पश्चिम बंगाल: भवानीपुर उप-चुनाव में प्रचार के आखिरी दिन भाजपा करेगी शक्ति प्रदर्शन, 80 नेता करेंगे कैपेनिंग
भवानीपुर विधानसभा सीट पर 30 सितंबर को उपचुनाव होने हैं। इससे पहले सोमवार को प्रचार के आखिरी दिन भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के 8 वार्डों में भाजपा व्यापक अभियान चलाएंगी। इस दौरान भाजपा के 80 नेता 80 वार्डों में प्रचार करेंगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल में भवानीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उप-चुनाव के लिए भाजपा ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। 30 सितंबर को इस सीट पर उपचुनाव होने हैं। इससे पहले सोमवार को प्रचार के आखिरी दिन भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के 8 वार्डों में भाजपा व्यापक अभियान चलाएंगी। इस दौरान भाजपा के 80 नेता 80 वार्डों में प्रचार करेंगे। बता दें कि पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी, राज्य भाजपा प्रमुख सुकांत मजूमदार, पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष, देबाश्री चौधरी, अर्जुन सिंह और स्वप्न दासगुप्ता उन नेताओं में शामिल हैं, जो भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के प्रचार में भाग लेंगे।
भाजपा से पहले अभिषेक ने खोला मोर्चा
इससे पहले टीएमसी के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को भी जमकर कोसा। उन्होंने उन्होंने ममता बनर्जी को विदेश दौरे की अनुमति नहीं के लिए भी भाजपा को खरीखोटी सुनाई। उन्होंने भवानीपुर में आयोजित एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश की हालत देखिए। वहां पर भाजपा तालिबान स्टाइल में शासन चला रही है। लोगों को आजादी नहीं है। योगी आदित्यनाथ ही सबकुछ तय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ममता को विश्व शांति से जुड़ी मीटिंग के लिए बुलाया गया था, लेकिन केंद्र सरकार ने उन्हें जाने की इजाजत नहीं दी। केंद्र सरकार ने ममता को इसलिए नहीं जाने दिया क्योंकि वह मोदी से ज्यादा मशहूर हैं।
सुवेंदु अधिकारी ने किया बनर्जी पर पलटवार
वहीं, सुवेंदु अधिकारी ने पलटवार करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी को 2024 का इंतजार करना चाहिए। 2019 के लोकसभा चुनावों में ममता बनर्जी को 'यूनाइटेड इंडिया' के चेहरे के रूप में पेश करने का नतीजा सभी जानते हैं। पीएम मोदी के साथ किसी भी राजनीतिक नेता की तुलना नहीं की जा सकती। उन्हें अन्य राज्यों में नोटा से कम वोट मिलेंगे।