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Jagdeep Dhankhar: जाति-संस्कृति के आधार पर विभाजित करने वाली ताकतें समाज के खिलाफ; उपराष्ट्रपति ने किया आगाह
Sat, 08 Feb 2025 04:30 PM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sat, 08 Feb 2025 04:30 PM IST
सार
गोपीचंद पी हिंदुजा द्वारा संकलित पुस्तक के बारे में जगदीप धनखड़ ने कहा कि यह पुस्तक भारतीयता की सार्वभौमिक प्रासंगिकता, सभी धर्मों में देखी जाने वाली सद्गुणता को दिखाती है। हम धर्मांतरण का प्रलोभन दिए बिना दूसरों की सच्चाई का सम्मान और सराहना कर सकते हैं।
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उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने लोगों को जाति, वर्ग, पंथ और संस्कृति के कृत्रिम विभाजन को बढ़ाने वाली ताकतों के प्रति आगाह किया है। उन्होंने शनिवार को एक पुस्तक के विमोचन के दौरान कहा कि ऐसी ताकतें समाज के लिए चिंता करने वाली है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो लोग ऐसी ताकतों के खतरे को समझते हैं वे भी संकीर्ण हितों के कारण इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
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उपराष्ट्रपति धनखड़ राजधानी दिल्ली में गोपीचंद पी हिंदुजा द्वारा संकलित पुस्तक आई एम? के विमोचन के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी भी आस्था में विश्वास रखने के लिए आजाद है। लेकिन लोगों को भ्रमित कर पैदा की गई आस्था मानव शोषण का सबसे खराब रूप है।
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उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि दूसरों पर वर्चस्व हासिल करना और जनसांख्यिकीय ताकत के जरिए दूसरों को अपने आधिपत्य के अधीन करना चिंता का विषय है। गोपीचंद पी हिंदुजा द्वारा संकलित पुस्तक के बारे में उन्होंने कहा कि यह पुस्तक भारतीयता की सार्वभौमिक प्रासंगिकता, सभी धर्मों में देखी जाने वाली सद्गुणता को दिखाती है। हम धर्मांतरण का प्रलोभन दिए बिना दूसरों की सच्चाई का सम्मान और सराहना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एकता का मतलब एकरूपता नहीं है। भारतीयता एक आदर्श उदाहरण है। यह विविधता में एकता का उदाहरण है।
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