मुर्शिदाबाद में घुसपैठ पर नकेल: शुभेंदु सरकार ने BSF को दी 27 किमी जमीन, 18 किमी में लगाए जाएंगे कंटीले तार
पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के लिए बीएसएफ को 27 किलोमीटर जमीन सौंप दी है। इसमें 18 किलोमीटर क्षेत्र में कंटीले तारों की बाड़ लगाई जाएगी, जबकि नौ किलोमीटर हिस्सा बीएसएफ चौकियों और अन्य ढांचागत सुविधाओं के लिए इस्तेमाल होगा। आइए विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को 27 किलोमीटर जमीन सौंप दी है। गुरुवार को राज्य सचिवालय नबान्ना में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बीएसएफ अधिकारियों की मौजूदगी में औपचारिक रूप से भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया की शुरुआत की।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
राज्य के मुर्शिदाबाद और मालदा जिले इस समय सुरक्षा और राजनीतिक दोनों वजहों से बेहद अहम माने जा रहे हैं। इन्हीं संवेदनशील इलाकों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सीमा पर फेंसिंग और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया।
दरअसल, मुर्शिदाबाद और मालदा दोनों जिले सीधे बांगलादेश सीमा से जुड़े हैं और यहां बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है। 2011 की जनगणना के मुताबिक मुर्शिदाबाद में मुस्लिम आबादी करीब 66 प्रतिशत और मालदा में 51 प्रतिशत है। भाजपा लंबे समय से इन इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाती रही है। पार्टी का आरोप है कि अवैध घुसपैठियों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए स्थानीय स्तर पर पहचान दिलाई जाती रही है।
हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के शुरुआती फाइनल आंकड़ों में भी मुर्शिदाबाद और मालदा चर्चा में रहे। करीब 60 लाख से ज्यादा लंबित मतदाताओं में लगभग एक-तिहाई सिर्फ इन दो सीमावर्ती जिलों से हैं। मुर्शिदाबाद में ऐसे मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा 11.01 लाख बताई गई, जबकि मालदा में यह आंकड़ा 8.28 लाख है।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर लगाया आरोप
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर असहयोग के जरिए सीमा सुरक्षा में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सीमा पर बाड़बंदी राष्ट्रीय और राज्य सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री ने घुसपैठ, तस्करी, नकली मुद्रा, जबरन धर्मांतरण और अवैध रूप से घुसे बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े अपराधों का हवाला देते हुए कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सीमा सुरक्षा को मजबूत करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में और जमीन भी बीएसएफ को हस्तांतरित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का खर्च केंद्र सरकार और बीएसएफ द्वारा उठाया जाएगा।
भारत पश्चिम बंगाल से कितनी सीमा साझा करता है?
पश्चिम बंगाल की सीमा लगभग 2,200 किलोमीटर तक बांग्लादेश से लगती है, जबकि भारत-बांग्लादेश की कुल सीमा करीब 4,000 किलोमीटर लंबी है। इनमें से लगभग 1,600 किलोमीटर हिस्से में पहले ही फेंसिंग की जा चुकी है, जबकि करीब 600 किलोमीटर क्षेत्र अब भी बिना बाड़ के है।
सरकार की ओर से इस बार कुल 27 किलोमीटर क्षेत्र के लिए जमीन सौंपी गई है। इसमें 18 किलोमीटर हिस्से में कंटीले तारों की बाड़ लगाई जाएगी, जबकि नौ किलोमीटर क्षेत्र बीएसएफ चौकियों और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए इस्तेमाल होगा।
बीएसएफ ने सरकार के फैसले की सराहना की
वहीं, बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीन कुमार ने राज्य सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा अभियानों में जिस सहयोग की लंबे समय से जरूरत थी, वह अब नई सरकार के तहत मिल रहा है।