्या ममता बनर्जी नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी के सामने चुनाव मैदान में उतरकर भाजपा के जाल में फंस गईं?

ममता बनर्जी 28 मार्च को नंदीग्राम में अपने चुनाव प्रचार के लिए आकर डट गई हैं। उन्होंने कहा है कि वे यहां एक अप्रैल यानी मतदान होने के दिन तक रुकेंगी। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने अमर उजाला से कहा कि ममता बनर्जी का नंदीग्राम सीट पर केवल अपने चुनाव प्रचार के लिए लगातार पांच दिन रुकना इस बात का प्रमाण है कि यहां उन्हें अपनी हार का डर सता रहा है। वे यहां लगातार प्रचार कर अपनी सीट बचाने की अंतिम कोशिश कर रही हैं। किसी पार्टी के मुखिया पर पूरे प्रदेश में पार्टी के चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी होती है। पार्टी के सभी उम्मीदवारों के स्टार प्रचारक के रूप में उसे सबकी जीत तय करने की जिम्मेदारी होती है।

उससे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह केवल अपनी सीट बचाने के लिए पार्टी की पूरी ताकत झोंक देगा, क्योंकि ऐसा करने से बाकी दूसरी सीटों पर पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनकी सीट के साथ-साथ इस अहम चरण में 29 अन्य सीटों पर भी मतदान हो रहा है।  

भाजपा नेता के मुताबिक़, लेकिन ममता बनर्जी ने ऐसा ही किया है जिससे यह साफ़ संकेत जाता है कि दीदी को खुद अपनी ही सीट पर जीत का भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की भारी संख्या में सीटों पर भाजपा जीतेगी और सरकार बनाएगी।

दरअसल, चुनाव के पहले चरण में बंगाल की 30 सीटों पर लगभग 80 फीसदी तक वोट पड़े हैं। सामान्य तौर पर भारी मतदान को सत्ताधारी दल के खिलाफ माना जाता है। भाजपा का दावा है कि इस चुनावी उत्साह को देखकर ही ममता बनर्जी डर गई हैं और उन्हें अपनी ही सीट खोने तक का डर सता रहा है। अपनी सीट पर जीतने के लिए उन्हें जो कोशिश करनी पड़ रही है, उसे इसी का परिणाम माना जा साकता है।  

हालांकि, चुनाव के पहले ही चरण में 30 सीटों पर मतदान हो चुका है और दूसरे चरण की 30 सीटों पर चुनाव के बाद भी राज्य की 234 सीटों पर चुनाव प्रचार और मतदान होना शेष होगा। अपनी सीट की जिम्मेदारी से मुक्त होते ही ममता पूरे जोरशोर से प्रचार करेंगी और यह उनके लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

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62 हजार मुस्लिम मतदाता निभायेंगे अहम भूमिका

पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी को एक लाख 34 हजार 623 वोट मिले थे। उन्होंने अपनी नजदीकी उम्मीदवार अब्दुल कादिर शेख को 81 हजार से अधिक वोटों से हराया था।  

लेकिन यह ध्यान देने वाली बात है कि इस सीट पर 62 हजार से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं। इस चुनाव में वहां तीनों ही प्रमुख दलों में से कोई भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं है। भाजपा के प्रति अल्पसंख्यक समुदाय में व्याप्त भावना को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि यह वोट ममता बनर्जी के साथ जा सकता है। 62 हजार वोटों की यह लीड एक ममता बनर्जी को एक बड़ी जीत हासिल करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

हालांकि, नंदीग्राम में ममता बनर्जी के दाहिने हाथ रहे शुभेंदु अधिकारी इस जमीन पर बेहद लोकप्रिय नेता माने जाते हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि ममता बनर्जी को मिली भारी जीत के शिल्पकार शुवेंदु अधिकारी ही थे। राजनीतिक पृष्ठभूमि के रहे शुभेंदु अधिकारी इस जमीन पर ममता का खेल बिगाड़ सकते हैं, क्योंकि यहां के मतदाताओं से उनका लंबा सीधा रिश्ता रहा है, जिसका लाभ उन्हें चुनाव के दौरान मिल सकता है।

चार जिलों की 30 सीटों पर होगा मतदान

पश्चिम बंगाल विधानसभा के दूसरे चरण में एक अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। इसमें पूर्वी मिदनापुर, पश्चिमी मिदनापुर, बांकुरा और दक्षिण 24 परगना जिलों की 30 सीटें शामिल हैं। ये इलाके कभी वामपंथी दलों की रीढ़ की ताकत हुआ करते थे, जो बदलते समय में तृणमूल कांग्रेस की जमीन बन गये हैं। इसके बाद भी नंदीग्राम की सीट से शुवेंदु अधिकारी के भाजपा उम्मीदवार बनने से तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी की राह में मुश्किलें खाड़ी हो गई हैं। सुवेंदु अधिकारी को यहां से पिछले चुनाव में 81 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल हुई थी।

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