स्कूली बच्चों को पीता देख सदन में उपराष्ट्रपति ने पूछा था... क्या होती है ई-सिगरेट
- ई-सिगरेट पर प्रतिबंध के बाद करीब 800 करोड़ रुपये का व्यापार होगा प्रभावित
- चीन, जापान, कोरिया और दुबई से सीधे भारत पहुंच रही हैं ई-सिगरेट
- अकेले दिल्ली में ही ई-सिगरेट का करीब 120 करोड़ रुपये का है कारोबार
- 16 राज्य पहले ही प्रतिबंध लगा चुके हैं ई-सिगरेट पर, दिल्ली में नहीं
- दिसंबर 2017 में राज्यसभा के पहले दिन उपराष्ट्रपति ने किए थे सवाल
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विस्तार
मोदी सरकार ने ई-सिगरेट की निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध का फैसला लिया है, लेकिन सरकार की ये कवायद उस वक्त शुरू हुई जब दिसंबर 2017 में राज्यसभा सत्र के पहले ही दिन उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से पूछा कि ये ई-सिगरेट क्या होती है? वे काफी आश्चर्यचकित भी थे।
अपनी बात खत्म हो उससे पहले उन्होंने कहा था कि नई दिल्ली के कई हिस्सों में वे स्कूली बच्चों के पास कुछ अजीब से उत्पाद देख चुके हैं जिनके एक सिरे पर लाल रोशनी भी दिखाई पड़ती है। एक बार उनका काफिला नई दिल्ली के गोल मार्केट से गुजर रहा था, उस वक्त भी उनकी निगाह कुछ स्कूली बच्चों पर पड़ी थी। इस पर तत्कालीन मंत्री जेपी नड्डा ने ई-सिगरेट के बारे में पूरी जानकारी सदन में दी थी।
यहां इसके दुष्प्रभावों पर काफी लंबी चर्चा हुई थी जिसके बाद इसके प्रतिबंध कोलेकर कवायद शुरू हुई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को ड्रग टेक्रिकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) ने प्रतिबंध पर सिफारिश की। वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने भी श्वेत पत्र जारी किया।
वर्ष 2018 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखते हुए ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने की पैरवी की थी, लेकिन तब से लेकर अब तक केवल 16 राज्य व 1 केंद्र शासित राज्य ही इस पर अमल कर सके। दिल्ली सहित बाकी राज्यों में ई-सिगरेट का कारोबार अभी भी चल रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार अधिसूचना जारी होने के बाद सभी दुकानदारों को ई-सिगरेट के भंडारण के बारे में नजदीकी थाना पुलिस को जानकारी देनी होगी। वहीं हर थाने के एक सब इंस्पेक्टर को औचक निरीक्षण करने की जिममेदारी भी दी जाएगी। ताकि इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके और बाजार से ई-सिगरेट के उत्पाद जब्त कर सकें।
क्या होती है ई-सिगरेट
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट या ई-सिगरेट एक बैटरी युक्त उपकरण है, जो निकोटिन वाले घोल को गर्म कर एयरोसोल पैदा करता है। इसके चलते जब कश लगाते हैं तो हीटिंग डिवाइस इसे गर्म करके भाप में बदल देती है। इसलिए इसे स्मोकिंग नहीं वेपिंग कहते हैं। इसका सीधे तौर पर छाती और मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ता है। विकसित देशों में विशेषकर युवाओं और बच्चों में इसने एक महामारी का रूप ले लिया है।
लंबे समय से ई-सिगरेट पर काम कर रहे स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ निदेशक ने इसके हर छोटे बड़े पहलू पर अमर उजाला से बातचीत की। इनके अनुसार करीब 460 ई-सिगरेट की कंपनियां देश में एक्टिव हैं। इनके करीब 7 हजार से ज्यादा फ्लैवर उत्पाद बाजारों में बिक रहे हैं जिनका कारोबार करीब 800 करोड़ रुपये के आसपास है, लेकिन इसका ब्लैक मार्केट करीब दोगुना यानि 1500 करोड़ रुपये का है। चीन, कोरिया, जापान और दुबई जैसे देशों से सीधे मुंबई, दिल्ली व गुजरात के रास्ते ई-सिगरेट के उत्पादों को बाजारों तक लाया जा रहा है। चूंकि अभी तक कानून नहीं था, इसलिए दुकानों पर खुलेआम इसकी बिक्री होती थी। स्कूली बच्चों से लेकर 20 से 25 वर्ष तक की आयु के युवा अक्सर ई-सिगरेट के साथ दिखते भी हैं।