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फ्लीट सपोर्ट शिप-1 का शुभारंभ: राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम में नौसेना को सौंपेंगे एफएसएस-1, बढ़ रही स्वदेशी ताकत
Tue, 06 Oct 2026 02:38 AM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, विशाखापत्तनम
पीटीआई, विशाखापत्तनम
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 06 Oct 2026 02:38 AM IST
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राजनाथ सिंह
- फोटो : एक्स/राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को यहां हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में बेड़ा सहायता जहाज-1 (फ्लीट सपोर्ट शिप-1) का जलावतरण करेंगे। वह बेड़ा सहायता जहाज-5 की आधारशिला भी रखेंगे। इसके साथ ही वह उन्नत स्लिपवे-4 और 300 टन की गोलियथ क्रेन का उद्घाटन भी करेंगे।
जहाज बनाने की क्षमता में कितना बढ़ेगा इजाफा?
प्रेस सूचना ब्यूरो ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि ये कार्यक्रम भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का प्रदर्शन हैं। उन्नत स्लिपवे-4 की लंबाई बढ़ाई गई है। इसकी भार उठाने की क्षमता भी बढ़ाई गई है। इसके साथ 300 टन की गोलियथ क्रेन भी लगाई गई है।
इससे शिपयार्ड 45 हजार डेडवेट टन तक के जहाज बना और उन्हें पानी में उतार सकेगा। बयान में कहा गया कि इससे शिपयार्ड की क्षमता में बड़ा विस्तार होगा। अब वह बड़े और जटिल समुद्री प्लेटफॉर्म बनाने का काम कर सकेगा।
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फ्लीट सपोर्ट शिप-1 कब समुद्र में उतरेगा?
बयान के अनुसार, फ्लीट सपोर्ट शिप-1 भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे पांच बेड़ा सहायता जहाजों में पहला है। स्टील काटने का काम शुरू होने के केवल 18 महीने बाद यह बंगाल की खाड़ी में उतरेगा।
बयान में कहा गया कि 43,500 टन वजन वाले ये जहाज समुद्र में नौसेना के युद्धपोतों को जरूरी सामान और ईंधन उपलब्ध कराएंगे। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की लंबे समय तक काम करने की क्षमता और पहुंच बढ़ेगी।
फ्लीट सपोर्ट शिप--5 की आधारशिला रखे जाने के साथ इस परियोजना के तहत लगातार जहाज बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत मिलेगा। कार्यक्रमों में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार के शामिल होने की उम्मीद है।
नौसैनिकों के साथ बाराखाना में शामिल हुए राजनाथ
कार्यक्रम से पहले राजनाथ सिंह सोमवार शाम विशाखापत्तनम में पूर्वी नौसेना कमान की ओर से आयोजित बाराखाना में शामिल हुए। उन्होंने भारतीय नौसेना के जवानों और उनके परिवारों से बातचीत भी की। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि राजनाथ सिंह ने देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए नौसैनिकों की लगातार प्रतिबद्धता की सराहना की।
उन्होंने उनके परिवारों के योगदान और बलिदान को भी माना। उन्होंने कहा कि परिवारों के सहयोग से नौसैनिक पूरी लगन और प्रतिबद्धता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा पाते हैं।
हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना कितनी मजबूत हुई?
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना एक शक्तिशाली समुद्री ताकत के रूप में उभरी है। उन्होंने कहा कि देश के सामने आने वाली चुनौतियों का निर्णायक तरीके से जवाब देने की नौसेना की क्षमता साबित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौसेना की क्षमताओं को पहचान मिली है।
उन्होंने नौसेना के जवानों की भी सराहना की। कहा कि वे हर मौसम और हर तरह की अभियान संबंधी स्थिति में मजबूती से डटे रहते हैं। वे भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। साथ ही तिरंगे को ऊंचा रख रहे हैं।
1971 के युद्ध में ऑपरेशन ट्राइडेंट की भूमिका क्या थी?
रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना के गौरवशाली बहादुरी के इतिहास को याद किया। उन्होंने 1971 के युद्ध में नौसेना की निर्णायक भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने खास तौर पर ऑपरेशन ट्राइडेंट का जिक्र किया। इस अभियान के दौरान भारतीय नौसेना ने कराची बंदरगाह पर हमला किया था।
राजनाथ सिंह ने कहा कि इस अभियान ने दिखाया कि नौसेना केवल भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने में ही सक्षम नहीं है। जरूरत पड़ने पर वह अपनी ताकत का प्रदर्शन भी कर सकती है। साथ ही दुश्मन के खिलाफ आक्रामक अभियान भी चला सकती है। उन्होंने उन नौसैनिकों को भी श्रद्धांजलि दी, जिनका साहस और बलिदान आज भी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता है।
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जहाज बनाने की क्षमता में कितना बढ़ेगा इजाफा?
प्रेस सूचना ब्यूरो ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि ये कार्यक्रम भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का प्रदर्शन हैं। उन्नत स्लिपवे-4 की लंबाई बढ़ाई गई है। इसकी भार उठाने की क्षमता भी बढ़ाई गई है। इसके साथ 300 टन की गोलियथ क्रेन भी लगाई गई है।
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इससे शिपयार्ड 45 हजार डेडवेट टन तक के जहाज बना और उन्हें पानी में उतार सकेगा। बयान में कहा गया कि इससे शिपयार्ड की क्षमता में बड़ा विस्तार होगा। अब वह बड़े और जटिल समुद्री प्लेटफॉर्म बनाने का काम कर सकेगा।
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फ्लीट सपोर्ट शिप-1 कब समुद्र में उतरेगा?
बयान के अनुसार, फ्लीट सपोर्ट शिप-1 भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे पांच बेड़ा सहायता जहाजों में पहला है। स्टील काटने का काम शुरू होने के केवल 18 महीने बाद यह बंगाल की खाड़ी में उतरेगा।
बयान में कहा गया कि 43,500 टन वजन वाले ये जहाज समुद्र में नौसेना के युद्धपोतों को जरूरी सामान और ईंधन उपलब्ध कराएंगे। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की लंबे समय तक काम करने की क्षमता और पहुंच बढ़ेगी।
फ्लीट सपोर्ट शिप--5 की आधारशिला रखे जाने के साथ इस परियोजना के तहत लगातार जहाज बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत मिलेगा। कार्यक्रमों में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार के शामिल होने की उम्मीद है।
नौसैनिकों के साथ बाराखाना में शामिल हुए राजनाथ
कार्यक्रम से पहले राजनाथ सिंह सोमवार शाम विशाखापत्तनम में पूर्वी नौसेना कमान की ओर से आयोजित बाराखाना में शामिल हुए। उन्होंने भारतीय नौसेना के जवानों और उनके परिवारों से बातचीत भी की। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि राजनाथ सिंह ने देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए नौसैनिकों की लगातार प्रतिबद्धता की सराहना की।
उन्होंने उनके परिवारों के योगदान और बलिदान को भी माना। उन्होंने कहा कि परिवारों के सहयोग से नौसैनिक पूरी लगन और प्रतिबद्धता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा पाते हैं।
हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना कितनी मजबूत हुई?
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना एक शक्तिशाली समुद्री ताकत के रूप में उभरी है। उन्होंने कहा कि देश के सामने आने वाली चुनौतियों का निर्णायक तरीके से जवाब देने की नौसेना की क्षमता साबित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौसेना की क्षमताओं को पहचान मिली है।
उन्होंने नौसेना के जवानों की भी सराहना की। कहा कि वे हर मौसम और हर तरह की अभियान संबंधी स्थिति में मजबूती से डटे रहते हैं। वे भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। साथ ही तिरंगे को ऊंचा रख रहे हैं।
1971 के युद्ध में ऑपरेशन ट्राइडेंट की भूमिका क्या थी?
रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना के गौरवशाली बहादुरी के इतिहास को याद किया। उन्होंने 1971 के युद्ध में नौसेना की निर्णायक भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने खास तौर पर ऑपरेशन ट्राइडेंट का जिक्र किया। इस अभियान के दौरान भारतीय नौसेना ने कराची बंदरगाह पर हमला किया था।
राजनाथ सिंह ने कहा कि इस अभियान ने दिखाया कि नौसेना केवल भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने में ही सक्षम नहीं है। जरूरत पड़ने पर वह अपनी ताकत का प्रदर्शन भी कर सकती है। साथ ही दुश्मन के खिलाफ आक्रामक अभियान भी चला सकती है। उन्होंने उन नौसैनिकों को भी श्रद्धांजलि दी, जिनका साहस और बलिदान आज भी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता है।