{"_id":"5c15dfabbdec2253df005b4c","slug":"we-cant-even-prepare-a-proper-english-draft-said-subramanian-swamy-on-rafale-verdict","type":"story","status":"publish","title_hn":"राफेल विवाद: कांग्रेस नेता ने पीएम पर साधा निशाना, कहा- \"सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करते हैं\"","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
राफेल विवाद: कांग्रेस नेता ने पीएम पर साधा निशाना, कहा- "सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करते हैं"
Sun, 16 Dec 2018 10:46 AM IST
Shilpa Thakur
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shilpa Thakur
Updated Sun, 16 Dec 2018 10:46 AM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
विज्ञापन
विज्ञापन
कांग्रेस नेता पी तिवारी
- फोटो : ANI
राफेल विवाद में पैरा 25 में गलती के बाद केंद्र सराकर संशोधन के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची और कांग्रेस ने भी सरकार को इस मामले में घेरा। अब इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है।
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी का कहना है, "जिस तरह पीएम गुमराह करते हैं मेरे दिमाग में एक नया नाम इनके लिए आया है। इनका नाम मिस्टर गुमराह है। सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करते हैं, देश को गुमराह करते हैं, किसान को गुमराह करते हैं, नौजवान को गुमराह करते हैं, गुमराही के अलावा देश को मोदी जी से कुछ नहीं मिला।" पी तिवारी ने आगे कहा, "कोच फैक्ट्री की स्थापना तो सोनिया जी ने की थी, जिस सड़क का उद्घाटन किया, वह भी यूपीए और सोनिया जी की देन है। कब तक उधार के सिंदूर से काम चलाएंगे। अपने कार्यों का उद्धाटन कब करेंगे।"
P Tiwari: Jis tarah PM gumrah karte hain mere dimag mein ek naya naam inke liye aaya hai. Inka naam Mr Gumrah hai. SC ko gumrah karte hain, desh ko gumrah karte hain, kisan ko gumrah karte hain, naujawan ko gumrah karte hain, gumrahi ke alawa desh ko Modi ji se kuch nahi mila. pic.twitter.com/Ya7Ya1zLso
— ANI (@ANI) December 16, 2018
वहीं भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है, ''मीडिया के अनुसार, अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि उन्होंने ऐफिडेविट तैयार नहीं किया है। किसने ऐफिडेविट तैयार किया? मुझे लगता है कि पीएम को ये पता करना चाहिए। यह उन्हें शर्मिंदा करता है कि क्या हम अंग्रेजी में शुद्ध ड्राफ्ट भी तैयार नहीं कर सकते। इसे हिंदी में तैयार किया जा सकता था।" उन्होंने आगे कहा, "राफेल मामले पर सीएजी की रिपोर्ट पीएसी के समक्ष रखे जाने का दावा करके सरकार संसद के दोनों सदनों के विशेषाधिकार का हनन करने की दोषी है।"
सीताराम येचुरी ने लगाया आरोप, कहा- सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी गलत जानकारी
सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी का कहना है, "अब ये साफ हो गया है कि सरकार ने वास्तव में सुप्रीम कोर्ट को गलत जानकारी दी थी और उन्होंने उसके आधार पर फैसला सुनाया। इसे संसद में जाना चाहिए था लेकिन बजाय इसके न्यायापालिका के पास गया। यह संवैधानिक संस्थानों का उल्लंघन है। केवल अटॉर्नी जनरल ही इसका जवाब दे सकते हैं। उन्हें संसद द्वारा बुलाया जाना चाहिए।"
वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनन्द शर्मा ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट राफेल मामले की जांच का सही फोरम नहीं है। JPC ही न्याय कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया है। सुप्रीम कोर्ट को अपना निर्णय वापस लेकर सरकार को कोर्ट के अपमान पर नोटिस देने चाहिए। सीएजी और पीएसी के बारे में गलत जानकारी दी। सीएजी की कोई रिपोर्ट नहीं आई और पीएसी को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।"
राजेडी नेता मनोज झा ने की विशेषाधिकार प्रस्ताव की मांग
जानकारी के मुताबिक आरजेडी सांसद मनोज झा अटॉर्नी जनरल के खिलाफ राज्यसभा में विशेषाधिकार प्रस्ताव लेकर आएंगे।बता दें केंद्र ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर शीर्ष न्यायालय के फैसले में उस पैराग्राफ में संशोधन की मांग की है जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के बारे में संदर्भ है।
केंद्र सरकार द्वारा शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में दखिल आवेदन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैरा 25 में गलती हुई है। केंद्र ने कहा कि राफेल की कीमत को लेकर हमने सीलबंद लिफाफे में जो जानकारी दी थी, उसमें केवल सीएजी की रिपोर्ट को पीएसी के पास भेजने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया था। हमने ये बिल्कुल नहीं कहा था कि सीएजी की रिपोर्ट पीएसी के साथ साझा की गई थी और रिपोर्ट को संसद में रखा गया था। हमने केवल प्रक्रिया की जानकारी दी थी। लेकिन अदालत को इसे समझने में गलती हुई है।
अदालत ने फैसले में is (है) को has been (हो चुका) समझ कर लिख दिया है। इसी के कारण सरकार के बयान का गलत मतलब निकाला जा रहा है। जिसकी वजह से विवाद उत्पन्न हो गया है। तो ऐसे में इस पैराग्राफ में बदलाव की आवश्यकता है। ऐसे में इस पैराग्राफ में बदलाव किया जाए और अगर आवश्यक हो तो इसके लिए आगे आदेश भी दिया जाए, ताकि विवाद को रोका जा सके। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इस मामले को जल्द से जल्द देखने को कहा है।