VIP Security: 12000 करोड़ रुपये में 'महफूज' रहते हैं 'वीआईपी', सुरक्षा में तैनात हैं 60000 जवान और 30000 गाड़ियां
पंजाब सरकार ने 424 वीआईपी लोगों को दी गई सुरक्षा वापस ले ली है। पंजाब सरकार को वीआईपी सुरक्षा पर काफी खर्च करना पड़ रहा था। इससे पहले भी भगवंत मान सरकार ने कई विधायकों और पूर्व विधायकों एवं दूसरे नेताओं की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मचारियों को वापस बुला लिया था। जिन लोगों की सुरक्षा वापस ली गई हैं, उनमें विभिन्न दलों के नेताओं के अलावा अनेक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं।
विस्तार
देश में वीआईपी लोगों को 'महफूज' रखना महंगा पड़ रहा है। बीस हजार से अधिक विशिष्ट एवं अति विशिष्ट लोगों को एक तय संख्या में सुरक्षा कर्मी मिले हुए हैं। प्रधानमंत्री के एसपीजी सुरक्षा कवर से लेकर जेड प्लस, जेड, वाई प्लस, वाई और एक्स श्रेणी की सुरक्षा के अलावा केंद्र व राज्य में एक या दो सुरक्षाकर्मी साथ लेकर चलने वाले वीआईपी लोगों का आंकड़ा काफी बड़ा है। वीआईपी सुरक्षा में लगे अधिकारियों के मुताबिक, 12000 करोड़ रुपये के सालाना खर्च पर लगभग 20 हजार वीआईपी 'महफूज' रहते हैं। इनकी सुरक्षा में 60,000 से अधिक जवान तैनात हैं। 30,000 से ज्यादा गाड़ियां, वीआईपी सिक्योरिटी में इस्तेमाल हो रही हैं। इस खर्च में तो केवल सुरक्षाकर्मियों का वेतन और वाहनों का पेट्रोल डीजल ही शामिल है। मसलन, खाना पीना, रहना, ट्रेवलिंग अलाउंस, जोखिम भत्ता एवं दूसरा कई तरह का व्यय अलग रहता है। केंद्र एवं राज्य सरकारें इस खर्च को वहन करती हैं।
इन सभी को मिली हुई थी पुलिस सुरक्षा
पंजाब सरकार ने 424 वीआईपी लोगों को दी गई सुरक्षा वापस ले ली है। पंजाब सरकार को वीआईपी सुरक्षा पर काफी खर्च करना पड़ रहा था। इससे पहले भी भगवंत मान सरकार ने कई विधायकों और पूर्व विधायकों एवं दूसरे नेताओं की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मचारियों को वापस बुला लिया था। जिन लोगों की सुरक्षा वापस ली गई हैं, उनमें विभिन्न दलों के नेताओं के अलावा अनेक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। डेरे एवं धार्मिक नेताओं को भी सुरक्षा घेरा प्रदान किया गया था। जिनकी सुरक्षा वापस हुई है, उनमें से कुछ चुनींदा लोगों या संगठनों में डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास (10 पुलिसकर्मी), बलविंद सिंह, कांग्रेस के पूर्व विधायक (एक सिपाही), डेरा दिव्य ज्योति जागरण संस्थान नूरमहल (9 सिपाही), हरप्रीत सिंह सिद्धू एडीजीपी (6 सिपाही), एमएस भुल्लर रिटायर्ड डीजीपी (5 सुरक्षा कर्मी), संजीव गुप्ता रिटायर्ड आईपीएस (4 सुरक्षा कर्मी), परमराज सिंह निलंबित आईपीएस आईजी (4 सुरक्षा कर्मी), हरमिंद्र सिंह जस्सी (5 कमांडो), तेज प्रकाश सिंह (5 कमांडो), एसके शर्मा पूर्व डीजीपी (3 सुरक्षा कर्मी, दो कमांडो) और मोहम्मद मुतस्तफा डीजीपी 'रिटायर्ड' के पास 3 सुरक्षा कर्मी हैं। लगभग 40 वीआईपी ऐसे हैं, जिनके पास दो-दो सशस्त्र पुलिसकर्मी हैं। 124 वीआईपी के पास एक-एक हथियार बंद पुलिस कर्मी है। 17 वीआईपी के पास 3-3 पुलिस कर्मी हैं। आठ वीआईपी के पास 4-4 जवान हैं। 12 वीआईपी के पास अलग से कमांडो हैं।
