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सूखाः एक गांव में 70 कुएं, चार महीने में 65 सूखे

Fri, 15 Apr 2016 02:55 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 15 Apr 2016 02:55 PM IST
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west bengal: 70 well in a village, 65 were dry
सूखी नदी से पानी भरती महिलाएं - फोटो : indian express

सूखे से जूझते भारत के दस राज्यों में हालात दिनप्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं, पश्चिम बंगाल के एक गांव में भी ऐसा ही वाक्या सामने आया है। जहां गांव के 70 कुंओं में से 65 कुएं मात्र चार महीनों में सूख गए।  

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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार वाक्या दार्जिलिंग जिले के मातीगारा-नक्सलबाडी विधानसभा के ताराबारी गांव का है। जहां गांव में चार महीने पहले तक काफी मात्रा में कुएं पानी से लबालब होते थे। लेकिन सूखे की ‌स्थिति के चलते एक के बाद एक सभी कुएं सूखने लगे। 
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आलम ये है कि 70 कुओं वाले इस गांव में मात्र पांच कुओं में ही पानी रहता है। ग्रामीण कहते हैं कि राजनेता केवल सूखे वादे ही देते हैं और कुछ नहीं। ग्रामीण फिलहाल पानी के लिए रेतीली नदी के भरोसे हैं।

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पानी के लिए नजदीकी नदी पर निर्भर हुए लोग

west bengal: 70 well in a village, 65 were dry

गांव की रहने वाली फुलेश्वरी देवी (55) दिनभर में नदी से पानी लाने के लिए पांच से छह चक्कर लगाती हैं। वो बताती हैं कि हम घर में पांच सदस्य हैं और हमें दिनभर में कम से कम सात बाल्टी पानी की जरूरत होती है। मेरी बहू को बच्चा होने वाला है इसलिए मैं उसे ज्यादा काम नहीं करने देती और उसके हिस्से का पानी भी खुद लाती हूं। फुलेश्वरी दिनभर नदी से रेत और कंकड चुगकर उन्हें ठेकेदार को 150 रुपये में बेचती हैं, इससे ही उनके घर का खर्चा चलता है।

गांव की ही रहने वाली 31 साल की सुषमा सिंगा बताती हैं कि पहले वह हर सुबह नदी पर नहाने के लिए जाती थी और वहीं अपने कपड़े धोकर खाना बनाने का पानी भी ले आती थी, लेकिन अब इस काम के लि मुझे 3-4 चक्कर अतिरिक्त लगाने पड़ते हैं। 

हर मानसून में जब नदी से गंदा पानी निकलकर कुंओं तक आ जाता है तो उन्हे पानी के लिए दूसरे स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। गांव में ही बढ़ई का काम करने वाले जॉयदीप राय बताते हैं कि उन दिनों में या तो पानी हमें खरीदना पड़ता है या दूसरे गांवों से लाना पड़ता है। 

नदी से कंकर पत्‍थर जुगकर गुजारा करते हैं लोग

west bengal: 70 well in a village, 65 were dry

गांव की आबादी 4 हजार से ज्यादा है, यहां अधिकतर राजबांसी समाज के लोग ही रहते हैं और पानी के लिए उनका जीवन कुंओं के बाद नदी पर ही निर्भर रहना पड़ता है। ज्यादातर ग्रामीण रोजाना मजदूरी करने वाले लोग हैं, जो ठेकेदार के लिए नदी से कंकड और पत्‍थर इकट्ठा करते हैं। 

अथहरोकाही ग्राम पंचायत के प्रधान असित नंदी कहते हैं कि उसकी पार्टी सीपीएम ने उनके लिए वो सबकुछ किया जो कर सकते हैं। नंदी के अनुसार हमारे पास जो थोड़ा पैसा होता है उससे हमने गांव के 50 कुओं की मरम्मत करवा दी है। नंदी कहते हैं कि स्‍थानीय कांग्रेस विधायक ने इस मामले में कुछ रूचि दिखाई है। 

वहीं शैफाली सिंगा प्रधान के दावे का विरोध करते हुए कहती हैं, कि उन्होंने बस कुछ ही कुंओं की मरम्मत करवाई है। ज्यादा से ज्यादा 10-15, लेकिन वह कुछ हफ्तों बाद फिर सूख गए।  

वहीं क्षेत्र के कांग्रेस विधायक शंकर मलाकार कहते हैं कि, इसके लिए फंड आवंटित कर‌ दिया गया है, लेकिन काम तो ग्राम पंचायत को ही कराना होगा। 

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