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नरोदा पाटिया केस: पीड़िता बोली- कोडनानी निर्दोष है तो मेरे परिवार को किसने मारा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Updated Fri, 20 Apr 2018 05:08 PM IST
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नरोदा पाटिया मामले में शुक्रवार को गुजरात हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी बाबू बजरंगी को 21 साल की जेल की सजा सुनाई है वहीं पूर्व मंत्री कोडनानी को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है। इस हमले में मारे गए परिवार की एक महिला सामने आई है और उसने कोर्ट के फैसले पर असंतोष जताते हुए कहा है कि इस हमले में मेरे परिवार के आठ लोग मारे गए थे।
कोर्ट के फैसले के बाद गुजरात में असंतोष का माहौल है। नरोदा पाटिया में हुए इस नरसंहार में करीब 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी और 33 लोग जख्मी हुए थे। इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने भाजपा विधायक माया कोडनानी और बाबू बजरंगी सहित 32 लोगों को दोषी ठहराया था।
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28 फरवरी 2002 को नरोदा पाटिया इलाके में सबसे बड़ा नरसंहार हुआ था। 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगियां जलाने की घटना हुई थी। उसके अगले ही दिन दंगे की लपटों ने नरोदा पाटिया में दस्तक दी। जिसके बाद यहां नरसंहार हुआ था। जिसमें 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी और 33 लोग जख्मी हुए थे। नरोदा पाटिया के नरसंहार को जहां गुजरात दंगों के दौरान सबसे भीषण नरसंहार कहा जाता है वहीं यह उतना ही विवादास्पद भी है। यह दंगों के दौरान का एक ऐसा केस है जिसकी जांच एसआईटी ने की थी।
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मेरे परिवार वालों को मेरी आखों के सामने एक एक कर मारा गया था। अगर वह निर्दोष हैं तो क्या मेरे परिवार वालों को हमने मारा है। महिला माया कोडनानी को निर्दोष साबित किए जाने से निराश है। बता दें कि कोर्ट ने इस मामले में हरीश छारा और सुरेश लंगड़ा को दोषी करार करते हुए कुल 31 लोगों में से 17 लोगों को बरी कर दिया है।
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कोर्ट के फैसले के बाद गुजरात में असंतोष का माहौल है। नरोदा पाटिया में हुए इस नरसंहार में करीब 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी और 33 लोग जख्मी हुए थे। इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने भाजपा विधायक माया कोडनानी और बाबू बजरंगी सहित 32 लोगों को दोषी ठहराया था।
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28 फरवरी 2002 को नरोदा पाटिया इलाके में सबसे बड़ा नरसंहार हुआ था। 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगियां जलाने की घटना हुई थी। उसके अगले ही दिन दंगे की लपटों ने नरोदा पाटिया में दस्तक दी। जिसके बाद यहां नरसंहार हुआ था। जिसमें 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी और 33 लोग जख्मी हुए थे। नरोदा पाटिया के नरसंहार को जहां गुजरात दंगों के दौरान सबसे भीषण नरसंहार कहा जाता है वहीं यह उतना ही विवादास्पद भी है। यह दंगों के दौरान का एक ऐसा केस है जिसकी जांच एसआईटी ने की थी।