शख्सियत: 83 साल के फारुख अब्दुल्ला ने देखें हैं जीवन के कई निराले बसंत
- पंजाब के सीएम मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के साथ डांस ने बनाई फारुख की बिंदास छवि
- कांग्रेस से लेकर भाजपा तक से रहा है समान वेवलेंथ का राजनीतिक नाता
- अपने निराले अंदाज के लिए जाने जाते हैं फारुख अब्दुल्ला
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के तीन बार के मुख्यमंत्री, केन्द्र सरकार में वैकल्पिक ऊर्जा मंत्री रहे 83 साल के फारुख अब्दुल्ला का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो कैप्टन अमरिंदर सिंह की पोती के विवाह समारोह का है। इसमें फारुख अब्दुल्ला नीली शेरवानी, सफेद पायजामा, चिरपरिचित कश्मीरी टोपी में बिल्कुल अलग, निराले अंदाज में दिखाई दे रहे हैं। 'आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे' गाने पर थिरकते हुए फारुख अपने मित्र पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पकड़ कर डांस फ्लोर पर लाते हैं। इस उम्र में वह उनके साथ कई गानों पर थिरकते हैं। बहुत कम लोगों को पता होगा कि फारुख अब्दुल्ला ने अपने जीवन के इस सफर में न जाने कितने और कैसे-कैसे बसंत देखे हैं।
फारुख अब्दुल्ला के बारे में जानने वालों का कहना है कि वह आल राउंडर हैं। किसी भी मसले को बारीकी से समझने का प्रयास करते हैं और समझने के बाद ही आगे बढ़ते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम आजाद जैसे तमाम भारतीय राजनीति के दिग्गज फारुख की व्यवहार कुशलता, समझ, निजी स्तर के व्यवहार के कायल हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से भी फारुख अब्दुल्ला के ताल्लुकात बहुत अच्छे थे।
1996 में जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के चुनाव जीतने के बाद फारुख अब्दुल्ला तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री (1996-2002) बने थे। इसके बाद उनकी पार्टी एनडीए में शामिल हो गई थी और उमर अब्दुल्ला केन्द्र सरकार में मंत्री बने थे। 1994 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से समझौते के बाद वह दूसरी बार 1986 में राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। मनमोहन सिंह की सरकार में 2009-14 तक केन्द्रीय वैकल्पिक ऊर्जा मंत्री थे। जबकि कांग्रेस के सहयोग से फारुख के बेटे उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने।
राजनीति कहां करनी थी : त्यंदाले स्कूल, मेडिकल की पढ़ाई, लंदन में डाक्टरी
फारुख अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला अपने जमाने में जम्मू-कश्मीर राज्य की बड़ी शख्सियत रहे हैं। खैर, बात पहले फारुख की। फारुख जब अपने पिता और अपने खानदान, कश्मीरी और कश्मीरियत का भारत के साथ लगाव, पाकिस्तान के साथ न जाने की बात बोलते हैं तो उनका अंदाज बड़े संवेदनशील तरीके से अलग दिखाई देता है। जब वह हिन्दू-मुसलमान, भारत की धर्म निरपेक्षता, सार्वभौमिकता पर संसद में अपनी राय रखते हैं तो फारुख को देखते, सुनते बनता है।
इस बार भी वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के जवाब में बोले थे। राम, अयोध्या में राम मंदिर और अपनी आस्था पर भी अपने विचार दिए थे। संसद फारुख को सुन रहा था। जबकि फारुख अब्दुल्ला को शायद राजनीति करनी नहीं थी। इसलिए जयपुर के एसएमएस मेडिकल कालेज (राजस्थान) से एमबीबीएस की डिग्री लेने के बाद वह लंदन चले गए थे। शुरुआती शिक्षा उनकी श्रीनगर के टिंडेल-बिस्को स्कूल में हुई थी। कहा तो यह भी जाता है कि फारुख का लंदन जाना उनके पिता शेख को भी पसंद नहीं था। डा. फारुख अब्दुल्ला ने लंदन में जाकर वहां चिकित्सक के रूप में अपनी प्रैक्टिस शुरू की और बाद में ब्रिटिश मूल की नर्स मौली से निकाह कर लिया। उनकी पत्नी मौली इसाई हैं। उनके बेटे और पूर्व केन्द्रीय मंत्री जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का जन्म भी लंदन में ही हुआ था।
