फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने ऐसा क्या कहा कि ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा #MeTooUrbanNaxal
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यह सिलसिला पूरे दिन जारी रहा, लेकिन बॉलीवुड निर्देशक विवेक अग्निहोत्री के एक ट्वीट के बाद यह उन्माद शुरू हुआ। अग्निहोत्री उदारवादी और वामपंथी झुकाव रखने वाले बुद्धिजीवियों पर निशाना साधने के लिए जाने जाते हैं और उन्हें अक्सर शहरी नक्सली और माओवादियों का हमदर्द करार देते हैं।
अग्निहोत्री ने ट्विटर पर लिखा, "मुझे कुछ समझदार युवा लोग चाहिए जो उन सभी लोगों की सूची बना सकें जो #UrbanNaxals (शहरी नक्सलियों) का बचाव कर रहे हैं। देखते हैं यह सूची हमें कहां ले जाती है। यदि आप प्रतिबद्धता के साथ स्वयंसेवक बनना चाहते हैं, तो मुझे संदेश भेजें। अग्निहोत्री ने एक मीडिया समूह को टैग कर लिखा कि क्या वो यह सूची सबसे पहले बनाना चाहेंगे।"
I want some bright young people to make a list of all those who are defending #UrbanNaxals Let’s see where it leads. If you want to volunteer with commitment, pl DM me. @squintneon would you like to take the lead?
— Vivek Agnihotri (@vivekagnihotri) 28 August 2018
कई बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और वामपंथी उदारवादियों ने विवेक अग्निहोत्री के ट्वीट के खिलाफ हैशटैग #MeTooUrbanNaxal के साथ विरोध किया। इस हैशटैग के साथ इतने ट्वीट किए गए कि यह काफी समय तक भारत में ट्रेंडिंग सूची में दूसरे नंबर पर था।
ये हैं कुछ ट्वीट:
फेक न्यूज के बारे खास कवरेज करने वाले अल्ट न्यूज (Alt News) के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने लिखा, "विवेक मैं आपकी सूची में शामिल होने की पेशकश करता हूं। हमें विवेक अग्निहोत्री को टैग कर हैशटैग #MeTooUrbanNaxal के साथ ट्वीट करना चाहिए और उन्हें उनकी लिस्ट बनाने में मदद करनी चाहिए। हमें इस नेक काम में इनकी मदद करनी चाहिए।
Hey @vivekagnihotri, I volunteer to be on your list. Let's tag @vivekagnihotri with the hashtag #MeTooUrbanNaxal and help him build his list. We should all help this man in his noble endeavour. https://t.co/zY1Azarv8l
— Pratik Sinha (@free_thinker) 29 August 2018
If asking the questions, or standing up for humanity and freedom of speech makes me an urban Naxal... then I’m proud to be one #MeTooUrbanNaxal
— Archana Bhardwaj 🌈 (@archieroolz) 29 August 2018
I am pretty sure if Bhagat Singh was alive today, he would be on that list too.#MeTooUrbanNaxal @vivekagnihotri
— Akshay Gupta (@akshay_gupta01) 29 August 2018
Love the #MeTooUrbanNaxal trend. More power to resilience. More power to the good fight. ❤️
— Nazia Erum (@nazia_e) 29 August 2018
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी आरोपी 5 सितंबर तक अपने घर पर ही नजरबंद रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 6 सितंबर को होगी। इसके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज की ट्रांजिट रिमांड पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
गिरफ्तार किये गये पांच एक्टिविस्ट में से तीन को बीती देर रात पुणे ले जाया गया जिन्हें बुधवार को स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भीमा-कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में पांच कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही चार सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तेलगू के जाने-माने कवि वरवरा राव, कार्यकर्ता वेर्नन गोन्साल्विज और अरुण फरेरा को बीती देर रात पुणे लाया गया। माओवादियों से संबंधों के संदेह में गिरफ्तार किये गए अन्य दो लोगों में ट्रेड यूनियन से जुड़ी कार्यकर्ता और पेशे से वकील सुधा भारद्वाज और कार्यकर्ता गौतम नवलखा शामिल हैं। भारद्वाज को फरीदाबाद से तथा नवलखा को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था।
इन पांचों को पिछले साल दिसंबर में पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के संबंध में विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में दर्ज मुकदमे के संबंध में गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले पुलिस ने एल्गार परिषद के लिए माओवादियों को धन मुहैया करने में उनकी कथित भूमिका के लिए सुधीर धावले, सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत, शोमा सेन और रोना विल्सन के पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। धावले एल्गार परिषद के आयोजकों में थे।
शनिवारवडा में 31 दिसंबर को भीमा कोरेगांव लड़ाई के 200 साल पूरे होने के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। विश्रामबाग थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार कबीर कला मंच के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए थे जिसके कारण जिले के कोरेगांव भीमा में हिंसा हुई। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्हें यह साबित के लिए पुख्ता सबूत मिले हैं कि इस कार्यक्रम के लिए माओवादियों से धन लिया गया था।