नेताओं से लेकर पूर्व डीजीपी तक की लंबी फेहरिस्त
पंजाब में सुरक्षा प्राप्त चुनिंदा लोगों में एलके यादव आईपीएस (एक सुरक्षाकर्मी), राजीव शुक्ला, पूर्व सांसद एक्स चेयरमैन आईपीएल (एक सुरक्षाकर्मी), लखबीर सिंह लक्खा पूर्व एमएलए एक सुरक्षाकर्मी, नाथूराम पूर्व एमएलए एक सुरक्षाकर्मी, संजय तलवार पूर्व एमएलए एक सुरक्षाकर्मी, सुखपाल सिंह भुल्लर और संजय श्रीवास्ताव बीबीएमबी चेयरमैन को भी 1-1 सुरक्षा कर्मी मुहैया कराया गया था। एनपीएस औलख पूर्व डीजीपी पंजाब-1, डीएस मंगत पूर्व डीजीपी-1, चंद्रशेखर पूर्व डीजीपी-1, पी लाल पूर्व डीजीपी-1, पीसी डोगरा पूर्व डीजीपी-1, आरपी सिंह पूर्व डीजीपी-1, आरके गुप्ता पूर्व डीजीपी-1, एसके वर्मा पूर्व डीजीपी-1, एसएम शर्मा पूर्व डीजीपी-1, सूबे सिंह पूर्व डीजीपी-1, एसवी सिंह पूर्व डीजीपी-1, जगदीश कुमार मित्तल आईपीएस आईजी रिटायर्ड-1, परमजीत सिंह गिल आईपीएस आईजी रिटायर्ड-1, अमर सिंह चहल आईपीएस आईजी रिटायर्ड-1 व आरसी सेठी आईजी रिटायर्ड को भी सुरक्षा प्रदान की गई थी। एसएस विर्क एक्स डीजीपी जेड श्रेणी, केके अत्री डीजी रिटायर्ड को सुरक्षा, डीआर भट्टी पूर्व डीजीपी-3, जसमिंद्र सिंह पूर्व डीजीपी-3, एमके तिवारी पूर्व डीजीपी-3, राजन गुप्ता पूर्व डीजीपी-3, सुखदेव सिंह ढींढसा-4, संजीव गुप्ता पूर्व डीजीपी-4, एमएस भुल्लर पूर्व डीजीपी-5 व गुरबचन सिंह पूर्व डीजीपी को पंजाब पुलिस के पांच सुरक्षा कर्मी मुहैया कराए गए थे।
वीआईपी सुरक्षा पर होता है इतना सरकारी खर्च
सुरक्षा मामलों से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, सिक्योरिटी देने का मापदंड अलग अलग होता है। आईबी या लोकल एजेंसी की रिपोर्ट पर सुरक्षा मिलती है। हालांकि राज्यों में सुरक्षा देने का अपना ही एक मापदंड होता है। किसी को खतरा है या नहीं, सुरक्षा दे दी जाती है। अधिकांश राज्यों में रसूख के बल पर सुरक्षा मिल रही है। जेड प्लस सुरक्षा कवर में 46 सुरक्षाकर्मी रहते हैं। जेड के तहत 33, वाई प्लस में 11, वाई में 8 और एक्स श्रेणी में दो से छह तक जवान रहते हैं। हालांकि टीए डीए व दूसरे भत्ते कम ही मिलते हैं। पांच छह हजार से अधिक नहीं रहते। जेड और जेड प्लस सुरक्षा में एस्कोर्ट भी चलती है। कई बार केंद्रीय सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति को अपने दौरे पर वहां के राज्य की तरफ से सुरक्षा एवं वाहन प्रदान किए जाते हैं। देश में लगभग 240 लोगों को केंद्र की ओर से सुरक्षा दी गई है। यह आंकड़ा बदलता रहता है। आए दिन किसी की सुरक्षा हट जाती है तो किसी दूसरे वीआईपी को सुरक्षा प्रदान कर दी जाती है। अगर यहां 230 वीआईवी मानें तो उनकी सुरक्षा में लगभग 25 सौ से ज्यादा जवान तैनात रहते हैं। कई जगह पर एसआई, इंस्पेक्टर