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Visva Bharati: विश्व-भारती ने जमीन विवाद मामले में अमर्त्य सेन को लिखा पत्र, कहा- जमीन से तत्काल छोड़ें कब्जा

Fri, 27 Jan 2023 11:26 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Fri, 27 Jan 2023 11:26 PM IST
सार

पत्र में संकेत दिया गया है कि यदि सेन की ओर से अभी कदम नहीं उठाए गए तो विश्वविद्यालय कानून के तहत कार्रवाई करेगा। विश्वभारती के एक अधिकारी ने बताया कि पत्र को उनके शांति निकेतन निवास पर पहुंचा दिया गया है। 
 

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Visva-Bharati issues fresh letter to Amartya Sen on land issue
प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमृत्य सेन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

विश्व भारती विश्वविद्यालय की जमीन पर अनधिकृत कब्जे को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को तीन दिनों में दूसरा पत्र लिखा है। इसमें उनसे कहा गया है कि वे उस जमीन को विश्वविद्यालय को सौंप दें, जिस पर शांति निकेतन में कथित तौर पर उनका कब्जा था। वहीं दूसरी ओर अर्थशास्त्री अमृत्य सेन ने दावा किया था कि शांतिनिकेतन परिसर में उनके पास जो जमीन है, उनमें से अधिकांश को उनके पिता ने बाजार से खरीदा था, जबकि कुछ अन्य भूखंड पट्टे पर लिए गए थे।

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24 जनवरी के पत्र में लिखा है कि आपके पास 1.38 एकड़ भूमि का कब्जा है, जो आपके 1.25 एकड़ के कानूनी अधिकार से अधिक है। वहीं, 27 जनवरी को लिखे गए पत्र में कहा गया है 'जितनी जल्दी हो सके विश्वभारती को भूमि वापस कर दें क्योंकि भूमि के कानूनों को लागू करने से आपको और विश्वभारती को भी शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी, जिसे आप बहुत प्यार करते हैं।'
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इसके साथ ही पत्र में संकेत दिया गया है कि यदि सेन की ओर से अभी कदम नहीं उठाए गए तो विश्वविद्यालय कानून के तहत कार्रवाई करेगा। विश्वभारती के एक अधिकारी ने बताया कि पत्र को उनके शांति निकेतन निवास पर पहुंचा दिया गया है। 
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वहीं, विश्व भारती विश्वविद्यालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि इसके दर्जनों भूखंडों को निजी पार्टियों के पक्ष में गलत तरीके से नामांतरित किया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई अनधिकृत कब्जे वाले लोगों की सूची में नोबल पुरस्कार से सम्मानित और प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमर्त्य सेन का भी नाम शामिल है। 

1980 से 1990 के बीच तैयार किए गलत रिकॉर्ड
विश्व भारती संपदा कार्यालय के अनुसार ऐसे गलत रिकॉर्ड 1980 और 1990 के दशक में तैयार किए गए थे। इनमें से अधिकांश भूखंड शांति निकेतन के पुरवापल्ली इलाके में स्थित हैं, जिसे आश्रमवासियों (विश्व भारती की स्थापना के दौरान आश्रम स्कूल और इससे जुड़े परिवार) और प्रख्यात व्यक्ति के आवासीय हब के रूप में जाना जाता है।


विश्व भारती के कार्यालयों के दस्तावेजों को शिक्षा मंत्रालय को भी भेजा गया। इसके सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि विश्वविद्यालय की भूमि का अतिक्रमण 1990 के दशक के अंत में हुआ। प्रोफेसर सेन ने 2006 में 99 साल के पट्टे वाली भूमि को अपने नाम पर हस्तांतरित करने के लिए तत्कालीन कुलपति को पत्र लिखा था। इसके बाद कार्यकारी परिषद द्वारा निर्णय लेने के बाद ऐसा किया गया था, लेकिन अतिरिक्त भूमि विश्वविद्यालय को वापस नहीं की गई थी।

 

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