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Hindi News ›   India News ›   Vinay Mohan Kwatra IFS Veteran appointed as Foreign Secretary after Harshvardhan Shringala profile UN France and Nepal China US news in hindi

कौन हैं विनय मोहन क्वात्रा?: सीमा विवाद के बीच संभाले नेपाल से रिश्ते, UNSC में इन्होंने ही फ्रांस को बनाया भारत का स्थायी समर्थक

Mon, 04 Apr 2022 08:31 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 04 Apr 2022 08:31 PM IST
सार

विदेश मंत्रालय का विनय मोहन क्वात्रा पर अटूट भरोसा रहा है। ऐसे में सरकार ने उन्हें एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। 

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Vinay Mohan Kwatra IFS Veteran appointed as Foreign Secretary after Harshvardhan Shringala profile UN France and Nepal China US news in hindi
विनय मोहन क्वात्रा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

विदेश मंत्रालय ने नेपाल में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को भारत का अगला विदेश सचिव नियुक्त करने का फैसला किया है। वे इस महीने के अंत में रिटायर हो रहे विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला की जगह लेंगे। क्वात्रा को विदेशी कूटनीति का मास्टर कहा जाता है। दरअसल, अपने कार्यकाल के दौरान क्वात्रा ने अपनी पहचान ऐसे राजनयिक की बनाई है, जिसने अपनी नियुक्ति वाले हर देश में भारत के नजरिए का प्रचार किया और उस देश का समर्थन हासिल किया। फिर चाहे वह संयुक्त राष्ट्र की किसी एजेंसी की बात हो या फ्रांस से लेकर नेपाल तक की। विदेश मंत्रालय का उन पर भरोसा अटूट रहा है। ऐसे में सरकार ने उन्हें एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। 
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नेपाल में राजदूत रहते संभाले रिश्ते?
विनय मोहन क्वात्रा को मार्च 2020 में नेपाल का राजदूत नियुक्त किया गया था। यह वह दौर था, जब नई दिल्ली और काठमांडू के रिश्ते लगातार बिगड़ रहे थे। दोनों ही देश कालापानी समेत तीन सीमाई इलाकों को लेकर आपस में उलझे थे और इसी दौरान नेपाल के तत्कालीन पीएम केपी शर्मा ओली ने नेपाल में राष्ट्रवादी भावनाएं भड़काने के लिए भारत विरोधी बयानबाजी शुरू की। इतना ही नहीं उन्होंने चीन से नजदीकियां बढ़ाना भी शुरू किया था। 
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ऐसे में भारत सरकार ने क्वात्रा को जिम्मेदारी सौंपते हुए इस विवाद को कम करने की कोशिश की। कहा जाता है कि नेपाल में पांच मार्च को राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी से मिलने के बाद उन्होंने लगभग 24 घंटे के अंदर नेपाल के सभी बड़े नेताओं से मुलाकात कर ली थी। भारत का पक्ष समझाने के लिए उस दौरान क्वात्रा ने जिन अहम नेताओं से मुलाकात की, उनमें नेपाल कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा (जो कि अब नेपाल के प्रधानमंत्री हैं) शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने सरकार के कई मंत्रियों और विपक्षी नेताओं के साथ भी बैठक की थी। 
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नेपाल में राजदूत के तौर पर क्वात्रा का नियुक्ति काफी अहम ही थी। दरअसल, ऐसा काफी कम ही रहा है, जब किसी यूरोपीय देश में तैनात राजदूत को भारत के किसी पड़ोसी देश का राजदूत बना दिया जाए। हालांकि, 1988 बैच के इस भारतीय विदेश सेवा के अफसर के इतिहास को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी। 

क्यों सौंपी गई थी नेपाल की जिम्मेदारी?
क्वात्रा की नियुक्ति नेपाल में होने से पहले वे फ्रांस में भारत के राजदूत रहे थे। विदेश मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो क्वात्रा भारत के लिए फ्रांस का समर्थन जुटाने में सबसे आगे थे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में फ्रांस का समर्थन हासिल किया, जिसके चलते आतंकवाद से लेकर सुरक्षा परिषद में सदस्यता तक को लेकर फ्रांस ने भारत का साथ दिया। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और रक्षा समझौते कुछ और क्षेत्र रहे, जिनमें क्वात्रा ने अहम भूमिका निभाई। 


पीएमओ में दिखाई समझदारी, बने मोदी के पसंदीदा
क्वात्रा के लिए सबसे अहम कार्यकाल अक्तूबर 2015 से अगस्त 2017 से बीच का रहा, जब वे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में संयुक्त सचिव के पद पर थे। इस दौरान भी उन्होंने सरकार की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी पर ही काम किया और दोनों देशों के रिश्ते बेहतर करने में बड़ी भूमिका निभाई। कहा जाता है कि पीएमओ में रहने के दौरान ही वे एस जयशंकर और प्रधानमंत्री मोदी के करीबी अफसरों में शामिल हुए। 
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