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विकास दुबे मुठभेड़: साफ नीयत के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ सवालों से नहीं घबराते

Fri, 10 Jul 2020 09:20 PM IST
मुकेश कुमार झा शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Fri, 10 Jul 2020 09:20 PM IST
सार

  • बंदूक और ऊपर से मिली ऊर्जा हथियारबंद को बेलगाम बना देती है: अजय साहनी
  • दोष पुलिस पर मत मढि़ए, बनाई कहानी पर मत जाइए
  • आप मुख्यमंत्री की नीयत देखिए, क्या विकास दुबे अपराधी नहीं था?

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vikas dubey encounter: Chief Minister yogi Adityanath does not panic with questions
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

विस्तार

कुख्यात अपराधी विकास दुबे को कानपुर लाते समय, अनियंत्रित होकर पलटी, एसटीएफ की गाड़ी, मुठभेड़ की पूरी थ्यौरी सामने आ गई है। गाड़ी गाय-भैंस का अचानक झुंड आने, लांग ड्राइव के बाद ड्राइवर के बेहद थके होने के कारण गाड़ी पलटी। आगे जो यूपी पुलिस ने बताया, वह भी मनोरंजन थ्रिलर जैसा लगता है।

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पुलिस की इस मुठभेड़ पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहले ही सवाल उठा चुके हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार के सिस्टम पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी न केवल मीडिया, क्राइम रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार, तमाम पुलिस महकमें से जुड़े लोगों ने सवालों की झड़ी लगा दी है, बल्कि अदालत में भी मुठभेड़ को लेकर याचिका दायर हो चुकी है। हालांकि यूपी भाजपा के एक बड़े नेता का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सवालों से नहीं घबड़ाते।

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क्या हैं बड़े सवाल?

  1. पहला बड़ा सवाल है कि इतने बड़े कुख्यात अपराधी को पकडऩे के बाद पुलिस ने उसके हाथ को खुला क्यों छोड़ा?
  2. विकास दूबे के दोनों पैर में आपरेशन के बाद रॉड पड़ी थी। वह तेजी से भागने में असमर्थ है। यहां तक कि उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर से आते समय भी ठीक से चल नहीं पा रहा था, फिर गाड़ी पलटने के बाद हथियार छीनकर भागा कैसे?
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  4. क्या एक कुख्यात अपराधी को लेने गए ड्राइवर की गाड़ी का ड्राइवर इस कदर अनाड़ी था?
  5. विकास दूबे दो पुलिस के जवानों के बीच में बैठा था, फिर यह कैसे संभव हो पाया कि सब मुर्छित हुए और विकास पर इसका असर नहीं हुआ?
  6. विकास महाकाल मंदिर में सुबह सात बजे दाखिल हुआ था। दो घंटे बाद गिरफ्तार हुआ। पूरे दिन म.प्र. पुलिस अज्ञात स्थान पर पूछताछ करती रही। बाद में यूपी एसटीएफ के अफसरों ने की। रात भारत विकास पुलिस टीम के साथ गाड़ी में यात्रा करता रहा और अंत में गाड़ी पलटने पर कच्चे रास्ते पर भाग गया?
  7. क्या पुलिस जिन परिस्तियों में गाड़ी पलटने की बात कर रही है, संभव है?
  8. एडीजी प्रशांत कुमार ने प्रेसवार्ता में पत्रकारों के सवाल क्यों नहीं लिए?
  9. पुलिस की सफाई के अनुसार पिस्टल लेकर कच्चे रास्ते पर भागे विकास का पीछा करते हुए दूसरी गाड़ी के पुलिस अफसर काफी करीब तक गए। उसे जिंदा पकडऩे की कोशिश की, लेकिन उसने गोलियों की बौछार शुरू कर दी। क्या पुलिस की आपरेशनल क्षमता इतनी कमजोर थी कि उसने उसके पिस्टल की मैगजीन खाली होने का इंतजार उचित नहीं समझा?
  10. पुलिस ने विकास के सीने और सिर को निशाना क्यों बनाया?
  11. पुलिस की विकास को लेकर आ रही गाड़ियों के बीच में कितनी दूरी का अंतर था?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीयत साफ सवालों से नहीं घबराते

यूपी भाजपा के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीयत साफ है। वह राज्य की जनता को भयरहित साफ-सुथरा शासन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सूत्र का कहना है कि अपराधी विकास दूबे मध्यप्रदेश. में पकड़ा गया था। उसे राज्य की पुलिस लेकर आ रही थी। रास्ते में दुर्घटना हुई, उसने भागने की कोशिश की और मुठभेड़  में मारा गया। सूत्र का कहना है कि यूपी पुलिस ने अपना पक्ष रख दिया है। वरिष्ठ नेता के अनुसार कानून व्यवस्था सही तरीके से अपना काम कर रही है। विकास दूबे अपराधी था, मारा गया और मुख्यमंत्री इस पर उठ रहे सवालों से नहीं घबड़ाते।

जवाब कम, सवाल ज्यादा है : रणदीप सुरजेवाला
कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि विकास दुबे मुठभेड़ कांड जवाब कम और सवाल ज्यादा छोड़ गया है। वहीं यूपी. के भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने सीधे सवालों का जवाब देने की बजाय सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। कांग्रेस, सपा के नेताओं ने जहां मोर्चा खोल दिया है, वहीं भाजपा के नेता और यूपी. सरकार के मंत्री सीधे सवाल-जवाब से बच रहे हैं।

पुलिस बेलगाम कब होती है?
इंस्टीट्यूट ऑफ कांफ्लिक्ट मैनेजमेंट के निदेशक अजय साहनी ने उठते सवाल पर कहा कि आखिर पुलिस बेलगाम कब होती है? यह जानिए। उन्होंने कहा कि देश में न्यायतंत्र में तमाम खामियां हैं। जनता का पुलिस पर बहुत भरोसा नहीं रहा। राजनेताओं का अपराधी पर संरक्षण रहता है।

ऐसे में जब पुलिस को अवसर मिलता है तो वह अपराधी को निबटा देती है? कभी कभी पुलिस की निबटाना मजबूरी भी बन जाता है। अजय साहनी का कहना है कि जिसने आठ पुलिस वालों की हत्या कराई है और उसमें शामिल रहा है, उसका तो बचना नामुमकिन है।

अब यह स्टेज इंकाऊटर कहिए या कुछ और लेकिन मुठभेड़ मान लीजिए। साहनी ने कहा कि पुलिस के हाथ में बंदूक होती है। जब उसे ऊपर से ईशारा मिलता है तो वह कभी-कभी बेलगाम भी हो जाती है। विकास दूबे के साथ मुठभेड़ की नैतिकता के सवाल पर साहनी ने कहा कि यह सब बातें आदर्श परिस्थितियों के लिए है। वैसे भी यूपी. पुलिस की गिनती प्रोफेशनल पुलिस बल में नहीं होती।

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