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वक्फ संशोधन विधेयक ईद के बाद: इसी सत्र में पारित कराने की जल्दबाजी नहीं, TDP-LJP सरकार के साथ, विपक्ष भी एकजुट

Tue, 18 Mar 2025 05:47 AM IST
Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Tue, 18 Mar 2025 05:47 AM IST
सार

संसद के बजट सत्र में वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर खूब हंगामा हो रहा है। इसी बीच सरकारी सूत्रों ने कहा है कि इस पर ईद के बाद विचार किया जाएगा। विधेयक को इसी सत्र में पारित कराने की जल्दबाजी नहीं है। टीडीपी, लोजपा जैसे दल सरकार के साथ हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष भी एकजुट है।

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Waqf Amendment Bill in parliament No hurry to pass in this budget session Opposition united TDP-LJP with govt
Waqf Board - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुस्लिम संगठनों व विपक्ष के विरोध के बावजूद सरकार वक्फ संशोधन विधेयक पर कदम पीछे नहीं हटाएगी। विधेयक पेश करने के पहले सरकार संसद के दोनों सदनों में संख्या बल को साधने में जुटी है। सरकार को सबसे प्रमुख सहयोगी टीडीपी और लोजपा-आर को साधने में सफलता मिली है, जबकि जदयू समेत अन्य दलों को साधने के लिए बातचीत जारी है।
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सरकार की योजना ईद के बाद बजट सत्र के दूसरे चरण के अंतिम सप्ताह में इस विधेयक को संसद में पेश करने की है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि विधेयक के प्रावधानों पर टीडीपी और लोजपा-आर सहमत और समर्थन के लिए राजी हैं। जदयू समेत दूसरे दलों से इस महीने के अंत तक बातचीत की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। सूत्र ने यह भी कहा कि विधेयक को इसी सत्र में पारित कराने के लिए सरकार जल्दबाजी में नहीं है। वह चाहती है कि इसी सत्र में विधेयक को कम से कम लोकसभा में पेश कर चर्चा करा ली जाए। यदि संभव हुआ तो विधेयक को इसी सत्र में लोकसभा से पारित भी करा लिया जाए।
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सरकार के पास तीन दिन का समय
अगर ईद 31 मार्च हो हुई तो सरकार के पास चार अप्रैल तक चलने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में चार दिन का समय होगा। हालांकि, इसके इतर अगर ईद एक अप्रैल को हुई तो सरकार के पास महज तीन दिन बचेंगे। सरकार चाहती है कि विधेयक पर विस्तृत चर्चा हो, ताकि उसे लाने के संबंध में सरकार के उद्येश्य का व्यापक प्रचार-प्रसार हो। ऐसे में संभव है कि विधेयक को कानूनी जामा पहनने के लिए मानसून सत्र का इंतजार करना पड़े।

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विपक्ष एकजुट, मगर संख्या बल सरकार के साथ
अगर भाजपा सहयोगी दलों को साधे रख पाई तो विधेयक को कानूनी जामा पहनाने में उसे अधिक मशक्कत नहीं करनी होगी। लोकसभा में भाजपा के पास सहयोगियों की बदौलत जरूरी बहुमत हासिल है। राज्यसभा में राजग बहुमत के करीब है। शिवसेना जैसे हिंदूवादी दल का अगर सरकार को साथ मिला तो यहां भी विधेयक को पारित कराने में उसके सामने कोई बड़ी मुश्किल नहीं होगी।

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