लंदन से लौट आए श्रीनगर और बन गए राजनेता
नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला के बारे में खुलकर कुछ नहीं बोलते। खैर, पिता शेख अब्दुल्ला के दबाव में फारुख 1980 के दशक में लंदन से श्रीनगर लौट आए। श्रीनगर से लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया और निर्विरोध चुने गए। तब शेख अब्दुल्ला ही राज्य के मुख्यमंत्री थे। 1981 में फारुख अपनी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष चुने गए और 1982 में शेख अब्दुल्ला के निधन के बाद राज्य के मुख्यमंत्री बन गए। 1984 में उनके ही बहनोई गुलाम मोहम्मद शाह ने पार्टी में बगावत कर दी और अब्दुल्ला सरकार गिरा दी। उन्होंने कांग्रेस के सहयोग से सरकार बना ली। लेकिन शाह अधिक समय तक सरकार नहीं चला सके। दरअसल गुलाम मोहम्मद शाह खुद को शेख अब्दुल्ला का राजनीतिक वारिस मानते थे। उन्होंने ही 1977 के चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस के मास्टर माइंड की भूमिका निभाई थी। फारुख अब्दुल्ला तो खुद को लंदनवासी बना चुके थे। लेकिन उन्हें (फारुख) श्रीनगर लौटना पड़ा और शेख अब्दुल्ला ने उन्हें राजनीतिक विरासत सौंप दी। यह शाह पचा नहीं पाए।
फारुख ने भी बेटे को सौंपी राजनीतिक विरासत
फारुख अब्दुल्ला एक चतुर राजनीतिज्ञ हैं। उन्होंने अपने जीवन काल में ही सलीके से उमर अब्दुल्ला को पार्टी में स्थापित कर दिया। उमर अब्दुल्ला न केवल केन्द्र सरकार में मंत्री रहे हैं, बल्कि 2009 में कांग्रेस के साथ साझा सरकार के सूत्रधार रहे। राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। अब नेशनल कांफ्रेंस की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधे पर है। फारुख तीन बेटियों के पिता भी हैं और सबसे छोटी बेटी सारा अब्दुल्ला राजस्थान के कांग्रेस नेता सचिन पायलट की पत्नी हैं। फारुख अब्दुल्ला की सोच के बारे में कहा जाता है कि वह उदारवादी नेता हैं। उन्हें सारा अब्दुल्ला के सचिन पायलट से प्रेम पर कोई बड़ा एतराज नहीं था। इसी तरह से उमर अब्दुल्ला के हिन्दू परिवार की पायल नाथ से रिश्ते और विवाह को भी उन्होंने बिना बड़े विरोध के सहमति दे दी थी। फारुख अब्दुल्ला के सचिवालय सूत्र का कहना है कि सही माने में अब्दुल्ला परिवार एक धर्म निरपेक्ष परिवार है।
अल्लाह और भगवान में फर्क न कीजिए
09 फरवरी 2021, दिन मंगलवार और फारुख अब्दुल्ला का संसद में अपनी बात रखना। वह जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार संसद में अपनी राय रख रहे थे। फारुख अब्दुल्ला ने इस दौरान तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने सरकार को पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में बोलने में संवेदनशीलता बरतने की नसीहत भी दी। किसान आंदोलन पर भी बोले, सरकार को किसानों से सार्थक संवाद के लिए कहा, वहीं अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और राम पर भी बोले। उन्होंने कहा कि भगवान राम सबके हैं। पूरी दुनिया के हैं। कुरान और बाइबिल भी सबकी है। इसलिए सरकार को राम और अल्लाह में फर्क नहीं करना चाहिए।