फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Video Conference meeting called by Sonia Gandhi on coronavirus situation in India

विपक्षी दलों की बैठक में बोलीं सोनिया गांधी, कोरोना से जंग में सरकार हर मोर्चे पर फेल

Fri, 22 May 2020 09:14 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 22 May 2020 09:14 PM IST
सार

कोरोना वायरस के चलते प्रवासी मजदूरों की स्थिति और गिरती अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश आज विपक्षी दलों द्वारा की गई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक बुलाई थी, जिसमें 22 दलों के नेता शामिल हुए। इस दौरान जहां केंद्र के लॉकडाउन लगाने, उसे बढ़ाने और अब राहत देने के तरीके पर सवाल उठाए गए तो सोनिया ने ने राहत पैकेज को देश के साथ क्रूर मजाक करार दिया। 

विज्ञापन
Video Conference meeting called by Sonia Gandhi on coronavirus situation in India
विपक्षी दलों की बैठक - फोटो : एएनआई

विस्तार

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में शुक्रवार को विपक्षी दलों की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक हुई। इस बैठक में कोरोना वायरस महामारी के बीच प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और आर्थिक पैकेज पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। बैठक की शुरुआत विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा बंगाल और ओडिशा में चक्रवात अम्फान से पीड़ित लोगों के प्रति शोक जता कर हुई।

विज्ञापन


सोनिया गांधी ने कहा, भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आने से पहले ही देश की अर्थव्यवस्था संकट में थी। नोटबंदी और त्रुटिपूर्ण जीएसटी इसके प्रमुख कारण थे। आर्थिक गिरावट 2017-18 से शुरू हुई। सात तिमाही तक अर्थव्यवस्था का लगातार गिरना सामान्य नहीं था फिर भी सरकार गलत नीतियों के साथ आगे बढ़ती रही। 
विज्ञापन


कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, जैसा कि हम जानते हैं कि 11 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 को वैश्विक महामारी घोषित किया। पूरे विपक्ष ने सरकार को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया था। यहां तक कि जब 24 मार्च को केवल चार घंटे के नोटिस में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया, तब भी हमने इस फैसले का समर्थन किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा, कोरोना से जंग में प्रधानमंत्री का पहला अंदाजा कि 21 दिन में हम लड़ाई जीत लेंगे, गलत साबित हुआ। ऐसा लगता है वायरस तब तक रहेगा जब तक इसकी कोई वैक्सीन नहीं विकसित हो जाती है। उन्होंने कहा, सरकार लॉकडाउन के मानदंडों को लेकर भी निश्चित नहीं थी और न ही सरकार के पास इसे खत्म करने की कोई योजना है। कोरोना जांच और जांच किट के आयात के मोर्चे पर पर भी सरकार फेल रही है।

अम्फान को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग

बैठक में सभी विपक्षी दलों ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में चक्रवात अम्फान की वजह से हुई तबाही पर शोक व्यक्त किया और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए मौन रखा। बैठक में कहा गया कि देश  पहले से ही कोविड-19 से जंग लड़ा रहा है ऐसे में उसी दौरान चक्रवात अम्फान का आना दोहरा झटका और लोगों को भावनाओं को तोड़ने वाला है।

विपक्षी दलों ने केंद्र से आग्रह किया, ‘दोनों राज्यों के लोगों को सरकारों एवं देशवासियों से तत्काल मदद और एकजुटता की जरूरत है। विपक्षी पार्टियां केंद्र सरकार से आग्रह करती हैं कि इसे तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और फिर इसी के मुताबिक राज्यों को मदद दी जाए।’

विपक्षी दलों ने कहा, ‘फिलहाल राहत और पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। परंतु इस आपदा के परिणामस्वरूप कई दूसरी बीमारियां पैदा होने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए हम केंद्र सकार का आह्वान करते हैं कि वह दोनों राज्यों के लोगों की मदद करे।’

लोगों की मदद नहीं की गई तो तबाह हो जाएगी अर्थव्यवस्था : राहुल

वहीं, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा, लॉकडाउन के दो लक्ष्य हैं, बीमारी को रोकना और आने वाली बीमारी से लड़ने की तैयारी करना। लेकिन, आज संक्रमण बढ़ रहा है और हम लॉकडाउन खोल रहे हैं। क्या इसका मतलब है कि यकायक बगैर सोचे किए गए लॉकडाउन से सही नतीजा नही आया?

