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West Asia Crisis: पश्चिम एशिया संकट को लेकर ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की होगी बैठक, राजनाथ सिंह करेंगे अध्यक्षता
Sat, 18 Apr 2026 03:41 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 18 Apr 2026 03:41 PM IST
सार
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार जरूरी वस्तुओं की सप्लाई सुनिश्चित करने में जुटी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज मंत्रियों के समूह के साथ बैठक कर पेट्रोल, डीजल और खाद की उपलब्धता की समीक्षा करेंगे। सरकार का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखना है।
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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : IANS
विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने मंत्रियों का एक विशेष समूह (जीओएम) गठित किया है। इस समूह की एक अहम बैठक आज फिर आयोजित की जाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार शाम चार बजे इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के ताजा हालातों और भारत पर पड़ने वाले इसके प्रभावों पर चर्चा होगी। बैठक में एलपीजी सप्लाई, पेट्रोल डीजल, फर्टिलाइजर्स आदि की सप्लाई को लेकर समीक्षा की जाएगी।
इससे पहले 8 अप्रैल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में इस समूह की तीसरी बैठक हुई थी। उस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर, रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। उस दौरान रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि सरकार देश के भीतर जरूरी सामानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने विशेष रूप से रसोई गैस, ईंधन और किसानों के लिए खाद की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने पर जोर दिया था।
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सरकार का प्रयास है कि देशभर में जरूरी सामानों की सप्लाई सुचारु रहे ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। रक्षा मंत्री ने यह भी बताया था कि सरकार किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को पहले से ही मजबूत कर रही है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लगातार निगरानी रखना और समय पर सही निर्णय लेना बहुत आवश्यक हो गया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के प्रभाव से देशवासियों को सुरक्षित रखने के लिए हर स्तर पर तालमेल बिठाकर काम कर रही है।
इस समूह की दूसरी बैठक दो अप्रैल को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में हुई थी। उस बैठक में भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहन मंथन हुआ था और खतरों को कम करने की रणनीति बनाई गई थी। रक्षा मंत्री ने तब कहा था कि भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके लिए 24 घंटे निगरानी रखना और सोच-समझकर प्रतिक्रिया देना जरूरी है। सरकार का लक्ष्य है कि देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति पर कोई बुरा असर न पड़े। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
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इससे पहले 8 अप्रैल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में इस समूह की तीसरी बैठक हुई थी। उस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर, रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। उस दौरान रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि सरकार देश के भीतर जरूरी सामानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने विशेष रूप से रसोई गैस, ईंधन और किसानों के लिए खाद की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने पर जोर दिया था।
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सरकार का प्रयास है कि देशभर में जरूरी सामानों की सप्लाई सुचारु रहे ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। रक्षा मंत्री ने यह भी बताया था कि सरकार किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को पहले से ही मजबूत कर रही है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लगातार निगरानी रखना और समय पर सही निर्णय लेना बहुत आवश्यक हो गया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के प्रभाव से देशवासियों को सुरक्षित रखने के लिए हर स्तर पर तालमेल बिठाकर काम कर रही है।
इस समूह की दूसरी बैठक दो अप्रैल को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में हुई थी। उस बैठक में भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहन मंथन हुआ था और खतरों को कम करने की रणनीति बनाई गई थी। रक्षा मंत्री ने तब कहा था कि भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके लिए 24 घंटे निगरानी रखना और सोच-समझकर प्रतिक्रिया देना जरूरी है। सरकार का लक्ष्य है कि देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति पर कोई बुरा असर न पड़े। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
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