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VIP Security: जोखिम उठाकर गाड़ी की फ्रंट सीट पर क्यों बैठना चाहते हैं राजनेता, खतरनाक है यह 'मनमर्जी'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 29 Dec 2022 06:23 PM IST
सार

VIP Security: अधिकांश राजनेता, एक्सपोजर के चलते गाड़ी की आगे वाली सीट पर बैठते हैं। उनका यह कदम, सुरक्षा कर्मियों को असहज स्थिति में ला देता है। ऐसे में उनका सुरक्षा घेरा टूटने का जोखिम बना रहता है। कई बार सुरक्षा एजेंसियों के बीच पर्याप्त तालमेल नहीं दिखाई पड़ता। एसपीजी या जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के सबसे करीबी घेरे में विशेष दस्ता रहता है...

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VIP Security: Why politicians want to take risk and sit on the front seat of the car
VIP Security: PM Modi - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

VIP Security: 'भारत जोड़ो यात्रा' में राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सवाल खड़े किए, तो गुरुवार को भाजपा ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई। पार्टी ने कहा, राहुल गांधी ने 2020 से लेकर अब तक 113 बार सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया है। राहुल गांधी को सीआरपीएफ की जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है। वीवीआईपी सुरक्षा के जानकारों का कहना है कि बहुत से अति विशिष्ट व्यक्ति, जाने अनजाने में सुरक्षा नियमों की अवहेलना कर देते हैं। मसलन, सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति कहीं भी गाड़ी रोकने के लिए कह देते हैं। वे एकाएक गाड़ी से नीचे उतर जाते हैं। वीवीआईपी व्यक्ति गाड़ी की पिछली सीट पर बैठेगा, सुरक्षा से इस नियम का पालन करना बहुत जरूरी होता है, लेकिन एक्सपोजर के चलते अधिकांश वीवीआईपी गाड़ी की आगे वाली सीट पर ही बैठते हैं।

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जोखिम उठाने से नहीं चूकते वीवीआईपी

बुधवार को कांग्रेस पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली में कई जगहों पर राहुल गांधी की सुरक्षा में लापरवाही होने की बात कही थी। यात्रा के दौरान राहुल की सुरक्षा में छेड़छाड़ देखी गई है। राहुल गांधी को जेड प्लस सुरक्षा मिली है, इसके बावजूद दिल्ली में उनका सुरक्षा घेरा बनाए रखने में जिम्मेदार एजेंसियां नाकाम रही हैं। वीवीआईपी सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि तकरीबन हर श्रेणी की सुरक्षा में कई तरह के अनिवार्य नियम टूट जाते हैं। यहां तक, सैनिटाइज रूट भी खत्म हो जाता है। खास तौर पर रैलियां, प्रदर्शन, जनसंपर्क और लंबी यात्रा, ऐसे सभी आयोजनों में सुरक्षा को लेकर वीवीआईपी बड़ा जोखिम उठाने से नहीं चूकते।

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तब असहज स्थिति में आ जाते हैं सुरक्षा कर्मी

सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति, कहीं भी गाड़ी रोकने के लिए कह देते हैं। ये भी तो सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। लोगों से मिलने के लिए वे एकाएक गाड़ी से नीचे उतर जाते हैं। भीड़ के बीच चलने लगते हैं। सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति गाड़ी की पिछली सीट पर बैठेगा, इस नियम का पालन नहीं हो पाता। अधिकांश राजनेता, एक्सपोजर के चलते गाड़ी की आगे वाली सीट पर बैठते हैं। उनका यह कदम, सुरक्षा कर्मियों को असहज स्थिति में ला देता है। ऐसे में उनका सुरक्षा घेरा टूटने का जोखिम बना रहता है। कई बार सुरक्षा एजेंसियों के बीच पर्याप्त तालमेल नहीं दिखाई पड़ता। एसपीजी या जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के सबसे करीबी घेरे में विशेष दस्ता रहता है। कार्यक्रम स्थल के मुताबिक, सुरक्षा घेरा बढ़ाया जा सकता है।

