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Vinesh Phogat: थोड़ी सी चूक से फिर गया 140 करोड़ लोगों की उम्मीदों पर पानी, आखिर कैसे बढ़ गया वजन?
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Vinesh Phogat
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
विनेश फोगाट का वजन 100 ग्राम अधिक हो जाने के कारण उन्हें ओलंपिक कुश्ती का फाइनल मैच खेलने से अयोग्य करार दे दिया गया। इससे फोगाट से ओलंपिक स्वर्ण पदक की उम्मीद कर रहे देश के 140 करोड़ लोगों को भारी झटका लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर विनेश को अभी भी देश का असली चैंपियन होने की बात कही है। लेकिन सभी लोग यह जानकर हैरान हैं कि ओलंपिक खेलों के लिए बेहद कड़ी ट्रेनिंग से गुजरने वाली विनेश फोगाट और उनकी टीम से यह गड़बड़ी कैसे हो गई? विनेश फोगाट का वजन अब तक बिल्कुल सही रेंज में चल रहा था, फिर यह अचानक बढ़ कैसे गया? क्या फोगाट और उनकी टीम को इसकी जानकारी हो गई थी और क्या इसे ठीक करने की कोशिश की गई थी?
सूत्रों की मानें तो विनेश फोगाट और उनकी टीम को इस खतरे की जानकारी एक दिन पहले ही हो गई थी। वजन को नियंत्रित करने के लिए टीम ने कड़ी एक्सरसाइज करने के साथ-साथ कई अन्य प्रयास भी किए थे, लेकिन अंततः वे इसमें सफल नहीं हो पाए और फोगाट को इसका नुकसान उठाना पड़ा।
डाइटीशियन कोमल वशिष्ठ ने अमर उजाला से कहा कि सबसे पहले तो हमें यह समझना चाहिए कि 50 ग्राम या सौ ग्राम का वजन दिनभर की क्रिया में कई बार कम या अधिक होता रहता है। कड़ी भूख लगने पर वजन कुछ कम हो सकता है, तो केवल एक-दो ग्लास अतिरिक्त पानी पी लेने से इतना वजन बढ़ सकता है। इसी तरह खाने में कार्बोहाइड्रेट की कुछ मात्रा भी अधिक होने से वजन बढ़ जाता है, जबकि दो से चार किलोमीटर की साधारण चाल या दौड़ से भी इतना वजन कम हो सकता है। ऐसे में बेहद कड़ी नियंत्रित भोजन और एक्सरसाइज शेड्यूल से ही वजन को लिमिट में रखा जा सकता है।
कोमल वशिष्ठ ने कहा कि ओलंपिक स्पर्धाओं में वजन को लेकर जितने कड़े मानक बनाये जाते हैं और जिस तरह कड़ाई से उनका पालन किया जाता है, किसी खिलाड़ी के लिए यह बेहद मुश्किल है कि वह वजन को ठीक उसी मात्रा (विनेश फोगाट के मामले में 50 किलो) पर नियंत्रित कर सके। इस तरह की किसी संभावित गड़बड़ी से बचने के लिए खिलाड़ियों को अपना वजन तय मानक से एक किलो के आसपास (वजन कम रखने की आधिकारिक सीमा की अनुमति के अनुसार) रखना चाहिए। इससे कभी वजन में सौ-दो सौ ग्राम अधिक भी होता है तो खिलाड़ी को कोई नुकसान नहीं होता।
कार्बोहाइड्रेट कम, वसा ठीक
हम भारतीयों के अंदर यह धारणा बन गई है कि कार्बोहाइड्रेट अधिक खाना चाहिए, जबकि वसा कम खाना चाहिए क्योंकि इससे वजन बढ़ता है। जबकि शरीर विज्ञान के विशेषज्ञों का मानना है कि दैनिक श्रम और शरीर की आवश्यकता के अनुसार भोजन में कार्बोहाइड्रेट कम रखना चाहिए, जबकि अच्छे फैट को निश्चित सीमा के अंदर खाकर भी वजन कम किया जा सकता है। यह बड़ी गलतफहमी है कि फैट वजन को बढ़ाता है। यदि निश्चित सीमा के अंदर फैट लिया जाए, तो इससे वजन कम करने में सहायता मिलती है। डाइटीशियन के अनुसार, भोजन में सबसे अधिक प्रोटीन, उससे कम वसा और कार्बोहाइड्रेट सबसे कम रखने की कोशिश करनी चाहिए। जबकि आम भारतीयों का भोजन इसके ठीक उलट होता है। यानी हमारे भोजन में सबसे अधिक मात्रा रोटी या चावल की होती है। दाल-सब्जी बहुत कम होती है, जबकि कुल भोजन का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा इसी का होना चाहिए।