व एसी भी रहते हैं। एक सिपाही का मूल वेतन 35 से 40 हजार रहता है। इसमें अफसरों को भी, जिनकी संख्या कम रहती है, मिलाकर सिपाही का वेतन औसतन 45 हजार रुपये प्रति माह तय करते हैं तो एक माह में यह वेतन 11 करोड़ से ज्यादा हो जाता है। वैसे तो नियम है कि हेडक्वार्टर से अगर कोई आठ किलोमीटर दूर जा रहा है तो उसे टीए मिलता है। सुरक्षाकर्मियों को हाउस रैंट भी एक्स, वाई व जेड शहरों के तहत दिया जाता है।
20,000 वीआईपी पर 300 करोड़ रुपये प्रति माह खर्च
सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, बीस हजार वीआईपी की सुरक्षा के लिए 66 हजार जवान तैनात होते हैं तो एक जवान का औसत वेतन 45 हजार है। ऐसे में यह राशि 300 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा पर पहले रोजाना एक करोड़ 62 लाख रुपये खर्च होते थे। साल 2014-15 में एसपीजी का बजट 289 करोड़ रुपये था। 2015-16 में 330 करोड़ और 2019-20 में यह बजट 540.16 करोड़ रुपये कर दिया गया। साल 2021-22 में एसपीजी का बजट 429.05 करोड़ रुपये था। मौजूदा समय में केवल पीएम मोदी को ही एसपीजी सुरक्षा मिलती है, इसलिए रोजाना का खर्च कम होकर 1.17 करोड़ रह गया है। देश में सिक्योरिटी प्राप्त सभी लोगों की बात करें तो उनके लिए 30 हजार से ज्यादा गाड़ियां भी इस्तेमाल होती हैं। एक माह में बीस दिन गाड़ी चलती है। दो गाड़ी का एक दिन का खर्च यदि पांच हजार रुपये है तो यह खर्च 300 करोड़ रुपये से अधिक रहता है। वीआईपी गाड़ी रोजाना कम से कम पचास किलोमीटर तो चलती ही है। प्रधानमंत्री एवं दूसरे वीआईपी लोगों के सुरक्षा खर्च को देखें तो वह सालाना 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बैठता है।
कहां पर कितने लोगों को मिली है वीआईपी सुरक्षा
2019 की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 3,142 लोगों सुरक्षा दी गई थी। इसके बाद दूसरा नंबर पंजाब 2,594 का आता है। बिहार में 2,347 व हरियाणा में 1,355 और झारखंड में 1,351 लोगों को सुरक्षा मिली हुई थी। चुनाव के समय इस संख्या में बढ़ोतरी हो जाती है। दिल्ली में करीब 9 हजार जवान वीआईपी सुरक्षा में तैनात हैं। पांच सौ से अधिक लोगों को सुरक्षा मिली है। खास बात ये है कि इसके लिए दिल्ली पुलिस को बाहर से वाहनों का इंतजाम करना पड़ता है। किराये की गाड़ियों पर सालाना 53 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हो रही है। दिल्ली में अनेक वीआईपी के साथ पायलट एस्कोर्ट चलती है। जिन्हें जेड व जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली है, उनके लिए रोजाना के तामझाम पर करीब 11 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। अनेक वीआईपी ऐसे भी होते हैं, जिनके पास सुरक्षा कर्मियों के लिए अलग से गाड़ी नहीं होती। बाहर का दौरा है तो वहां रहने का इंतजाम नहीं मिलता। ऐसे में सुरक्षा कर्मियों को पास की अपनी यूनिट से सेवा लेनी पड़ती है। खाने पीने का इंतजाम भी खुद ही करना पड़ता है।