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लोकल पुलिस को मिलती है यह जिम्मेदारी

एसपीजी में सामान्य तौर पर सुरक्षा घेरा कम से कम पांच स्तरीय होता है। सबसे निकट एसपीजी की 'सीपीटी' यानी क्लोज प्रोटेक्शन टीम होती है। उसके बाद एसपीजी की दूसरी टीम का नंबर आता है। तीसरे नंबर पर पैरा मिलिट्री और पुलिस के चुनींदा जवान रहते हैं। चौथी परत में दोबारा से पैरा मिलिट्री और पांचवें नंबर पर सिविल पुलिस आ जाती है। जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के मामले में कई तरह के उल्लंघन देखने को मिलते हैं। राजनीतिक कार्यक्रम में भीड़ रोकने की जिम्मेदारी, लोकल पुलिस को मिलती है। सीआरपीएफ या अन्य सुरक्षा दस्ता, वीवीआईपी व्यक्ति को घेरे रहता है। भीड़ को रोकना उनका काम नहीं होता।

ऐसी सोच कभी नहीं रखनी चाहिए

वीवीआईपी सुरक्षा के नियमों का पालन जितना सुरक्षा दस्ता करता है, उतना ही संबंधित व्यक्ति को करना होता है। ऐसा नहीं होता है कि सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति हर बात से फ्री हो जाता है। वह जब चाहे, जैसे चाहे किसी से मिल सकता है, सुरक्षा घेरे में किसी को बुला सकता है या खुद उससे बाहर निकल सकता है। उस व्यक्ति को ऐसी सोच कभी नहीं रखनी चाहिए। रैली या पदयात्रा के दौरान सुरक्षा कर्मियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है। बिना सुरक्षा दस्ते की अनुमति के किसी व्यक्ति को सुरक्षा घेरे के अंदर नहीं बुलाना चाहिए। रूट सैनिटाइज करना आसान नहीं होता। इसके लिए वीवीआईपी का सहयोग वांछित होता है।

कहीं भी गाड़ी रोकने के लिए कहना ठीक नहीं

कार्यक्रम की जानकारी अग्रिम तौर पर देना बहुत जरुरी है। सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति, किसी राजनीतिक कार्यक्रम में अपने समर्थकों को बहुत निकट बुलाकर बात करते हैं। जब सुरक्षा कर्मी उन्हें रोकते हैं, तो वीवीआईपी उस पर नाखुशी जाहिर करता है। सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति कहीं भी गाड़ी रोकने के लिए कह देते हैं। वे एकाएक गाड़ी से नीचे उतर जाते हैं। एसपीजी या कोई दूसरी एजेंसी अगर किसी वीवीआईपी को सुरक्षा दे रही है तो उसे पब्लिक के बीच मनमर्जी करने से बचना चाहिए। सुरक्षा घेरा तोड़कर, पब्लिक के बीच पहुंचना, कई बार बड़े जोखिम का कारण बन सकता है।

वीआईपी सिक्योरिटी में 30,000 से ज्यादा गाड़ियां

देश में लगभग 20 हजार वीआईपी को सुरक्षा प्राप्त है। इस पर सालाना 12000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। सुरक्षा में 60,000 से अधिक जवान तैनात हैं। 30,000 से ज्यादा गाड़ियां, वीआईपी सिक्योरिटी में इस्तेमाल हो रही हैं। केंद्र एवं राज्य सरकारें इस खर्च को वहन करती हैं। जेड प्लस सुरक्षा कवर में 46 लगभग सुरक्षाकर्मी रहते हैं। जेड के तहत 33, वाई प्लस में 11, वाई में 8 और एक्स श्रेणी में दो से छह तक जवान रहते हैं। जेड और जेड प्लस सुरक्षा में एस्कोर्ट भी चलती है।

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