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India Pakistan Tension: पाकिस्तान को प्रॉक्सी बनाकर भारत के साथ 'शैडो बॉक्सिंग' कर रहा था चीन?

Thu, 22 May 2025 04:41 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Thu, 22 May 2025 04:41 PM IST
सार

अमेरिका जैसे दुनिया के देशों ने ऑपरेशन सिंदूर के बहाने चीन को पढ़ना शुरू कर दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि चीन ने पाकिस्तान के कंधे पर बंदूक रखकर भारत पर निशाना साधा है। आइए समझते हैं चीन की पूरी क्रोनोलॉजी...। 

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Was China doing 'shadow boxing' with India by making Pakistan a proxy?
चीन ने पाकिस्तान को बनाया प्रॉक्सी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ, लेकिन इसे लेकर सवाल उठने शुरू हो रहे हैं। अमेरिका जैसे दुनिया के देशों ने ऑपरेशन सिंदूर के बहाने चीन को पढ़ना शुरू कर दिया है। इसमें एक तरफ जहां चीन के मिलिट्री हार्डवेयर को पढ़ने का सिलसिला जारी है, वहीं चीन की मंशा भी सवालों के घेरे में है। भारतीय रणनीतिकार भी चीन के एनएसए और विदेश मंत्री वांग यी की मंशा खंगालने में जुटे हैं। पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि अच्छा हुआ, कलई अभी खुल गई।
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भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल सिन्हा कहते हैं कि पाकिस्तान पहली बार प्रॉक्सी तो बना नहीं है। उसे प्रॉक्सी गेम की आदत पड़ी हुई है। पहले अमेरिका के साथ पाकिस्तान अपनी जरूरतें पूरी कर रहा था। अब उसे चीन से हथियार, रक्षा सामग्री मिल रही है।
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चीन तो चाहता था संघर्ष चले...
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि चीन की मंशा ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच में शुरू हुए संघर्ष के जारी रहने की थी। उसे अमेरिका के दबाव में संघर्ष विराम रास नहीं आया। रंजीत कुमार कहते हैं कि आखिर चीन ऐसा क्यों चाह रहा था? वायुसेना के पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि चीन की मंशा पाकिस्तान को शह देकर भारत की सैन्य क्षमता, युद्धक रणनीति, सूचना तंत्र, कौशल और फॉयर पॉवर को परखने की थी। एक सामरिक विशेषज्ञ नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि पहले भारत और पाकिस्तान संघर्ष विराम पर सहमत हुए। 10 मई को भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी घोषणा कर दी। लेकिन पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया और सीमा पार के ड्रोन भारतीय क्षेत्र तक आए।
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देर शाम विक्रम मिस्री को यह बताने और पाकिस्तान से संघर्ष विराम की गंभीरता समझने की अपील करने के लिए आगे बढ़ना। इसके ठीक बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके चीन के समकक्ष वांग यी ने बात की। तब जाकर संघर्ष विराम अमल में आ सका। सूत्र का कहना है कि संघर्ष विराम की भारत की पहली घोषणा चीन को हजम नहीं हुई थी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से बात की थी। चीन की नाराजगी इसमें सामने आई। लेकिन डोभाल और वांग यी में सहमति के बाद संघर्ष विराम अमल में आया। पूर्व अधिकारी का कहना है कि चीन ने इसके बाद स्थायी संघर्ष विराम करवाने की मंशा भी जताई है। इससे स्पष्ट है कि पाकिस्तान चीन का प्रॉक्सी बनकर भारत के साथ लड़ रहा था।

एशिया में अमेरिकी प्रभाव काबू में करना चाहता है चीन
एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि चीन ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। वह बांग्लादेश और पाकिस्तान में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। पाकिस्तान को पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान और अन्य हथियार देने जा रहा है। बांग्लादेश दो पनडुब्बी दे चुका है, चार और देने की प्रक्रिया में है। उसने पहली बार भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम में अपनी टांग अड़ाई है। यह क्षेत्रीय मामले में सीधे अमेरिका के लिए संदेश है। अमित मिश्रा कहते हैं कि 10 मई को विदेश मत्री वांग यी की टिप्पणी ही देख लीजिए। इसमें उन्होंने चीन के साथ पाकिस्तान के खड़े होने की जानकारी दी है। वांग यी इस बहाने बताना चाहते हैं कि चीन पाकिस्तान के साथ अपने हितों को लेकर भी चिंतित है। दिलचस्प है कि यह सब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 10 मई को दिए बयान के बाद आया है।

दुनिया पढ़ रही है चीन की मंशा
रंजीत कुमार कहते हैं कि इस समय दुनिया चीन को पढ़ने में लगी हुई है। चीन के सैन्य साजो-सामान पहली बार दो देशों की लड़ाई में सामने आए हैं। युद्ध जैसी स्थिति में प्रयोग हुए हैं। चीन की प्रतिरक्षा प्रणाली को भारतीय सैन्य हमले में क्षतिग्रस्त कर दिया। पहली बार उसकी मिसाइल, लड़ाकू विमान जंग में शामिल हुए। इसलिए यूरोप, अमेरिका समेत सभी की नजर है। एनबी सिंह कहते हैं कि दुनिया की फॉयर पॉवर लाइब्रेरी में चीन की मिसाइल, उसके हथियार नहीं हैं। उसके राडार, प्रतिरक्षा प्रणाली की क्षमता आदि नहीं है। दूसरे ऑपरेशन सिंदूर की तीन दिन की लड़ाई ने भी वॉर फेयर की दुनिया में काफी संदेश दिया है।  हथियारों के बाजार में भी एक खलबली है। सब इसे जानना चाहते हैं।


भारत ने भी लिया है सबक
6,7,8,9 और 10 मई से भारत ने भी बहुत कुछ सीखा है। हमारे सामरिक और रणनीतिक विशेषज्ञ भावी चुनौतियों को परखकर नई तैयारी में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि भारतीय रणनीतिकार सैन्य बलों के आधुनिकीकरण, रक्षा क्षेत्र में विशेष तैयारियों तथा फायर पॉवर के क्षेत्र में रणनीतिक परिवर्तन को लेकर गंभीर हैं। इसमें अधिक दूरी तक की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, प्रतिरक्षा प्रणाली, उन्नत तकनीक के रडार, फाइटर जेट को और अधिक उन्नत बनाने की प्रक्रिया तथा हेलीकाप्टर वॉरफेयर को अधिक मारक बनाने के प्रयास हो सकते हैं। ताकि देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता और इसकी सार्वभौमिकता को दृढ़ आयाम दिया जा सके।
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