राहुल ने कहा, लॉकडाउन से करोड़ों लोगों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। अगर आज उनकी मदद नहीं की गई, उनके खातों में 7500 रुपये नहीं डाले गए, अगर उनके लिए राशन का इंतजाम नहीं किया गया, प्रवासी मजदूरों, किसानों और एमएसएमई की मदद नही की तो अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि लाखों करोड़ रुपयों का सरकार का पैकेज ये बात स्वीकार ही नहीं करता है। लोगों को कर्ज की नहीं बल्कि सीधे मदद की आवश्यकता है। हमारी जिम्मेदारी है की हम सब आवाज उठाएं। ये देश का सवाल है, दलों का नहीं। अगर ऐसा नही हुआ तो करोड़ों लोग गरीबी के जाल में उलझ जाएंगे।

'प्रवासियों की अनदेखी, आर्थिक पैकेज देश के साथ क्रूर मजाक'

सोनिया गांधी ने कहा, अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है। हर बड़े अर्थशास्त्री ने यही सलाह दी है कि राजकीय प्रोत्साहन की तत्काल आवश्यकता है। 12 मई को प्रधानमंत्री की बड़े 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा और वित्त मंत्री द्वारा पांच दिनों तक उसकी जानकारियां देते रहना इस देश के लिए एक क्रूर मजाक बन गया है। 

सोनिया ने कहा, इस महामारी की असल तस्वीर सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे लाखों प्रवासी मजदूर और उनके बच्चे बयां कर रहे हैं जो बिना पैसे, भोजन या दवाओं के चल रहे हैं और सिर्फ अपने घर जाना चाहते हैं। सोनिया गांधी ने कहा, प्रवासियों, 13 करोड़ परिवारों की सरकार ने बड़ी क्रूरता से अनदेखी की है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, हमारी जैसी सोच रखने वाले दलों ने मांग की थी कि गरीबों के पास नकदी पहुंचनी चाहिए, सभी परिवारों को मुफ्त अनाज मिलना चाहिए, प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए लिए बस और ट्रेन की व्यवस्था होनी चाहिए। हमने इस बात पर जोर दिया था कि कर्मचारियों और नियोक्ताओं की सुरक्षा के लिए वेतन असिस्टेंस और वेतन सुरक्षा फंड की स्थापना की जानी चाहिए। लेकिन, हमारी बात सुनी ही नहीं गई।

विपक्षी दलों ने केंद्र से की ये मांग

  • श्रम कानूनों सहित विभिन्न एकतरफा निर्णयों को वापस लिया जाए।
  • संशोधित और व्यापक आर्थिक पैकेज लाया जाए जो सच में राहत दे सके। 
  • संसद के कामकाज और निरीक्षण को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए।
  • कांग्रेस ने कहा कि केंद्र राज्यों के लिए तत्काल आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराए।
  • केंद्र प्रवासी मजदूरों का मुफ्त परिवहन सुनिश्चित कराए।
  • आयकर के दायरे से बाहर लोगों को सरकार छह महीने तक 7500 रुपये प्रति महीने नकद उपलब्ध कराया जाए।

उद्धव ठाकरे समेत 22 विपक्षी दलों के नेताओं ने लिया हिस्सा 

इस बैठक में देश के 22 विपक्षी दलों ने हिस्सा लिया है। रणदीप सुरजेवाला ने एक और ट्वीट में बताया कि बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, राहुल गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सीताराम येचुरी और द्रमुक नेता एमके स्तालिन, राजद नेता तेजस्वी यादव, नेकां के उमर अब्दुल्ला आदि विपक्षी नेता बैठक में शामिल हुए।

बैठक में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर प्रवासी श्रमिकों से जुड़े इस संकट से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया है। बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से रोकने के लिए गत 25 मार्च से देश में लॉकडाउन लगने के बाद बड़ी संख्या में श्रमिक बड़े शहरों से अपने घर जाने के लिए पैदल निकले। कई जगहों पर हुई दुर्घटनाओं में कई मजदूरों की मौत भी हो गई है।

देश में कोरोना वायरस महामारी के चलते प्रवासी मजदूरों के पलायन और गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने यह बैठक बुलाई है। कोरोना महामारी आने के बाद यह पूरे विपक्ष को साथ करने की पहली कोशिश है। 

केजरीवाल, मायावती और अखिलेश ने किया बैठक से किनारा

केंद्र को घेरने की इस कोशिश में कुछ बड़े विपक्षी दलों ने शामिल होने से इनकार भी किया। उत्तर प्रदेश की सियासत के दो प्रमुख चेहरों बसपा प्रमुख मायावती और सपा मुखिया अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं हुए तो दूसरी ओर दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी ने भी इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed